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Vrindavan में Hariyali Teej पर स्वर्ण हिंडोले में विराजे बांके बिहारी, उमड़ी भारी भीड़

हरियाली तीज के अवसर पर शनिवार को वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री बांके बिहारी जी महाराज स्वर्ण हिंडोले पर विराजकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देते हैं। श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि स्वर्ण हिंडोले की यह परंपरा देश की आजादी के समय से चली आ रही है।

वर्तमान स्थान पर इस हिंडोले को स्थापित हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं। इतिहासकार प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, 1920 के दशक में मंदिर के खजाने में हुई लूट के बाद बचे सोने से हिंडोला तैयार कराने का निर्णय लिया गया था। वाराणसी के दो स्वर्णकारों ने वृंदावन में एक लाख तोला चांदी और 10 हजार तोला सोने से इस हिंडोले का निर्माण किया था।

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इसे बनवाने की जिम्मेदारी भक्त हरगू लाल जी ने ली थी और उन्होंने अपनी ओर से भी सोना उपलब्ध कराया था। उन्होंने बताया कि इस बार होली के रंगों से हिंडोले के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत कराई गई है। हरियाली तीज के अवसर पर पूरे मंदिर को हरे रंग से सजाया जाता है और ठाकुर जी को भी हरे वस्त्र धारण कराए जाते हैं।

हिंडोले के दोनों ओर दो-दो गोपियां चंवर और पान का प्रसाद लेकर खड़ी रहती हैं। हिंडोले के पीछे सेज-सज्जा की जाती है, जिसमें शीशा और सोलह श्रृंगार की सामग्री रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हिंडोले पर झूलने से राधा रानी का श्रृंगार बिगड़ जाता है, इसलिए उनके लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है।

ज्योतिषाचार्य केशव आचार्य ने बताया कि हरियाली तीज बदलते मौसम के लिए भगवान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूर्ण हुई थी और उन्होंने केवल बेलपत्र का सेवन किया था। इस अवसर पर अधिकांश मंदिरों में प्रसाद के रूप में घेवर और फेनी अर्पित की जाती है।

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श्री राधा-रमण मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के सप्त देवालयों में झूलन उत्सव 15 दिनों तक मनाया जाता है, जिसका समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। शुरुआती तीन दिनों तक शाम के समय ठाकुर जी सोने और चांदी के झूले में दर्शन देंगे। इसके बाद अलग-अलग प्रकार के झूले सजाए जाएंगे।

मदन मोहन मंदिर के सेवायत विजय किशोर गोस्वामी ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज का आयोजन एक दिन का होता है, जबकि सप्त देवालयों में 15 दिनों तक सोने-चांदी के झूले सजाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों की रचनाओं और ‘हरि भक्ति विलास’ में भी सावन में झूलन लीला का वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं।

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि पूरे क्षेत्र को चार सुपर जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष योजना बनाई गई है।

उत्सव के दिन वृंदावन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

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Ayodhya के Ram Mandir में पुजारियों का नया परिधान लागू, रेशमी धोती और तिलक अनिवार्य

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में शनिवार से पुजारियों के लिए नया परिधान लागू कर दिया गया। अब मंदिर के सभी पुजारी एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। मंदिर के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मंदिर न्यास की धार्मिक समिति की सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि यह परिधान रामानंदी परंपरा के अनुरूप निर्धारित किया गया है। इसके तहत पुजारी हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उसी रंग का रेशमी उत्तरीय धारण करेंगे। उन्होंने बताया कि हल्का पीला रंग भगवान राम को प्रिय माना जाता है, इसलिए इस रंग को परिधान के लिए चुना गया है।

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नए नियमों के तहत पुजारियों के लिए साज-सज्जा से जुड़े मानक भी तय किए गए हैं। पुजारी या तो ‘पंचकेश’ परंपरा का पालन करेंगे या पूरी तरह से मुंडित रहेंगे। आंशिक रूप से बढ़े हुए बाल या दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं होगी।

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इसके साथ ही रामानंदी परंपरा के तिलक को धारण करना भी अनिवार्य किया गया है। धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने बताया कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता को ध्यान में रखते हुए रेशमी परिधान का चयन किया गया है। समिति ने कहा कि एक समान वेशभूषा से भगवान रामलला की पूजा-अर्चना और सेवा व्यवस्था में अनुशासन, एकरूपता और धार्मिक गरिमा बढ़ेगी।

मंदिर में यह नया परिधान नियम 15 अगस्त से प्रभावी हो गया है।

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  Sports

बांग्लादेश से हार के साथ पैट कमिंस की कप्तानी पर लगा दाग, दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड

बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस के करियर पर एक ऐसा दाग लग गया है, जिसे हटा पाना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा. कमिंस ऑस्ट्रेलिया के सिर्फ दूसरे ऐसे कप्तान बने हैं, जिन्हें दो एशियाई देशों ने उनके घर में हराया है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर ग्रेग चैपल का नाम आता है. Mon, 17 Aug 2026 20:33:55 +0530

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