पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हालिया सैन्य गतिविधियों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की नई कोशिशों के तहत कतर की राजधानी दोहा में हुई बातचीत से सकारात्मक संकेत मिले हैं। कतर के आधिकारिक बयान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों ने इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या दोनों देशों के बीच परमाणु कूटनीति फिर से पटरी पर लौट रही है।
कतर ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बातचीत करने वालों के बीच अलग-अलग बैठकों से 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़े मुद्दों पर "सकारात्मक प्रगति" हुई है और दोनों पक्ष आने वाले दिनों में बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। यह ताज़ा बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रही है, जहाँ ईरान, अमेरिका और इज़राइल से जुड़ी हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद कूटनीतिक बातचीत का महत्व फिर से बढ़ गया है।
कतर ने दोहा बातचीत के सकारात्मक नतीजों की पुष्टि की
कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बातचीत कतर और पाकिस्तान ने मिलकर कराई, जिसमें दोनों देशों ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। कतर के प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने X पर जानकारी दी कि यह बातचीत लेक ल्यूसर्न शिखर सम्मेलन के दौरान बनी समझ पर आधारित थी।
अल-अंसारी ने कहा, "कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने आज दोहा में अमेरिका और ईरान के बातचीत करने वालों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इनमें लेक ल्यूसर्न शिखर सम्मेलन के नतीजों को आगे बढ़ाते हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई। पक्ष आने वाले समय में बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए और अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी।" कतर के अधिकारी के अनुसार, बातचीत का अगला दौर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के बाद होगा।
ईरान ने अमेरिका के पिछले वादों को लेकर चिंता जताई
ईरान ने दोहा बातचीत के दौरान अपना पक्ष भी रखा। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि तेहरान ने वाशिंगटन द्वारा पहले किए गए वादों को पूरा करने को लेकर चिंता जताई। ग़रीबाबादी ने कहा, "हमने दोहा बैठक में लेबनान में वादों को पूरा न करने के अमेरिका के मामले को उठाया।"
उन्होंने यह भी बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ बातचीत में ईरान के शुरू में फ्रीज़ किए गए 6 अरब अमेरिकी डॉलर के एक हिस्से के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। गरीबाबादी ने कहा, "कतर के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में, शुरुआती 6 अरब अमेरिकी डॉलर के एक हिस्से के खर्च से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई। इस बात पर सहमति बनी कि बताई गई ज़रूरतों के आधार पर ज़रूरी सामान खरीदा जाएगा और ईरान को सौंपा जाएगा।"
पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार की वजह से अगली बैठक में देरी हो सकती है
ईरान के अधिकारियों ने ईरान और इराक में कई जगहों पर पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच तय किए हैं। उम्मीद है कि इन कार्यक्रमों की वजह से बातचीत का अगला दौर कुछ समय के लिए टल जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध के पहले दिन एक हवाई हमले में खामेनेई मारे गए थे।
'ईरान परमाणु बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया पर सकारात्मक बात कही। नॉर्थ डकोटा में हाल ही में बनी थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी का दौरा करने के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की कोशिशें अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं।
ट्रंप ने कहा, "वे काफी आगे आ चुके हैं। हमने पिछले हफ्ते उन पर ज़ोरदार हमला किया था। वे ठीक हैं। हम इसे हासिल कर लेंगे। यह ईरान का परमाणु-मुक्त होना है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर दोहराया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वॉशिंगटन का रुख नहीं बदला है।
उन्होंने आगे कहा, "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। वरना, हम जो कुछ भी देखते हैं या करते हैं, उसके मुकाबले देश में ऐसी गतिविधियां कभी नहीं देखी गईं जैसी अभी हो रही हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाजों पर हुए हमलों से जुड़े हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान का नज़रिया बदल गया है।
दोहा बातचीत क्यों अहम है
दोहा बातचीत, क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के समय अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बनाए रखने की हालिया कूटनीतिक कोशिशों में से एक है। हालांकि बातचीत से अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन कतर का बयान जिसमें "सकारात्मक प्रगति" का संकेत दिया गया है, बताता है कि दोनों पक्ष 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अहम मुद्दों पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के बाद भी बातचीत जारी रखने का फैसला यह दिखाता है कि क्षेत्र में जारी राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं।
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