Myanmar Earthquake Tremors: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में फिर डोली धरती; 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके, नुकसान की खबर नहीं
रविवार सुबह भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। झटकों के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल रहा, लेकिन तीव्रता कम होने के कारण किसी इमारत या बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा है।
म्यांमार भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, जहां हाल के दिनों में लगातार कई हल्के झटके दर्ज किए गए हैं।
इंडोनेशिया में कुछ ही घंटों के भीतर आए 3 शक्तिशाली भूकंप
म्यांमार में जहां हल्के झटके आए, वहीं इंडोनेशिया में भूकंपीय आपदा ने विकराल रूप ले लिया है। शनिवार को इंडोनेशिया में कुछ ही घंटों के अंतराल पर तीन बड़े भूकंप दर्ज किए गए।
इनमें सुबह 7.7 तीव्रता का महाविनाशकारी भूकंप आया, जिसके बाद दोपहर में 6.5 तीव्रता और शनिवार रात भारतीय समयानुसार 9 बजकर 55 मिनट पर गल्फ ऑफ टॉमिनी में 6.0 तीव्रता का तीसरा झटका महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, रात के भूकंप का केंद्र जमीन से 68 किलोमीटर की गहराई में था।
7.7 तीव्रता के भूकंप में 38 लोगों की मौत और भारी तबाही
इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के फ्लोरेस क्षेत्र में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। देश की सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
13 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। भूकंप के चलते रिओक गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह भीषण भूस्खलन हुआ, जिससे मुख्य सड़कें ब्लॉक हो गईं और राहत-बचाव दलों को पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
करीब 2000 लोग बेघर, अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर
भूकंप के कारण सैकड़ों आवासीय मकान और सार्वजनिक इमारतें धराशायी हो गई हैं। सुरक्षा के मद्देनजर नगेकेओ और आसपास के प्रभावित जिलों से करीब 2,000 लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और आपातकालीन राहत शिविरों में चले गए हैं।
बिजली आपूर्ति ठप होने और संचार नेटवर्क बाधित होने के कारण आपदा प्रभावित द्वीपों में राहत कार्य के लिए हेलीकॉप्टर और बचाव नौकाएं तैनात की गई हैं।
प्रशांत 'रिंग ऑफ फायर' में बढ़ी भूगर्भीय सक्रियता
विशेषज्ञों के अनुसार, म्यांमार और इंडोनेशिया का पूरा क्षेत्र प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' और जटिल टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है।
इंडोनेशिया में फ्लोरेस क्षेत्र के 68 किमी उत्तर-उत्तर-पश्चिम में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया है। स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिक एजेंसियां निरंतर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
JPSC-JSSC Protest: जेपीएससी-जेएसएससी धांधली पर छात्रों का अल्टीमेटम; 20 अगस्त को सीएम हेमंत सोरेन के आवास का होगा घेराव
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची में चल रहा छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। शांतिपूर्ण सत्याग्रह और विधानसभा घेराव के बाद भी सरकार द्वारा मांगों पर ठोस कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित छात्रों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक विवादित परीक्षाएं रद्द कर पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
16 अगस्त को 24 जिलों में पुतला दहन, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
आंदोलनकारी छात्र मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि 16 अगस्त को राज्य के सभी 24 जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका जाएगा। राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित होकर विरोध जताएंगे। इसके साथ ही मंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी पुतला दहन करने की घोषणा की है।
छात्र नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी एक तरफ छात्रों के समर्थन की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी राज्य सरकार में साझीदार है। यदि वे सच में छात्रों के साथ हैं, तो उन्हें सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए, अन्यथा छात्रों को भ्रमित करना बंद करें।
परीक्षाएं रद्द हों, सीबीआई जांच हो या सीएम इस्तीफा दें
छात्र मंच ने पहली बार सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग उठाई है। अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि JPSC 11वीं से 13वीं और JSSC CGL परीक्षाओं को तुरंत रद्द किया जाए और पेपर लीक व धांधली के संगठित सिंडिकेट की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।
छात्र नेताओं ने कहा कि यदि सरकार छात्रों के सवालों की जवाबदेही तय करने और पारदर्शी व्यवस्था बनाने में असमर्थ है, तो मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
'अब गांधीवादी रास्ता छोड़कर भगत सिंह और सुभाष बोस की राह चुनेंगे'
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि उन्होंने पिछले कई हफ्तों से गांधीवादी और लोकतांत्रिक तरीके से अनशन, धरने और तिरंगा यात्रा के जरिए अपनी आवाज उठाई, लेकिन सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। अब छात्रों को अपने हक के लिए आक्रामक संघर्ष का रास्ता चुनने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
20 अगस्त को राज्य के सभी जिलों और गांवों से हजारों की संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री आवास का पूर्ण घेराव करेंगे।
सीएम आवास छावनी में तब्दील, कांके रोड पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग
छात्रों के घेराव और आंदोलन के उग्र रुख को देखते हुए रांची जिला प्रशासन और पुलिस मुख्यालय अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री आवास और उसके आसपास के पूरे कांके रोड क्षेत्र को भारी सुरक्षा घेरे में लेकर किले में तब्दील कर दिया गया है।
संवेदनशील रास्तों पर तीन लेयर की बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए गए हैं तथा 100 से अधिक अतिरिक्त सुरक्षा बलों और खुफिया जवानों की तैनाती की गई है। मोरहाबादी और कचहरी चौक से आने वाले वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है, जिसके कारण शहर के मुख्य चौराहों पर लंबा जाम लग रहा है।
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