'संजय लीला भंसाली' की Luv And War के सेट पर हुई मौत, अब मचा हड़कंप
LOVE AND WAR Film: बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर 'संजय लीला भंसाली' की फिल्म 'लव एंड वॉर' (LOVE AND WAR) इस समय शूटिंग चल रही है. वहीं हाल ही में फिल्म के सेट से एक दुखद खबर आई थी कि फिल्म क सेट पर काम कर रहे एक टेक्नीशियन की दुर्घटना में मौत हो गई है. इस घटना के बाद यूनियन और इंडस्ट्री ऑर्गेनाइजेशन ने सेट पर सिक्योरिटी अरेंजमेंट को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए थे.
जानकारी के मुताबिक, फिल्म बनने के दौरान हुई दुर्घटना में एक तकनीकी कर्मचारी की जान चली गई, जिससे वहां मौजूद लोग सदमे में हैं. घटना के बाद फिल्म की टीम और इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने दुख साझा किया था. साथ ही डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने भी पीड़ित परिवार के प्रति दुख जताते हुए पैसों की मदद करने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वो 40 लाख तक उनके परिवार के लिए देंगे जिससे उनकी कुछ फाइनेंसियल हेल्प हो सके. इसी बीच अब कारपेंटर की मौत के बाद AICWA ने भंसाली प्रोडक्शंस के खिलाफ FIR दर्ज करने और मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है. इस घटना के बाद फिल्म सेट्स पर वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है.
Explainer: अयोध्या की मस्जिद का कैसे पड़ा था 'बाबरी नाम'? जानें गुप्त वंश से लेकर औरंगजेब तक राम मंदिर का इतिहास
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. इसकी वजह है- राम मंदिर के चढ़ावा में हुई चोरी. प्रशासन ने चोरी के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. दो दिन पहले एसआईटी ने अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. जल्द ही मामले में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. एसआईटी के सदस्य विजय विश्वास पंत का कहना है कि हमने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट की डिटेल्स पूरी तरह से गोपनीय हैं. रिपोर्ट के बारे में हम अभी कुछ भी नहीं कह सकते हैं.
VIDEO | Ayodhya Ram Temple donation probe: SIT set to submit report to UP Government. Three-member panel meets Additional Chief Secretary.#RamTemple #AyodhyRamMandir
— Press Trust of India (@PTI_News) June 23, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/d3fcnp66ZD
‘इतिहास- राम मंदिर पार्ट-2’ आइये जानते हैं कि आखिर अयोध्या में बनी मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद कैसे पड़ गया? आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे गुप्त वंश से लेकर औरंगजेब के शासन काल तक में राम मंदिर का इतिहास….
गुप्त वंश के शासन के बाद लंबे वक्त तक अयोध्या राजाओं की खींचतान में ही फंसा रहा. साल 1192 में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली के तख्त पर कब्जा कर लिया. उसी वक्त अयोध्या पर भी उसका नियंत्रण हो गया. 1192 में ही अयोध्या में मंदिरों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी, हालांकि, उस वक्त के जो दस्तावेज मिले हैं, उसके अनुसार मंदिर का निर्माण हुआ था. इलाहाबाद जिले में गढ़वा और मेवहड़ में शिलालेख मिले हैं, जिसके अनुसार साल 1999 में ठाकुर कुंदपाल श्रीवास्तव ने गढ़वा में नवग्रह मंदिर बनवाया और 1245 में एक अलग ठाकुर श्रीवास्तव ने सिद्धेश्वर बनवाया.
साल 1932 में छपी किताब अयोध्या: ए हिस्ट्री में लेखक लाला सीताराम कहते हैं कि1528 में जाने-माने फकीर फजल कलंदर के कहने पर बाबर ने अपने सिपहसालार मीर बाकी को हुक्म दिया था कि राम जन्मस्थान मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाएं. मीर बांकी ने 17 दिनों तक हिंदुओं से लड़ने के बाद मंदिर में प्रवेश करने में सफल हुआ. लेकिन वहां से मूर्तियां अदृश्य हो चुकी थीं. मीर बाकी ने बाबर के आदेश पर मंदिर की ही सामाग्री से मस्जिद बनवाई. ये बात मस्जिद की दीवार पर खुदी थी.
ऐसे पड़ा बाबरी मस्जिद का नाम
1784 में फ्रांसिस बुकानन-ईस्ट इंडिया में बतौर मेडिकल ऑफिसर भारत आया था. 1813-14 में उसने अयोध्या का भी सर्वे किया था. अपनी रिपोर्ट में उसने मस्जिद का जिक्र किया है. उसने लिखा है- 'हिंदुओं का मानना है कि मंदिर को औरंगजेब ने तुड़वाया था। यहां की मस्जिद बहुत मॉडर्न है और उसपर लिखा है कि इसे बाबर ने बनवाया था.' इस विरोधाभासी रिपोर्ट की वजह से मस्जिद को बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा.
किसी दस्तावेज में नहीं है बाबरी मस्जिद का जिक्र
कुणाल किशोर अपनी किताब 'अयोध्या रीविजिटेड' में कहते हैं कि बाबर के अयोध्या में मस्जिद बनवाने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है. 'बाबरनामा' से लेकर अगले 240 साल तक के किसी भी ऐतिहासिक दस्तावेज में जन्मभूमि मंदिर को तोड़ मस्जिद बनाने का कोई जिक्र नहीं मिलता है. कुणाल किशोर तर्क देते हैं कि 'बाबरनामा' के मुताबिक 20 जून, 1529 को बाबर ने मीर बाकी और उसकी सेना को छुट्टी दे दी थी. ऐसे में मीर बाकी के मस्जिद बनवाने का सवाल ही नहीं उठता.
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मंदिर टूटने का पहला जिक्र एक यात्रा वृतांत में...
मंदिर के टूटने का पहला जिक्र बुकानन की रिपोर्ट से 47 साल पहले 1767 में ऑस्ट्रिया मूल के पादरी टेफेन्थैलर ने किया था. टेफेन्थैलर ने भारत में 22 प्रांतों का दौरा किया और वृतांत लिखा जिसमें अयोध्या भी शामिल है. अयोध्या और फैजाबाद में 6 साल बिताने के बाद उसने जो वृतांत लिखा है उसमें मंदिर के टूटने और औरंगजेब द्वारा मस्जिद बनवाने का जिक्र है. अयोध्या में मंदिर को तोड़कर मस्जिद जरूर बनाई गई, लेकिन ये किस समय हुआ और किसके आदेश पर हुआ... इस पर इतिहास कोई एक मत कायम नहीं कर पाता है.
अयोध्या का पहला आर्कियोलॉजिकल सर्वे
पहली बार अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1862-63 में अयोध्या का आर्कियोलॉजिकल सर्वे किया था. ये सर्वेक्षण बौद्ध स्मारकों का पता लगाने के लिए किया गया था. ये अयोध्या को लेकर इतिहास का पहला दस्तावेज माना जाता है. इस सर्वे, के दौरान कनिंघम को 'धनन' और 'विशाख' लेख वाले सिक्के मिले थे. बौद्ध साहित्य के मुताबिक भगवान बुद्ध के काल में अयोध्या को विशाखा कहा जाता था. ये सिक्के इतना तो बताते हैं कि भगवान बुद्ध के समय में अयोध्या एक सम्पन्न शहर था, लेकिन इससे पहले के इतिहास का कोई जिक्र नहीं मिलता है.
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सबसे बड़े ट्रेड रूट्स के बीच में बसी थी अयोध्या
ब्रिटिश इतिहासकार जॉन की अपनी किताब में दो रास्तों का जिक्र करते हैं- उत्तर पथ और दक्षिण पथ. उत्तर पथ गांधार से शुरू होकर मथुरा से होते हुए आज के बांग्लादेश में ताम्रलिपती तक फैला हुआ था. वहीं दक्षिण पथ श्रावस्ती से शुरू होकर चित्रकूट से होते हुए प्रतिष्ठान तक जाता था. ये दोनों रूट माइग्रेशन और ट्रेड के सबसे बड़े रास्ते थे. ये दोनों रास्ते एक-दूसरे को जहां पर काटते हैं, वहीं अयोध्या बसी थी.




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