Explainer: अयोध्या की मस्जिद का कैसे पड़ा था 'बाबरी नाम'? जानें गुप्त वंश से लेकर औरंगजेब तक राम मंदिर का इतिहास
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. इसकी वजह है- राम मंदिर के चढ़ावा में हुई चोरी. प्रशासन ने चोरी के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. दो दिन पहले एसआईटी ने अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. जल्द ही मामले में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. एसआईटी के सदस्य विजय विश्वास पंत का कहना है कि हमने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट की डिटेल्स पूरी तरह से गोपनीय हैं. रिपोर्ट के बारे में हम अभी कुछ भी नहीं कह सकते हैं.
VIDEO | Ayodhya Ram Temple donation probe: SIT set to submit report to UP Government. Three-member panel meets Additional Chief Secretary.#RamTemple #AyodhyRamMandir
— Press Trust of India (@PTI_News) June 23, 2026
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‘इतिहास- राम मंदिर पार्ट-2’ आइये जानते हैं कि आखिर अयोध्या में बनी मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद कैसे पड़ गया? आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे गुप्त वंश से लेकर औरंगजेब के शासन काल तक में राम मंदिर का इतिहास….
गुप्त वंश के शासन के बाद लंबे वक्त तक अयोध्या राजाओं की खींचतान में ही फंसा रहा. साल 1192 में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर दिल्ली के तख्त पर कब्जा कर लिया. उसी वक्त अयोध्या पर भी उसका नियंत्रण हो गया. 1192 में ही अयोध्या में मंदिरों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी, हालांकि, उस वक्त के जो दस्तावेज मिले हैं, उसके अनुसार मंदिर का निर्माण हुआ था. इलाहाबाद जिले में गढ़वा और मेवहड़ में शिलालेख मिले हैं, जिसके अनुसार साल 1999 में ठाकुर कुंदपाल श्रीवास्तव ने गढ़वा में नवग्रह मंदिर बनवाया और 1245 में एक अलग ठाकुर श्रीवास्तव ने सिद्धेश्वर बनवाया.
साल 1932 में छपी किताब अयोध्या: ए हिस्ट्री में लेखक लाला सीताराम कहते हैं कि1528 में जाने-माने फकीर फजल कलंदर के कहने पर बाबर ने अपने सिपहसालार मीर बाकी को हुक्म दिया था कि राम जन्मस्थान मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाएं. मीर बांकी ने 17 दिनों तक हिंदुओं से लड़ने के बाद मंदिर में प्रवेश करने में सफल हुआ. लेकिन वहां से मूर्तियां अदृश्य हो चुकी थीं. मीर बाकी ने बाबर के आदेश पर मंदिर की ही सामाग्री से मस्जिद बनवाई. ये बात मस्जिद की दीवार पर खुदी थी.
ऐसे पड़ा बाबरी मस्जिद का नाम
1784 में फ्रांसिस बुकानन-ईस्ट इंडिया में बतौर मेडिकल ऑफिसर भारत आया था. 1813-14 में उसने अयोध्या का भी सर्वे किया था. अपनी रिपोर्ट में उसने मस्जिद का जिक्र किया है. उसने लिखा है- 'हिंदुओं का मानना है कि मंदिर को औरंगजेब ने तुड़वाया था। यहां की मस्जिद बहुत मॉडर्न है और उसपर लिखा है कि इसे बाबर ने बनवाया था.' इस विरोधाभासी रिपोर्ट की वजह से मस्जिद को बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा.
किसी दस्तावेज में नहीं है बाबरी मस्जिद का जिक्र
कुणाल किशोर अपनी किताब 'अयोध्या रीविजिटेड' में कहते हैं कि बाबर के अयोध्या में मस्जिद बनवाने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है. 'बाबरनामा' से लेकर अगले 240 साल तक के किसी भी ऐतिहासिक दस्तावेज में जन्मभूमि मंदिर को तोड़ मस्जिद बनाने का कोई जिक्र नहीं मिलता है. कुणाल किशोर तर्क देते हैं कि 'बाबरनामा' के मुताबिक 20 जून, 1529 को बाबर ने मीर बाकी और उसकी सेना को छुट्टी दे दी थी. ऐसे में मीर बाकी के मस्जिद बनवाने का सवाल ही नहीं उठता.
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मंदिर टूटने का पहला जिक्र एक यात्रा वृतांत में...
मंदिर के टूटने का पहला जिक्र बुकानन की रिपोर्ट से 47 साल पहले 1767 में ऑस्ट्रिया मूल के पादरी टेफेन्थैलर ने किया था. टेफेन्थैलर ने भारत में 22 प्रांतों का दौरा किया और वृतांत लिखा जिसमें अयोध्या भी शामिल है. अयोध्या और फैजाबाद में 6 साल बिताने के बाद उसने जो वृतांत लिखा है उसमें मंदिर के टूटने और औरंगजेब द्वारा मस्जिद बनवाने का जिक्र है. अयोध्या में मंदिर को तोड़कर मस्जिद जरूर बनाई गई, लेकिन ये किस समय हुआ और किसके आदेश पर हुआ... इस पर इतिहास कोई एक मत कायम नहीं कर पाता है.
अयोध्या का पहला आर्कियोलॉजिकल सर्वे
पहली बार अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1862-63 में अयोध्या का आर्कियोलॉजिकल सर्वे किया था. ये सर्वेक्षण बौद्ध स्मारकों का पता लगाने के लिए किया गया था. ये अयोध्या को लेकर इतिहास का पहला दस्तावेज माना जाता है. इस सर्वे, के दौरान कनिंघम को 'धनन' और 'विशाख' लेख वाले सिक्के मिले थे. बौद्ध साहित्य के मुताबिक भगवान बुद्ध के काल में अयोध्या को विशाखा कहा जाता था. ये सिक्के इतना तो बताते हैं कि भगवान बुद्ध के समय में अयोध्या एक सम्पन्न शहर था, लेकिन इससे पहले के इतिहास का कोई जिक्र नहीं मिलता है.
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सबसे बड़े ट्रेड रूट्स के बीच में बसी थी अयोध्या
ब्रिटिश इतिहासकार जॉन की अपनी किताब में दो रास्तों का जिक्र करते हैं- उत्तर पथ और दक्षिण पथ. उत्तर पथ गांधार से शुरू होकर मथुरा से होते हुए आज के बांग्लादेश में ताम्रलिपती तक फैला हुआ था. वहीं दक्षिण पथ श्रावस्ती से शुरू होकर चित्रकूट से होते हुए प्रतिष्ठान तक जाता था. ये दोनों रूट माइग्रेशन और ट्रेड के सबसे बड़े रास्ते थे. ये दोनों रास्ते एक-दूसरे को जहां पर काटते हैं, वहीं अयोध्या बसी थी.
'अक्षर पटेल बहुत एवरेज कप्तान हैं...' अश्विन ने दिल्ली कैपिटल्स पर उठाए सवाल, कुलदीप यादव के जाने पर बोली बड़ी बात
IPL 2027 : इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिन ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने दिल्ली कैपिटल्स की को लेकर बड़ा बयान दिया है. अश्विन ने आईपीएल 2026 में अक्षर पटेल के प्रदर्शन के बारे में भी बात की है. उन्होंने केएल राहुल को अगला कप्तान बनाने की बात पर भी जोर दिया है. इसके साथ ही अश्विन ने कुलदीप यादव को चल जाने देन पर भी दिल्ली कैपिटल्स पर सवाल खड़े किए हैं. अश्निन ने क्या कहा है, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
आपको बता दें कि, दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ आईपीएल 2027 से पहले बड़ा ट्रेड सफलतापूर्वक किया है. उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स को अपने स्टार स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव को दे दिया है. उनकी जगह पर दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स से ऋषभ पंत को लिया है. इस ट्रेड के होने के बाद रविचंद्रन अश्विन ने दिल्ली कैपिटल्स के बारे में खुलकर बात की है.
अश्विन ने दिल्ली कैपिटल्स पर दिया बड़ा बायन
रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि, 'दिल्ली कैपिटल्स का 2026 का सीजन बहुत ही साधारण था, जहां उन्होंने लगातार गलतियां की हैं. इसके बाद फिर भी वो एक अच्छी जगह पर पहुंचे थे. उन्हें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं थी. अगर आपने सही टीम चुनी होती और केएल राहुल को कप्तान बनाया होता तो टीम अगले साल अच्छी स्थिति में होती क्योंकि इस साल अक्षर पटेल कप्तान के तौर पर बहुत औसत थे. मुझे सच में समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने कुलदीप यादव को क्यों जाने दिया है.
Ravi Ashwin said : “DC had a very ordinary 2026 season, where they made mistakes after mistakes. Yet, they still ended up in a decent place. There was no need for them to make any change. If you just picked the proper side and have KL Rahul captain, the side would have been in a… pic.twitter.com/YPJgaLgxCA
— Vipin Tiwari (@Vipintiwari952) June 25, 2026
आपको बता दें कि, दिल्ली कैपिटल्स ने ऋषभ पंत के बाद अक्षर पटेल को दिल्ली कैपिटल्स का कप्तान बनाया था. उनकी कप्तानी में टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था. अब उम्मीद की जा रही है कि, आईपीएल 2027 में अक्षर पटेल भी टीम की कप्तानी करते हुए नजर नहीं आएंगे. दिल्ली कैपिटल्स ऋषभ पंत और अक्षर पटेल के अलावा केएल राहुल को अपना कप्तान बना सकती है. जबकि पंत और अक्षर दोनों टीम में बतौर खिलाड़ी नजर आएंगे.
केएल राहुल बन सकते हैं दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान
आईपीएल 2027 के लिए दिल्ली कैपिटल्स केएल राहुल को अपना कप्तान बना सकती है. वहीं ऋषभ पंत टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर खेलेंगे और अक्षर पटेल बतौर स्पिन ऑलराउंडर आईपीएल 2026 में नजर आ सकते हैं. केएल राहुल ने दिल्ली कैपिटल्स से पहले पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए इंडियन प्रीमियर लीग में कप्तानी की है.
केएल राहुल की आईपीएल में कप्तानी के रिकॉर्ड
केएल राहुल ने आईपीएल में कुल 64 मैचों में कप्तानी की है. उन्होंने इस दौरान 32 मैचों जीत हैं, जबकि उनको 30 मैचों में हार मिली है. उनकी कप्तानी में 2 मुकाबले बेनतीजा भी रहे हैं. उनका बतौर कप्तान जीत प्रतिशत 50/% रहा है. केएल राहुल ने पंजाब किंग्स के लिए 27 मुकाबलों में कप्तानी की और 12 मैच जीते है, जबकि 13 मैचों में उन्हें हार मिली है. वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए राहुल ने 37 मैचों में कप्तानी की है. इस दौरान उन्होंने 20 मैच जीते है, जबकि उन्हें 30 मैचों में हार मिली है.
कुलदीप यादव की दिल्ली कैपिटल्स को खलेगी कमी
कुलदीप यादव की दिल्ली कैपिटल्स को आईपीएल 2027 में कमी खलने वाली है. दिल्ली के पास कुलदीप बतौर स्पिनर मौजूद थे. कुलदीप यादव दुनिया के किसी भी बल्लेबाज को अपनी फिरकी में फंसाने की काबिलियत रखते हैं. उन्होंने अब तक आईपीएल में 110 मैचों में 106 पारियों के अंदर 112 विकेट हासिल किए हैं. इस दौरान उनका बेस्ट प्रदर्शन 4/14 रहा है. उनका इकोनोमी आईपीएल 8.26 कहा है.
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