टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ (TIAS) में शनिवार को 24वें वार्षिक दीक्षांत समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता संस्थान के चेयरमैन डॉ. आर. के. गुप्ता ने की। इस अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. संजय द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में तथा वरिष्ठ उद्योग विशेषज्ञ श्री संतोष मित्तल विशिष्ट अतिथि के नाते उपस्थित रहे।
समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ. अजय गुप्ता, डीन डॉ. एम. एन. झा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान के विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सफल विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपाधियाँ प्रदान की गईं। साथ ही विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। उपाधि एवं सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर उपलब्धि, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति आशा का विशेष उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
मुख्य अतिथि प्रो. संजय द्विवेदी ने दीक्षांत भाषण में विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत केवल शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संचार और तीव्र तकनीकी परिवर्तन का युग है, जिसमें केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं, बल्कि निरंतर सीखना, नवाचार करना और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज, राष्ट्र तथा मानवता के कल्याण के लिए करें तथा अपने पेशेवर जीवन में नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। प्रोफेसर द्विवेदी ने अध्यापकों का आह्वान किया कि वे एआई के समय में अपने विद्यार्थियों को डिजिटल ट्रांसफार्मेशन के लिए तैयार करें।
विशिष्ट अतिथि संतोष मित्तल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को वैश्विक कॉर्पोरेट जगत की बदलती आवश्यकताओं, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, टीमवर्क तथा जीवनपर्यंत सीखने की संस्कृति को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सफलता उन्हीं को प्राप्त होती है जो बदलते परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करते रहते हैं।
समारोह के अध्यक्ष संस्थान के चेयरमैन डॉ. आर. के. गुप्ता ने बताया कि टीआईएएस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहभागिता तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान, प्रतिभा और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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‘त्रिकाल संध्या’ पुस्तक भवानी प्रसाद मिश्र का एक ऐतिहासिक कविता संग्रह है, जो आपातकाल की क्रूरता पर प्रहार करता है। वे केवल शिकायत नहीं करते, बल्कि अपनी कविताओं को ही प्रतिरोध का एक सक्रिय माध्यम बना देते हैं। वे घने अंधकार में भी उम्मीद और उजाले का रास्ता सुझाते हैं।
यह कहना है सुप्रसिद्ध साहित्यकार शकुंतला मित्तल का। वे अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से संबद्ध इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा शनिवार को प्रवासी भवन, नई दिल्ली में भवानी प्रसाद मिश्र कृत ‘त्रिकाल संध्या (आपातकाल की कविताएं)’ पुस्तक पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्त कर रही थी।
मित्तल ने कहा कि इस पुस्तक में कवि ने इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में देश पर थोपे गए आपातकाल के दौरान की परिस्थितियों को लेकर अपनी पीड़ा, आक्रोश, वेदना और चुनौती को बहुत ही सहज लेकिन धारदार शब्दों में व्यक्त किया है।
वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि जब देश में आपातकाल के दौरान लोगों की गिरफ्तारी, प्रेस पर सेंसरशिप, लोकतंत्र की हत्या और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाकर भय का माहौल व्याप्त किया गया, तब भवानी प्रसाद मिश्र नियमबद्ध तरीके से (त्रिकाल—सुबह, दोपहर, शाम) कविताएं लिख रहे थे। यह भाव उनके क्रांतिकारी मन की उपज था, जिसका लोगों पर प्रभाव पड़ा।
साहित्यकार डॉ. नवीन नीरज ने कहा कि आपातकाल के दौरान अनेक क्रांतिकारी कविता लिखने वाले कवि सत्ता के डर से मूकदर्शक बने हुए थे, वहीं भवानी प्रसाद मिश्र ने त्रिकाल संध्या के रूप में कविताएं लिखकर सार्थक प्रतिरोध किया। युवा लेखिका गुंजन शर्मा ने कहा कि भवानी प्रसाद मिश्र आपातकाल जैसे जटिल माहौल में भी अपनी साहित्यिक शैली की सरलता और बोलचाल की भाषा को नहीं छोड़ा और सहजता से प्रतिरोध किया। युवा पत्रकार विवेक वशिष्ठ ने कहा कि भवानी प्रसाद मिश्र की पुस्तक ‘त्रिकाल संध्या’ स्वतंत्रता के दमन के विरुद्ध लिखा गया ऐतिहासिक काव्य-प्रतिरोध है।
इस पुस्तक-चर्चा का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक मोनिका जायसवाल ने किया। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती प्रांत टोली सदस्य मुन्ना रजक, शिवम पांडेय, वैभव कृष्ण तिवारी, विकास आनंद ने सहभागिता की।
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