IPS Transfer: पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव, इन 5 आईपीएस अफसरों का हुआ तबादला, जानें किसे कहाँ भेजा गया?
उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 5 आईपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण (IPS Transfer) किया है। लखनऊ पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों को नया पदभार सौंपा गया है। तबादले और नियुक्ति से संबंधित आदेश 27 जून को जारी किया गया है।
आईपीएस अधिकारी महेश त्यागी को सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) यातायात पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह लखनऊ सहायक पुलिस आयुक्त पद पर कार्यरत थे। सहायक पुलिस आयुक्त, साइबर, उत्तर प्रदेश-112 लाइंस पद पर प्रतीक दहिया को नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह एसीपी लखनऊ पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
गाजीपुर और महिलाबाद के नए ACP कौन?
- अतुल कुमार पांडे को सहायक पुलिस आयुक्त गाजीपुर पद पर नियुक्त किया गया है।
- महिलाबाद एसीपी पद पर कार्यरत सुजीत कुमार दुबे को कैण्ट का नया एसीपी बनाया गया है।
- कैण्ट एसीपी पद पर कार्यरत ज्ञानेंद्र सिंह को सहायक पुलिस आयुक्त महिलाबाद पर तैनात किया गया है।
यूपी के 30 पीपीएस अधिकारी बनेंगे आईपीएस
उत्तर प्रदेश के 30 प्रांतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को प्रमोशन मिलने वाला है, वे भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी बनने वाले हैं। नई दिल्ली में आयोजित को संघ लोक सेवा आयोग की एक में अफसरों के नाम पर मुहर लगा दी गई है। इस सूची में सुरेंद्र चंद्र रावत, शोएब इकबाल, आलोक शर्मा, राहुल मिठास, राजकुमार प्रथम, महेश सिंह अत्री, विनीत भटनागर, जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शशि शेखर सिंह, कुलदीप सिंह प्रथम, ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, हरेंद्र प्रताप यादव, वंश राज सिंह यादव, डॉ कृष्ण गोपाल, मधुबन कुमार सिंह, कपिल देव सिंह, राहुल श्रीवास्तव, बलवंत कुमार चौधरी, प्रीति बाला गुप्ता, राजेश पांडे प्रथम, पूर्णेन्दु सिंह, विकास चंद्र त्रिपाठी, मार्तंड प्रकाश सिंह, अभय नाथ त्रिपाठी, हरेंद्र कुमार, देवेश कुमार शर्मा, पवित्र मोहन त्रिपाठी, सिद्धार्थ वर्मा, प्रशांत कुमार प्रसाद, डॉ अरविंद कुमार का नाम शामिल है।
वीर न्यास मामले में दिग्विजय सिंह की सरकार को क्लीन चिट, बोले- सबकुछ नियमानुसार हुआ, दलाल आरोप लगाते हैं
एक तरफ जहां देश में राम मंदिर चढ़ावा चोरी से राजनीतिक मामला गरमाया हुआ है तो वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश की सियासत में अलग ही आरोपों की जंग छिड़ी हुई है। हाल ही में कांग्रेस ने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार, रिश्तेदारों पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसकी गूंज दिल्ली तक जा पहुंची है।
बता दें कि ये मामला प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर की मीडिया में सुर्खियों में बना हुआ है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाए कि सीएम मोहन यादव के परिवार के सदस्यों ने उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन और आसपास सैंकड़ों एकड़ जमीन खरीदी। इतना ही नहीं जीतू पटवारी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ने अपने करीबी को 500 करोड़ रुपये की जमीन 1 रुपये में दी है। उसके ट्रस्टी रामजी नाम के व्यक्ति हैं। जो मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार हैं। पटवारी के इन आरोपों के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर से तेज हो गई है।
जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक ऐसा बयान दे दिया है जो सियासी गलियारों में अलग ही चर्चा का केंद्र बन गया। दिग्विजय सिंह ने 500 करोड़ रुपये की जमीन एक निजी ट्रस्ट को 1 रुपये में देने वाली बात को खारिज कर सरकार के समर्थन में अपना पक्ष रख दिया।
1 रुपये में निजी नहीं, सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी जमीन: दिग्विजय सिंह
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने कहा कि ऐसी बात सामने आई है कि 1 रुपये में किसी प्राइवेट ट्रस्ट को जमीन दी गई है बल्कि ऐसी नहीं वो जमीन प्राइवेट ट्रस्ट को नहीं, सरकारी ट्रस्ट को दी गई है। उन्होंंने कहा कि मैं कोई भी बात बिना रिसर्च के नहीं बोलता, उन्होंने एक लिखित प्रमाण दिखाते हुए कहा कि जिस ट्रस्ट को जमीन दी गई है उसके सदस्य कमलनाथ भी रहे हैं। जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे तब ये चर्चा चल रही थी कि इसको ओबेरॉय हॉटल को दे दिया जाए और एक हॉटल बनाई जाए। लेकिन बाद में वहां पर आरएसएस या किसी और का प्रभाव पड़ा कि होटल के वह जमीन नहीं दी जाए। बल्कि वहां पर वीर भारत न्यास बनाइए।
दिग्विजय ने कहा, पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है। इस जमीन को जिस रजिस्ट्रार ने हस्ताक्षर किया है उसने इसका पूरा विवरण भी दिया। इसलिए वह आरोप सही नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि बात ऐसी है कि इस देश में दलालों की कमी नहीं है। दलाल लोगों का काम है छोटे आरोप लगाना और पैसा वसूला करना है।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार
बता दें कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए गए कथित जमीन घोटाले के आरोपों को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से बेबुनियाद और व्यक्तिगत आरोप लगा रही है। पार्टी का कहना है कि जिस वीर भारत न्यास को उज्जैन में एक रुपये में भूमि आवंटित किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, वह कोई निजी ट्रस्ट नहीं, बल्कि राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के अधीन संचालित एक सरकारी न्यास है।
भाजपा के मंत्रियों ने कहा कि पूरे मामले की कानूनी पहलुओं से समीक्षा की जा रही है। पार्टी की लीगल सेल इस प्रकरण का परीक्षण कर रही है और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का नोटिस भेजने की भी तैयारी की जा रही है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News




















