BJP ने Vande Mataram अनादर पर Congress से मांगी माफी, सोनिया-राहुल पर साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान ‘‘घोर अनादर’’ दिखाया। भाजपा ने उनसे माफी की मांग की। सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं ने सोनिया गांधी पर कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताने का भी आरोप लगाया।
हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। पार्टी ने कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी को लेकर कह रही थीं, क्योंकि वह काफी समय से खड़े थे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘‘यह देखा गया कि जब राष्ट्रगीत गाया जा रहा था, तब उनकी शीर्ष नेता सोनिया गांधी, प्रमुख नेता राहुल गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ध्यान नहीं दे रहे थे।’’ भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसके बजाय वे आपस में बातचीत कर रहे थे...यह राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रति उनके घोर अनादर को दर्शाता है।
यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य देखने को मिला।’’ उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि कांग्रेस ने अब तक वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को स्वीकार नहीं किया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हम कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के इस निंदनीय कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं।’’ त्रिवेदी ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व से ‘‘माफी और स्पष्टीकरण’’ की मांग करते हुए कहा कि उनके ‘‘आपत्तिजनक और निंदनीय कृत्य’’ से देश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो संविधान के प्रति उनकी आस्था और निष्ठा, राष्ट्र के प्रति समर्पण तथा स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनके सम्मान पर सवाल उठेंगे।’’ भाजपा के संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने कांग्रेस के कार्यक्रम की वीडियो फुटेज साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मां, बेटा और राष्ट्रीय अध्यक्ष (कांग्रेस के) को संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन से ही आपत्ति है…कुछ सोच 1947 से पहले जैसी थी, वैसी ही 1947 के बाद भी बनी हुई है।’’ भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता दिवस के दिन आज जो दृश्य सामने आया, वह बेहद शर्मनाक है।
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भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी की आपत्ति और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से यह पूछना कि इसे क्यों बजाया जा रहा है, कांग्रेस पार्टी की सोच को उजागर करता है।’’ अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम्’ के प्रति कांग्रेस का रवैया लोगों को पार्टी की ‘‘आपातकाल वाली सोच’’ की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता इस सोच को नकार चुकी है और आगे भी इसे नकारती रहेगी।’’ इस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी। इसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह फैसला लिया गया था कि कांग्रेस के अधिवेशनों में वंदे मातरम् के शुरुआती छंद का गायन किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि टैगोर ने नेहरू और बोस को सलाह दी थी कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती कुछ छंद का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
रमेश ने कहा, ‘‘तब से हम हर अधिवेशन में उन्हीं पंक्तियों का गायन करते आ रहे हैं। हमारा सेवा दल इसे गाता है, हमारे कार्यकर्ता इसे गाते हैं। इसको लेकर कोई विवाद नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि शनिवार को राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण का गायन किया गया।
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कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर संसद में 16 घंटे तक चर्चा हुई थी। हमने अपनी बात रखी थी। मैंने इससे जुड़ा पूरा इतिहास बताया था, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को नहीं थी।
मैंने सांसदों को उस संदर्भ के बारे में बताया था, जिसमें वंदे मातरम् को लेकर फैसला लिया गया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज इंदिरा भवन में इसका पूर्ण संस्करण गाया गया। इसे लेकर किसी विवाद का कोई सवाल ही नहीं है।’’ भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने इनकार किया कि गीत के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, सोनिया जी उनके लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं।’’ भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के लिए ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का प्रयास किया।
भंडारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस ‘दिमागी नक्सल सोच’ से ग्रस्त है।’’ भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लालकिले पर आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने पर भी आलोचना करते हुए कहा कि यह भारत के संविधान और ‘‘देशभक्ति से जुड़ी हर चीज के प्रति उनकी गहरी नफरत’’ को दर्शाता है। भाजपा प्रवक्ता ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘इसीलिए कांग्रेस वंदे मातरम् का विरोध करती है। देश के लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नहीं रह गई है।
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आज कांग्रेस ‘दिमागी नक्सल कांग्रेस’ बन गई है।’’ सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता आर पी सिंह ने कहा, ‘‘एंटोनियो माइनो जी वंदे मातरम् से इतनी नफरत क्यों करती हैं? जब वंदे मातरम् गाया जा रहा था, तो कथित तौर पर एंटोनियो माइनो जी इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने कथित रूप से आपत्ति जताई और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने को कहा। वंदे मातरम् के प्रति इतनी नफरत क्यों?’’ पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया, जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाया गया है।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को 30 जुलाई को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया था। इससे एक दिन पहले इसे राज्यसभा की मंजूरी मिली थी। इस कानून में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा दिया गया है।
Vrindavan में Hariyali Teej पर स्वर्ण हिंडोले में विराजे बांके बिहारी, उमड़ी भारी भीड़
हरियाली तीज के अवसर पर शनिवार को वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री बांके बिहारी जी महाराज स्वर्ण हिंडोले पर विराजकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देते हैं। श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि स्वर्ण हिंडोले की यह परंपरा देश की आजादी के समय से चली आ रही है।
वर्तमान स्थान पर इस हिंडोले को स्थापित हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं। इतिहासकार प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, 1920 के दशक में मंदिर के खजाने में हुई लूट के बाद बचे सोने से हिंडोला तैयार कराने का निर्णय लिया गया था। वाराणसी के दो स्वर्णकारों ने वृंदावन में एक लाख तोला चांदी और 10 हजार तोला सोने से इस हिंडोले का निर्माण किया था।
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इसे बनवाने की जिम्मेदारी भक्त हरगू लाल जी ने ली थी और उन्होंने अपनी ओर से भी सोना उपलब्ध कराया था। उन्होंने बताया कि इस बार होली के रंगों से हिंडोले के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत कराई गई है। हरियाली तीज के अवसर पर पूरे मंदिर को हरे रंग से सजाया जाता है और ठाकुर जी को भी हरे वस्त्र धारण कराए जाते हैं।
हिंडोले के दोनों ओर दो-दो गोपियां चंवर और पान का प्रसाद लेकर खड़ी रहती हैं। हिंडोले के पीछे सेज-सज्जा की जाती है, जिसमें शीशा और सोलह श्रृंगार की सामग्री रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हिंडोले पर झूलने से राधा रानी का श्रृंगार बिगड़ जाता है, इसलिए उनके लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है।
ज्योतिषाचार्य केशव आचार्य ने बताया कि हरियाली तीज बदलते मौसम के लिए भगवान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूर्ण हुई थी और उन्होंने केवल बेलपत्र का सेवन किया था। इस अवसर पर अधिकांश मंदिरों में प्रसाद के रूप में घेवर और फेनी अर्पित की जाती है।
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श्री राधा-रमण मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के सप्त देवालयों में झूलन उत्सव 15 दिनों तक मनाया जाता है, जिसका समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। शुरुआती तीन दिनों तक शाम के समय ठाकुर जी सोने और चांदी के झूले में दर्शन देंगे। इसके बाद अलग-अलग प्रकार के झूले सजाए जाएंगे।
मदन मोहन मंदिर के सेवायत विजय किशोर गोस्वामी ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज का आयोजन एक दिन का होता है, जबकि सप्त देवालयों में 15 दिनों तक सोने-चांदी के झूले सजाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों की रचनाओं और ‘हरि भक्ति विलास’ में भी सावन में झूलन लीला का वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं।
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र को चार सुपर जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष योजना बनाई गई है।
उत्सव के दिन वृंदावन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
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