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चीन अब इस देश पर कर रहा कब्जा! राष्ट्रपति ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप, अमेरिका ने दी खुली चेतावनी

Panama Canal:चीन की विस्तारवादी नीति हमेशा से चर्चा में रही है। ट्रंप के बयान से यह नीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। राष्ट्रपति ट्रंप का आरोप है कि चीन अब पनामा देश की पनामा नहर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि ट्रंप ने साफ शब्दों में चीन को चेतावनी भी दी है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पनामा नहर का नियंत्रण कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए था। उनका कहना है कि नहर का नियंत्रण मिलने के बाद पनामा ने जहाजों से वसूले जाने वाले पारगमन शुल्क बढ़ा दिए हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि चीन इस अहम जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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बुधवार (स्थानीय समय) को मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर का नियंत्रण सौंपने का फैसला गलत था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर चीन को इस रणनीतिक नहर पर कब्जा या नियंत्रण हासिल नहीं करने देगा।

अधिकार सौंपने को बताया गलत

ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर, हमने उसे यूं ही दे दिया। जानते हैं उन्होंने सबसे पहले क्या किया? उन्होंने जहाजों की कीमतें चार गुना बढ़ा दीं, और उनका एक भी जहाज नहीं डूबा। फिर उन्होंने कीमतें दो बार और बढ़ाईं, और उनका एक भी जहाज नहीं डूबा। उन्होंने बस सालों साल तक बेतहाशा पैसा कमाया। यह कितनी बेवकूफी थी? 

चीन को दी चेतावनी

ट्रंप ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि अब चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, और हम ऐसा नहीं होने देंगे, ठीक है? और यह स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था क्योंकि मेरे पास वास्तव में कोई स्क्रिप्ट नहीं है क्योंकि यह चीज काम नहीं करती।

क्यों अमेरिका ने दिया था नियंत्रण?

ट्रंप की टिप्पणियों में 1977 की टोरिजोस-कार्टर संधियों के तहत नहर का नियंत्रण हस्तांतरित करने के अमेरिकी निर्णय का जिक्र किया गया था, एक ऐसी प्रक्रिया जो 1999 में पनामा द्वारा जलमार्ग का पूर्ण नियंत्रण ग्रहण करने के साथ समाप्त हुई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की

इस बीच, ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता के मामले में सुप्रीम कोर्ट के रवैये की आलोचना दोहराई, साथ ही हाल के उन फैसलों की प्रशंसा की, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति के अधिकार को बहाल किया और योग्यता-आधारित प्रणाली को मजबूत किया। थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि जन्मजात नागरिकता के मामले में अदालत ने गलती की है, लेकिन उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मुद्दा अंततः हल हो जाएगा।

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बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों के पक्ष में आए मोहन भागवत, कहा- वे शरणार्थी नहीं योद्धा थे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS चीफ मोहन भागवत बटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों के पक्ष में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोग शरणार्थी नहीं थे बल्कि वे लोग संघर्ष के योद्धा थे, जिन्होंने मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम की वजह से कई कठिनाइयों और दर्द को झेला है. भागवत ने कहा कि मातृभूमि के लिए इन्होंने पाकिस्तान में अपनी संपत्ति और व्यवसाय छोड़कर भारत आने का फैसला किया.

बता दें, भागवत ने ये बातें एक दिन पहले महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहीं. सिंधी समाज की ओर से इस सोसाइटी का संचालन किया जाता है.

कार्यक्रम में उन्होंने आगे कहा कि विभाजन के बाद इन लोगों ने जानबूझकर भारत आने का फैसला किया. क्योंकि वह उस भूमि पर रहना चाहते थे, जहां बिना किसी डर के वे अपने धर्म का पालन कर सकें. वे शरणार्थी नहीं थे. वे विस्थापित थे. वे योद्धा थे. अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम की वजह से उन्होंने कष्ट झेले हैं. करियर या फिर धन नहीं बल्कि उन्होंने देश और धर्म को चुना है. 

जीवन की मुश्किलों पर भागवत ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए किसी को भी हार नहीं माननी चाहिए. बल्कि दोबारा से उठने का प्रयास करना चाहिए. ऐसा करने वाले व्यक्ति को ही अंत में सफलता मिलती है. कार्यक्रम में उन्होंने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का जिक्र भी किया. उन्होने कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का एक मौका देते हैं.

 

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  Sports

सचिन तेंदुलकर को भी सालभर बेंच पर बिठाकर पिलावाया पानी, अब बिहार के वैभव सूर्यवंशी की भी यही कहानी!

Vaibhav Sooryavanshi के बहाने चलिए भारतीय क्रिकेट इतिहास के ऐसे पन्ने को याद करते हैं, जिसे शायद बहुत कम लोग जानते हैं. बेहद कम लोगों को पता होगा कि आज वैभव सूर्यवंशी के साथ जैसा सूलुक हो रहा है. 14 साल के तेंदुलकर को 1987/88 के घरेलू सीजन के लिए मुंबई की टीम में शामिल किया गया था, लेकिन प्लेइंग इलेवन में आने के लिए उन्हें एक साल का इंतजार करना पड़ा. Thu, 2 Jul 2026 06:59:34 +0530

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