Nirjala Ekadashi 2026: शुक्र-शनि का दुर्लभ नवपंचम महासंयोग, इन राशियों पर होगी धन की बारिश
निर्जला एकादशी 2026 इस बार केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद खास मानी जा रही है। 25 जून को शुक्र और शनि ग्रह के बीच बनने वाला नवपंचम महासंयोग कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र सुख, वैभव, प्रेम और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन दोनों ग्रहों का विशेष योग मेहनत और भाग्य के बीच संतुलन बनाकर सफलता के नए रास्ते खोल सकता है।
तुला राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में उन्नति और नई जिम्मेदारियों का संकेत दे रहा है। वहीं वृश्चिक राशि वालों को भाग्य का साथ मिलने के साथ शिक्षा, रचनात्मक कार्यों और यात्राओं में लाभ मिल सकता है। धनु राशि के लोगों को आर्थिक मामलों और पारिवारिक निर्णयों में समझदारी से काम लेने की जरूरत होगी, जबकि मकर राशि के लिए साझेदारी, व्यापार और रिश्तों में मजबूती के संकेत हैं।
कुंभ राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में मेहनत का अच्छा फल मिल सकता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन रहे हैं। वहीं मीन राशि वालों के लिए यह समय विशेष रूप से रचनात्मकता, शिक्षा, प्रेम संबंधों और करियर में नई उपलब्धियां दिलाने वाला साबित हो सकता है। विद्यार्थियों और कला से जुड़े लोगों को इस दौरान विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस महासंयोग का पूरा लाभ पाने के लिए सकारात्मक सोच, अनुशासित जीवनशैली और नियमित पूजा-पाठ पर ध्यान देना चाहिए। निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और व्रत का पालन करने से शुभ फलों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय भविष्यवाणी को व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।
भारत का रहस्यमयी मंदिर: एक ही प्रतिमा में विराजते हैं गणेश और हनुमान, दर्शन से दूर होती हैं बाधाएं
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं और अद्भुत स्वरूपों के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक है तमिलनाडु के चेन्नई स्थित प्रसिद्ध मध्य कैलाश मंदिर, जहां भगवान गणेश और भगवान हनुमान के संयुक्त स्वरूप की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। इस अद्भुत मूर्ति को ‘आद्यंत प्रभु’ के नाम से जाना जाता है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मध्य कैलाश मंदिर दक्षिण चेन्नई के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित वह प्रतिमा है, जिसमें एक ओर भगवान गणेश और दूसरी ओर भगवान हनुमान का स्वरूप दिखाई देता है। दाहिनी तरफ गणेश जी और बाईं तरफ हनुमान जी विराजमान हैं। यह अनूठा स्वरूप भक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप की प्रेरणा मंदिर के एक अधिकारी को दिव्य दर्शन के रूप में प्राप्त हुई थी। इसके बाद इस प्रतिमा का निर्माण कराया गया। वर्ष 1994 में आद्यंत प्रभु की प्रतिमा का कुंभाभिषेक संपन्न हुआ और तभी से यह मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हो गया। प्रतिदिन यहां विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
‘आद्यंत प्रभु’ नाम का अर्थ है – जिसका न कोई आरंभ हो और न ही कोई अंत। धार्मिक दृष्टि से यह नाम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हनुमान जी को चिरंजीवी और गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए यह संयुक्त स्वरूप शक्ति, बुद्धि, साहस और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर परिसर में भगवान शिव, भगवान विष्णु, भगवान सूर्य और वेंकट आनंद विनायकर के भी मंदिर मौजूद हैं। यही कारण है कि यह स्थान केवल एक धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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