बेंगलुरु में मेट्रो बंद होने से ट्रक पर चढ़े लोग:पर्पल लाइन पर तकनीकी खराबी आई; सड़कों पर भीड़ लगी; हजारों यात्री स्टेशन पर फंसे
बेंगलुरु मेट्रो की पर्पल लाइन में मंगलवार शाम आई तकनीकी खराबी के बाद कई यात्री घर तक जाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल करते दिखे। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें यात्री मालवाहक वाहनों में बैठकर घर जाते दिखाई दे रहे हैं। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, शाम 6:30 बजे क्यूब्बन पार्क मेट्रो स्टेशन पर पर्पल लाइन की एक ट्रेन में तकनीकी खराबी आई, जिसकी वजह से पूरी पर्पल लाइन को बंद करना पड़ा। पीक आवर्स के दौरान मेट्रो बंद होने से स्टेशनों पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। इसकी वजह से हजारों यात्रियों को घर जाने के लिए दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा। पूरी रात मरम्मत के बाद बुधवार सुबह 5 बजे पर्पल लाइन को वापस शुरू किया गया। अफरा-तफरी की 4 तस्वीरें… बेंगलुरु सांसद बोले- ‘फर्स्ट वर्ल्ड टेक टैलेंट, थर्ड वर्ल्ड गवर्नेंस’ बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर लिखा कि फर्स्ट वर्ल्ड टेक टैलेंट, थर्ड वर्ल्ड गवर्नेंस। यही बेंगलुरु की कहानी है। मेट्रो सेवाओं में व्यवधान अब आम हो गए हैं। हर बार जब मेट्रो सेवा प्रभावित होती है, पूरा शहर अव्यवस्था में चला जाता है। उन्होंने आगे कहा कि कैब नहीं मिलतीं, ऑटो सवारी लेने से मना कर देते हैं और नागरिक फंस जाते हैं। कल भारत की सिलिकॉन वैली के पेशेवरों को दफ्तर से घर लौटने के लिए ट्रकों और लॉरियों का सहारा लेना पड़ा। पर्पल लाइन 25 लाख आईटी प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल्स के लिए पर्पल लाइन मेट्रो की सबसे जरूरी लाइन है। बेंगलुरु में लगभग 25 लाख आईटी प्रोफेशनल्स काम करते हैं, जो शहर की कुल आबादी का करीब 20% हैं। इस विशाल वर्कफोर्स के लिए सिल्क बोर्ड और आउटर रिंग रोड इलाकों के भारी ट्रैफिक जाम से बचने का मेट्रो सबसे भरोसेमंद साधन है। यह लाइन इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे शहर के सबसे बड़े आईटी कॉरिडोर व्हाइटफील्ड और ITPL (इंटरनेशनल टेक पार्क बेंगलुरु) को सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (एमजी रोड, मजेस्टिक, विधान सौध) से जोड़ती है। इस रूट पर पड़ने वाले प्रमुख स्टेशन्स के जरिए रोजाना लाखों टेक कर्मचारी अपने ऑफिस पहुंचते हैं। यहां टीसीएस, इन्फोसिस, आईबीएम, कॉग्निजेंट, विप्रो, और ओरैकल जैसी बड़ी कंपनियों के ऑफिस मौजूद हैं। बेंगलुरु में हर यात्री साल में 117 घंटे जाम में फंसता है 2025 के जारी ट्रैफिक पुलिस के हीटमैप के मुताबिक बेंगलुरु में हर दिन करीब 190 किमी तक लंबा जाम लगता है। 2024 के मुकाबले इस साल लोगों का वन-वे सफर 16% बढ़ गया है, यानी अब 19 किमी का रास्ता तय करने में करीब 63 मिनट लग जाते हैं। हर यात्री साल में लगभग 117 घंटे सिर्फ ट्रैफिक में फंसा रहता है। जनवरी से जून 2025 के बीच शहर की सड़कों पर 3 लाख से ज्यादा नई प्राइवेट गाड़ियां जुड़ गईं। सिर्फ जून में ही करीब 50 हजार वाहन रजिस्टर्ड हुए। ट्रांसपोर्ट विभाग के मुताबिक संख्या पूरी नहीं है, क्योंकि बाहर के जिलों और राज्यों की गाड़ियां भी रोज शहर में चलती हैं। बेंगलुरु के ट्रैफिक में फंसे एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने 21 नवंबर 2025 को बेंगलुरु के खराब ट्रैफिक पर मजाकिया लहजे में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में यात्रा करना शहर के खराब ट्रैफिक को पार करने से कहीं ज्यादा आसान है। शुभांशु कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और बीटी विभाग के 'फ्यूचराइज' थीम पर आयोजित बेंगलुरु टेक समिट में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने मराठाहल्ली से बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर तक लगभग 34 किमी का सफर तय किया। इसे तय करने में आमतौर पर एक घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। उन्हें कितना वक्त लगा, यह पता नहीं चल पाया। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… बेंगलुरु मेट्रो बनी लाइफसेवर,ऑर्गन ट्रांसपोर्ट कर मरीजों की जान बचाई:41 मिनट में दिल और 68 मिनट में फेफड़े हॉस्पिटल पहुंचाए बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल की मेडिकल टीम और मेट्रो रेल (BMRCL) ने मिलकर एक ऐसा ऑपरेशन किया, जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली मेट्रो ने गुरुवार को ट्रांसप्लांट के लिए ले जाए जा रहे इंसानी दिल (हार्ट) और फेफड़े तेजी से ट्रांसपोर्ट किए। पूरी खबर पढ़ें…
अडाणी ग्रुप का ₹1.53 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश:मॉर्गन स्टेनली ने ₹3,638 का शेयर टारगेट दिया; अडाणी ग्रुप की 34वीं AGM
अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने आज 24 जून को ग्रुप की 34वीं एनुअल जनरल मीटिंग भविष्य का रोडमैप पेश किया है। ग्रुप ने वित्त वर्ष 2026 में किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट द्वारा सबसे अधिक ₹1.53 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर किया है। चेयरमैन ने इस साल की एजीएम की थीम 'एक्सेलेरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लेवरेजिंग इंटेलिजेंस' तय की है। गौतम अडाणी बोले- 'भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता' गौतम अडाणी ने अपने संबोधन की शुरुआत पिछले साल के सफर को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि बीता साल दुनिया के लिए अधिक बिखराव वाला रहा, जहां ऊर्जा सुरक्षा के मॉडल राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में लौटे और टेक्नोलॉजी संप्रभुता से जुड़ गई। अडाणी ने कहा कि इन असाधारण जांच और चुनौतियों के बावजूद अडाणी ग्रुप इस दृढ़ विश्वास के साथ टिका रहा कि भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता। ग्रुप ने FY26 में ₹1.53 लाख करोड़ से अधिक का केपेक्स निवेश किया, जो इस साल भारत के कुल नए निजी क्षेत्र के केपेक्स का 30% से अधिक है। शेयरधारकों से मिला ₹25,000 करोड़ का राइट्स इश्यू इस बात का प्रमाण है। ग्रुप की वित्तीय स्थिति: मार्केट कैप ₹20 लाख करोड़ के करीब एजीएम में ग्रुप के वित्तीय प्रदर्शन और कर्ज के आउटलुक को लेकर महत्वपूर्ण फैक्ट्स सामने आए हैं: अडाणी के शेयर को मॉर्गन स्टेनली की 'ओवरवेट' रेटिंग मिली ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने एजीएम से ठीक पहले अडाणी एंटरप्राइजेज को 'ओवरवेट' रेटिंग दी है और ₹3,638 का टारगेट प्राइस तय किया है। मॉर्गन स्टेनली ने अडाणी एंटरप्राइजेज को भारत का प्रमुख इनक्यूबेटर बताया जो देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी ट्रांजिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा है। ब्रोकरेज के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 कंपनी के मुनाफे के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा क्योंकि कई बड़े प्रोजेक्ट्स से कमाई शुरू हो जाएगी। न्यूक्लियर, हाइड्रो और पावर में निवेश की तैयारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर: गूगल के साथ बड़ा एग्रीमेंट गौतम अडाणी ने बताया कि उनका डेटा सेंटर बिजनेस साल 2030 तक 3 गीगावॉट का प्लेटफॉर्म बनाने की राह पर है। इसके लिए ग्रुप ने विशाखापत्तनम में गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर के लिए गूगल के साथ एक समझौता किया है। इसके अलावा ग्रुप माइनिंग, सीमेंट और डिफेंस सेक्टर में विस्तार कर रहा है, जिसमें लियोनार्डो और एम्ब्रेयर जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप शामिल है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ग्रुप के ड्रोन्स और डिफेंस सिस्टम्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स का अपडेट ऑर्गेनाइजेशनल रिफॉर्म्स और सोशल वर्क गौतम अडाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को सरल बनाने, ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) पार्टनरशिप को मजबूत करने और श्रमिक कल्याण (वर्कर्स वेलफेयर) में सुधार लाने के उद्देश्य से संगठनात्मक सुधारों की रूपरेखा रखी। इसके अलावा सामाजिक कार्यों का ब्योरा देते हुए बताया कि 'अडाणी फाउंडेशन' अब 22 राज्यों के 7,000 गांवों में 1 करोड़ (10 मिलियन) लोगों तक पहुंच रहा है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश कर रहा है।
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