जम्मू-कश्मीर बैंक का कुल कारोबार तीन लाख करोड़ रुपये के पार, जमा में 16 प्रतिशत की वृद्धि
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर बैंक (J&K Bank) ने अपनी स्थापना के 88 वर्षों के सफर में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के अंत में कुल कारोबार (Total Business) के ऐतिहासिक 3 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। इस शानदार वित्तीय प्रदर्शन से बैंकिंग क्षेत्र में जेएंडके बैंक की स्थिति और अधिक मजबूत होकर उभरी है। बैंक के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि बैंक का कुल कारोबार अप्रैल-जून तिमाही में 3.04 लाख करोड़ रुपये (1.73 लाख करोड़ रुपये जमा और 1.31 लाख करोड़ रुपये सकल अग्रिम) पर पहुंच गया है। यह सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है, जिसे जमा में 16 प्रतिशत से अधिक और सकल अग्रिम में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का समर्थन मिला है।
इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup 2026 | अमेरिका की ऐतिहासिक जीत में चमके और विलेन बने Folarin Balogun, जिदान-रोनाल्डिन्हो वाले खास क्लब में हुए शामिल
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ अपने 88 वर्षों के सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जम्मू-कश्मीर बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही (वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही) के अंत में कुल कारोबार के ऐतिहासिक तीन लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर लिया है। इससे वित्तीय क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है।’’ प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताव चटर्जी ने सभी हितधारकों को बधाई दी और बैंक की इस उल्लेखनीय यात्रा को आकार देने के लिए प्रवर्तकों, ग्राहकों, शेयरधारकों तथा कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसे भी पढ़ें: EPFO का बड़ा सुधारात्मक कदम: PF और पेंशन दावों के निपटान में देरी पर अधिकारियों को लगेगा 12% झटका, वेतन से कटेगा जुर्माना
चटर्जी ने कहा, ‘‘ दो लाख करोड़ रुपये से तीन लाख करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने का सफर करीब तीन वर्ष में पूरा किया गया जबकि एक लाख करोड़ रुपये से दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने में लगभग एक दशक लगा था। यह केवल तेज वृद्धि नहीं है, बल्कि यह एक बुनियादी रूप से बदले हुए संस्थान का प्रमाण भी है।’’ उन्होंने कहा कि तीन लाख करोड़ रुपये का कारोबार बैंक के 2030 तक पांच लाख करोड़ रुपये का कारोबार और 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
EPFO का बड़ा सुधारात्मक कदम: PF और पेंशन दावों के निपटान में देरी पर अधिकारियों को लगेगा 12% झटका, वेतन से कटेगा जुर्माना
देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अब अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) के तहत तीन नई योजनाओं— कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026, कर्मचारी पेंशन योजना 2026 और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना 2026 को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। इन नई योजनाओं में दावों (Claims) के समयबद्ध निपटान और डिजिटल अनुपालन (Digital Compliance) पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें सबसे बड़ा प्रहार लेटलतीफी करने वाले अधिकारियों पर किया गया है।
इसे भी पढ़ें: ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के साथ अमरनाथ यात्रियों का पहला काफिला रवाना, LG Manoj Sinha ने दिखाई हरी झंडी
मंत्रालय ने नई योजनाओं में ईपीएफओ अधिकारियों द्वारा भविष्य निधि निकासी, पेंशन तथा समूह बीमा संबंधी दावों का 20 दिन के भीतर निपटान नहीं करने पर 12 प्रतिशत की दर से वार्षिक दंडात्मक ब्याज का सख्त प्रावधान किया है। नई योजनाओं में कहा गया, ‘‘यदि आयुक्त बिना उचित कारण के सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद किसी दावे का 20 दिन के भीतर निपटान नहीं करते हैं, तो उक्त अवधि के बाद हुई देरी के लिए आयुक्त जिम्मेदार होंगे। लाभ राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है, जिसे आयुक्त के वेतन से काटा जाएगा।’’ नई योजनाएं कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971, कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना, 1976 का स्थान लेंगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पहले की योजनाओं में भी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दावों के निपटान में देरी होने पर दंडात्मक ब्याज का प्रावधान था। उन्होंने बताया कि पहले संबंधित अधिकारियों को भविष्य निधि जमा पर घोषित ब्याज दर के बराबर राशि देनी होती थी, जबकि अब इसे 12 प्रतिशत वार्षिक की निश्चित दर पर तय कर दिया गया है। अधिकारी ने साथ ही स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अंशदान के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। नियोक्ता और कर्मचारी दोनों पहले की तरह मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान देते रहेंगे।
इसे भी पढ़ें: Ayodhya Ram Mandir Donation Scam | वाराणसी की सुरक्षा एजेंसी से जुड़े तार, हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी नोटों की गिनती
नियोक्ता के 12 प्रतिशत अंशदान में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाएगा जबकि केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत की सब्सिडी देगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, नई योजनाओं में नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि सदस्य बिना किसी देरी के सभी सेवाओं का ऑनलाइन तथा निर्बाध तरीके से लाभ उठा सकें। नई योजनाओं के तहत ईपीएफओ द्वारा विनियमित छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों या भविष्य निधि न्यासों को भी अपने सदस्यों के लिए दावों और अन्य आवेदनों की ऑनलाइन दस्तावेज जमा (ई-फाइलिंग) कराने की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
News Source - PTI Information
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi




















