Faria Abdullah: बोनालु उत्सव में शामिल होने पर ‘काफिर’ कहकर ट्रोल हुईं मुस्लिम एक्ट्रेस, फूट-फूटकर रोईं; बोलीं- नफरत के बदले...
Faria Abdullah: तेलुगु एक्ट्रेस फारिया अब्दुल्ला को हैदराबाद में बोनालु उत्सव में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। कुछ यूजर्स ने उनकी मुस्लिम पहचान को लेकर सवाल उठाए और उन्हें ‘काफिर’ तक कह दिया। ट्रोलिंग के बाद फारिया ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर कर आलोचकों को जवाब दिया। वीडियो में वह अपने आंसू नहीं रोक पाईं।
बोनालु उत्सव में शामिल हुई थीं फारिया
फारिया अब्दुल्ला हैदराबाद के श्री महाकालेश्वर अम्मावरी मंदिर में बोनालु उत्सव में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक कपड़े पहने और दूसरी महिलाओं के साथ बोनम उठाया। वह ढप्पू की धुन पर डांस करती भी नजर आईं।
उत्सव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने फारिया के बोनालु में शामिल होने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ यूजर्स ने उनके मुस्लिम परिवार से होने का हवाला देते हुए उनकी आलोचना की और उन्हें ‘काफिर’ तक कह दिया।
मेरे पिता ने अपनी पसंद से इस्लाम अपनाया
ट्रोलिंग के बाद फारिया ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें वह काफी भावुक नजर आईं और अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बात की। फारिया ने कहा, “मेरे पिता कन्वर्टेड मुस्लिम हैं। क्या आप समझते हैं इसका क्या मतलब है? उन्होंने इस्लाम अपनाया क्योंकि उन्हें यह धर्म पसंद था।” उन्होंने बताया कि उनके पिता पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था।
एक्ट्रेस ने कहा कि ऐसे परिवार में पली-बढ़ी होने के कारण उन्होंने धर्म को अलग नजरिए से समझा है। उन्होंने बचपन से इस्लाम की अच्छी बातें देखी हैं। उनके मुताबिक, किसी दूसरे समुदाय के त्योहार में शामिल होना अपने धर्म या आस्था को छोड़ना नहीं है।
काफिर कहते हो तो भी मैं आपके लिए अच्छा चाहूंगी
फारिया ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने उन्हें ‘काफिर’ कहा। उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें गलत रास्ते पर जाने वाला या काफिर मानता है, तब भी वह उसके लिए बुरा नहीं चाहेंगी। एक्ट्रेस ने कहा कि वह नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि प्यार से देना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी लोगों को प्यार भेजूंगी जो अभी मुझसे नफरत कर रहे हैं, क्योंकि मुझे पता है कि मेरा दिल सच्चा है।”
मुझे पेड़, पत्थर और तितलियों में भी जिंदगी दिखती है
फारिया ने कहा कि उन्हें पेड़, पत्थरों और तितलियों में भी जिंदगी और ईश्वर नजर आते हैं। उनका मानना है कि दुनिया की खूबसूरती लोगों को भगवान के करीब लानी चाहिए, न कि उनके बीच धर्म के नाम पर दूरी पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह प्यार, एकता और शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। उनके लिए नफरत के बीच प्यार बांटना ही उनकी ‘बगावत’ और ‘क्रांति’ है। अपनी बात कहते-कहते फारिया अपने इमोशंस पर काबू नहीं रख पाईं और कैमरे के सामने रोने लगीं।
बचपन में मां से पूछा था 'अल्लाह' का मतलब
फारिया ने वीडियो में बचपन की एक घटना भी याद की। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने अपनी मां से पूछा था कि ‘अल्लाह’ का मतलब क्या होता है? फारिया के मुताबिक, उनकी मां ने उन्हें बताया था कि इसका मतलब ‘रोशनी’ है। इसी बात का जिक्र करते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि अगर ईश्वर हर जगह मौजूद है, तो फिर किसी चीज को उससे अलग कैसे किया जा सकता है?
बोनालु में शामिल होने की बताई थी खास वजह
फारिया पहले एक पॉडकास्ट में भी अपने धर्म और बोनालु को लेकर बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि वह एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी हैं, जहां अलग-अलग संस्कृतियों को समझने और सम्मान देने का माहौल रहा है। एक्ट्रेस ने कहा था कि मंदिर और दूसरे पूजा स्थल उनके लिए हमेशा पवित्र रहे हैं। उन्होंने पहले कभी बोनालु में हिस्सा नहीं लिया था, इसलिए इस बार वह इस त्योहार का हिस्सा बनना चाहती थीं। बोनम उठाना उनके बचपन के सपनों में से एक था।
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Raja Sen Hospitalised: बंगाली सिनेमा के दिग्गज निर्देशक राजा सेन की हालत नाजुक, वेंटिलेटर पर चल रहा इलाज
दिग्गज बंगाली फिल्म निर्देशक राजा सेन ( Raja Sen) की तबीयत गंभीर बताई जा रही है। 70 वर्षीय फिल्ममेकर को शनिवार को कोलकाता के सरकारी SSKM Hospital में भर्ती कराया गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के हवाले से PTI ने बताया कि डॉक्टर उनकी हालत पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।
राजा सेन की तबीयत गंभीर
राजा सेन लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य जटिलताओं से जूझ रहे हैं। अब उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा सेन की लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याएं कई साल पहले शुरू हुई थीं। बताया जाता है कि उनकी फिल्म ‘माया मृदंगा’ के सेट पर गिरने के बाद उनकी पीठ में गंभीर चोट लगी थी। उस समय चोट को बहुत गंभीर नहीं माना गया था, लेकिन समय के साथ इसका असर उनकी चलने-फिरने की क्षमता पर पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल की शुरुआत में उनके शरीर के निचले हिस्से में कमजोरी महसूस होने लगी थी। इसके बाद मेडिकल जांच में एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या का पता चला। इसके बाद फरवरी में उनकी बड़ी सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद उनकी हालत में कुछ सुधार देखने को मिला था, लेकिन हाल ही में उनकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। इससे उनके परिवार और बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।
राजा सेन का फिल्मी करियर
राजा सेन का जन्म 1955 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 90 के दशक में बंगाली सिनेमा में बतौर निर्देशक अपनी पहचान बनाई। उन्हें 1997 में टेलीसीरियल ‘सुबर्णलता’ से बड़ी पहचान मिली। अपने शुरुआती करियर में राजा सेन डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘Suchitra Mitra’ के लिए उन्हें 1993 में नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट आर्ट्स/कल्चरल फिल्म से सम्मानित किया गया था।
इसके बाद 1997 में उन्होंने फीचर फिल्म ‘Damu’ से निर्देशन की शुरुआत की। इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म मिला था। दो साल बाद 1999 में राजा सेन को ‘Atmiyo Swajan’ के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिल्म ऑन फैमिली वेलफेयर से सम्मानित किया गया। उनकी कई फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी सराहना और पुरस्कार मिले हैं।
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