जिम्स प्रशासन की कर्मचारियों से अपील, कहा- मरीजों के हित में काम पर लौटें, मांगों पर बनेगी समिति
ग्रेटर नोएडा, 29 जून (आईएएनएस)। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), ग्रेटर नोएडा के प्रशासन ने पिछले 15 दिनों से आंदोलनरत कर्मचारियों से तत्काल कार्य पर लौटने की भावुक अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों के प्रति वह पूरी सहानुभूति रखता है और जिन मुद्दों का समाधान संस्थान स्तर पर संभव होगा, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। वहीं शासन स्तर से जुड़े विषयों को तत्काल कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
जिम्स प्रशासन की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इसमें कर्मचारियों के तीन प्रतिनिधि और जिम्स प्रशासन के तीन प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति की अध्यक्षता जिला प्रशासन करेगा और जो भी निर्णय समिति देगी, उसका संस्थान स्तर पर निस्तारण किया जाएगा अथवा आवश्यक होने पर शासन को भेजा जाएगा।
प्रशासन ने आंदोलनरत कर्मचारियों से कहा कि कुछ बाहरी अराजक तत्व उन्हें भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं और अपने स्वार्थ के लिए आंदोलन का इस्तेमाल करना चाहते हैं। संदेश में यह भी कहा गया कि पिछले कुछ दिनों से यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि पुलिस कर्मचारियों को उनके हॉस्टल या घरों से उठाएगी, जबकि ऐसा किसी के साथ नहीं हुआ। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि जो कर्मचारी कानून व्यवस्था का उल्लंघन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जिम्स प्रशासन ने चिंता जताई कि लगातार 15 दिनों से चल रहे धरना-प्रदर्शन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इसका सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन ने कर्मचारियों से मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल काम पर लौटने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी कार्य पर वापस नहीं आते हैं तो संस्थान को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि कर्मचारियों के हित में प्रशिक्षण, उच्च संस्थानों में कोचिंग, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा वेतन एवं भत्तों में सुधार जैसे विषयों पर सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे। साथ ही स्पष्ट किया गया कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में लिए जाने वाले निर्णय उन कर्मचारियों पर लागू होंगे, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान संस्थान में सेवाएं दी हैं और भविष्य में भी अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। अपने संदेश में जिम्स प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने अथवा कार्यरत कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
प्रशासन ने कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिम्स प्रशासन ने आंदोलनरत कर्मचारियों से किसी के बहकावे में न आने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि सभी मांगों पर समयबद्ध तरीके से विचार किया जाएगा तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने लीगल रिव्यू पर उठाए सवाल, रिपोर्ट्स को बताया 'अनावश्यक'
मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। एचडीएफसी बैंक की ओर से पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के रिव्यू के लिए नियुक्त की गई लीगल फर्मों vने काफी नियम एवं शर्तों के साथ रिपोर्ट जमा की है। इसमें बैंक के इंटरव्यू और बोर्ड मीटिंग के मिनट्स पर फोकस किया गया है। यह जानकारी चक्रवर्ती के हवाले से एक रिपोर्ट में दी गई।
एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा कि उनका इस्तीफा बैंक की कुछ बिजनेस प्रैक्टिस और पर्सनल वैल्यू में अंतर को लेकर था और इसके जरिए कोशिश बैंक को अंतरिक समीक्षा के लिए प्रेरित करना था। लेकिन उनका कहना है कि लॉ फर्मों ने इसके बजाय अनुपालन के पहलू पर ध्यान केंद्रित किया।
चक्रवर्ती का कहना है कि उन्होंने कई बार बैंक से पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान और शर्तें के तहत इन लॉ फर्मों को नियुक्त किया गया, लेकिन बोर्ड ने यह जानकारी उन्हें कभी नहीं दी। इसी वजह से उन्होंने इस पूरी कानूनी कवायद को अनावश्यक बताया।
एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले पर चक्रवर्ती ने बताया कि दुबई का एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामला उनके कार्यकाल में सामने आया था। लेकिन बैंक ने उस समय तेजी से सुधारात्मक कदम उठाए थे।
चक्रवर्ती ने यह बताने से इनकार कर दिया कि बैंक की कौन-सी कारोबारी प्रथाएं उनके मूल्यों के खिलाफ थीं। साथ ही कहा कि बोर्डरूम की बातें बोर्डरूम तक ही रहनी चाहिए।
पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से 18 मार्च को इस्तीफा दिया था।
2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए चक्रवर्ती ने इस्तीफे में पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर हुए कुछ घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की थी
इस दौरान उन्होंने कहा, पिछले दो वर्षों में मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और कार्यप्रणालियां देखी हैं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उपरोक्त निर्णय का आधार है। मैं पुष्टि करता हूं कि मेरे इस्तीफे का उपरोक्त कारणों के अलावा कोई अन्य ठोस कारण नहीं है।
--आईएएनएस
एबीएस
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