चीन में बन रहे हैं नकली अंडे? वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी, जानिए क्या है इसकी पूरी सच्चाई
Fake Eggs Viral Video: सोशल मीडिया पर आए दिन ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जो लोगों को हैरान करने के साथ-साथ चिंता में भी डाल देते हैं. इसी बीच इन दिनों इंटरनेट पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग फैक्ट्री जैसी जगह पर अंडे बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ये 'नकली अंडे' हैं, जिन्हें केमिकल और बाकी कुछ चीजों की मदद से तैयार किया जा रहा है. वहीं सबसे हैरानी की बात ये है कि इन अंडों को देखने पर इन्हें असली और नकली में फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन लगता है.
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई है. कई यूजर्स इसे चीन में बनाई जा रही नकली फ़ूड आइटम
का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसकी सच्चाई जानना चाहते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में बाजार में नकली अंडे बनाए और बेचे जा रहे हैं, या फिर ये वीडियो किसी और वजह से बनाया गया है? तो आइए जानते हैं इस वायरल वीडियो की पूरी कहानी.
कहां से वायरल हुआ वीडियो?
वायरल वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जेनिफर जेंग नाम की यूजर ने साझा किया. वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, "अंडे पैदा करने का एक नया तरीका! कितना अच्छा और तेज! मैं दो महीने से मुर्गियां पाल रही हूं, लेकिन अभी तक एक भी अंडा नहीं मिला." उनके इस पोस्ट के बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया और लाखों लोगों ने इसे देखा और शेयर किया.
????SHOCKING
— Amitabh Chaudhary (@MithilaWaaala) July 1, 2026
Artificial eggs being produced in factories in China … no you can’t eat natural eggs even , all thanks to China which is the global factory of duplicate and adulterated goods pic.twitter.com/mXKhzOL0qk
वीडियो में क्या दिख रहा है?
करीब 21 सेकंड लंबे इस वीडियो में एक छोटे से कमरे में कुछ लोग अंडे जैसी चीज तैयार करते दिखाई देते हैं. वीडियो में सबसे पहले चम्मच की मदद से पीले रंग के तरल पदार्थ से अंडे की जर्दी जैसी गेंद बनाई जाती है. इसके बाद दो हिस्सों को जोड़कर उन्हें सफेद रंग के गाढ़े घोल के बीच रखा जाता है, जिससे अंडे का सफेद भाग तैयार होता हुआ दिखाई देता है. इसके बाद तैयार की गई इस चीज को भूरे रंग के एक दूसरे घोल में डुबोया जाता है. कुछ ही देर में उसके ऊपर कठोर खोल जैसा कवरिंग बन जाता है. आखिर में जो चीज सामने आती है, वो बिल्कुल असली अंडे जैसी दिखाई देती है. यही वजह है कि वीडियो देखने के बाद कई लोग ये मान बैठे कि फैक्ट्री में नकली अंडे तैयार किए जा रहे हैं.
क्या सचमुच ये खाने वाले नकली अंडे हैं?
वायरल वीडियो की सच्चाई इससे काफी अलग बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोगों द्वारा पोस्ट किए गए फैक्ट-चेक में दावा किया गया कि ये वीडियो नया नहीं है, बल्कि साल 2017 से इंटरनेट पर अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जा रहा है. फैक्ट-चेक के दौरान वीडियो में एक कोरियाई कंपनी का लेबल दिखाई दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनी बच्चों के खेलने के लिए स्लाइम (Slime) और उससे जुड़े खिलौने बनाने वाले प्रोडक्ट बेचती है. वीडियो में जो अंडे जैसी वस्तु बनाई जा रही है, वो सच में खाने के लिए नहीं बल्कि खिलौने या स्लाइम प्रोडक्ट का हिस्सा बताई गई है. यानी वायरल वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.
अंडे भी न'कली बन रहे हैं ——
— Shrwan Meghwal (@ShrwanMeghwal6) July 2, 2026
मतलब मिलावट की भी हद होती है...
इंसानों की इस लालची अंधी दौड़ से मुझे लगता है ,, इंसानों की प्रजाति जल्द
ही ख़त्म होने वाली है.....!! pic.twitter.com/0BNRGNwtzW
एफएसएसएआई अधिकारी ने क्या कहा?
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि इंडियन फ़ूड सेफ्टी और मानक अथॉरिटी के एक अधिकारी ने साफ किया है कि वर्तमान समय में ऐसी कोई तकनीक या केमिकल मौजूद नहीं है, जिससे बिल्कुल असली अंडे जैसी खाने योग्य नकली अंडे बड़े पैमाने पर तैयार किए जा सकें. हालांकि, फ़ूड आइटम्स में मिलावट के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं, लेकिन वायरल वीडियो को नकली खाने वाले अंडों का सबूत मानना सही नहीं होगा.
ईवी की हिस्सेदारी 2030 तक 20 प्रतिशत पहुंचने से एक लाख करोड़ रुपए कम हो सकता है आयात बिल: एसबीआई रिसर्च
नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संकट के चलते भारतीयों का इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की तरफ रुझान बढ़ा है और 2030 तक ईवी की बाजार हिस्सेदारी 20 प्रतिशत पहुंचने से आयात बिल में एक लाख करोड़ रुपए की कमी आ सकती है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की ओर से गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
मौजूदा समय में भारतीय बाजार में ईवी की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है।
अमेरिका-ईरान युद्ध 28 फरवरी को शुरू होने के बाद भारत में ईवी के पंजीकरण में जोरदार तेजी देखने को मिली। मार्च-जून की अवधि में देश में औसत 2.3 लाख ईवी प्रति माह पंजीकृत हुए हैं, यह आंकड़ा 2025 में औसत 1.3 लाख प्रति माह था।
रिपोर्ट में कहा गया, मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, हमें लगता है कि 2026 में कुल ईवी पंजीकरण 25 लाख का आंकड़ा पार कर सकते हैं।
कुल पंजीकरण में पूर्ण ईवी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। 2024 में पूर्ण ईवी की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम थी, जो 2026 में अब तक बढ़कर 8 प्रतिशत से अधिक हो गई है। कुछ राज्यों में पूर्ण ईवी की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं। कुल चार्जिंग स्टेशनों में से 35 प्रतिशत सिर्फ दो राज्यों (कर्नाटक और महाराष्ट्र) में हैं।
नई ईवी पॉलिसी के तहत, दिल्ली सरकार अगले चार सालों में 32,000 चार्जिंग पॉइंट का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की योजना बना रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ईवी की सफलता काफी हद तक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
भारत में 2025 तक 2.86 करोड़ गाड़ियां रजिस्टर्ड थीं और यह आंकड़ा 2030 तक 4 करोड़ गाड़ियों तक पहुंचने का अनुमान है। इन गाड़ियों में से 20 प्रतिशत ईवी होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी की तारीफ की गई, जिससे तहत पहले तीन सालों में दो-पहिया गाड़ियों के लिए खरीद पर इंसेंटिव (कुल मिलाकर 60,000 रुपए) दिया जाएगा। तीन-पहिया गाड़ियों के लिए, कुल इंसेंटिव 1,20,000 रुपए है। एन1 कमर्शियल ट्रकों को पहले साल में 1 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। दिल्ली में ईवी के लिए रोड टैक्स और एक बार की रजिस्ट्रेशन फीस पर 100 प्रतिशत छूट दी गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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