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'अक्षय कुमार से 1 रुपये ज्यादा फीस लूंगा', मास्टरशेफ इंडिया के लिए संजीव कपूर ने रखी थी मेकर्स के सामने ये अनोखी डिमांड

Master Cheif India: इंडिया में फूड टेलीविजन की दुनिया का जिक्र हो और मास्टरशेफ संजीव कपूर (Sanjeev Kapoor) का नाम न आए, ऐसा बहुत ही कम होता है. ‘खाना खजाना’ शो के जरिए घर-घर में पहचान बनाने वाले संजीव कपूर ने न सिर्फ लोगों को खाना बनाने के लिए इंस्पायर किया बल्कि शेफ के पेशे को भी नई पहचान दिलाई. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘मास्टरशेफ इंडिया’ जैसे शो का हिस्सा बनने से पहले वह इस शो को ठुकरा चुके हैं. इसके पीछे उनकी एक अनोखी डिमांड थी. इस बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में विस्तार से बताया है. आइए जानते हैं कि आखिर उन्होंने यह मांग क्यों की थी.

पहले सीजन के लिए रखी थी अनोखी शर्त

हाल ही में एक बातचीत के दौरान संजीव कपूर ने बताया कि जब ‘मास्टरशेफ इंडिया’ का पहला सीजन आने वाला था. तब उन्हें जज बनने के लिए अप्रोच किया गया था. उस समय शो में अक्षय कुमार भी शामिल थे. संजीव कपूर ने बताया कि उन्होंने मेकर्स के सामने साफ शर्त रखी थी कि उनकी फीस अक्षय कुमार से कम नहीं होनी चाहिए, बल्कि एक रुपये ज्यादा होनी चाहिए. उनके मुताबिक, उस दौर में इंडियन फूड टेलीविजन की दुनिया में उनका बड़ा नाम था और उन्हें लगता था कि शो के लिए वह बहुत जरूरी हैं. जब मेकर्स ने उनकी शर्त नहीं मानी तो उन्होंने बिना झिझक शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था. 

शो के लिए गेस्ट बनने से भी किया इनकार

संजीव कपूर ने बताया कि शो का पहला सीजन आने के बाद भी मेकर्स लगातार उन्हें अप्रोच करते रहे. इसके लिए उन्हें कई बार सिर्फ एक एपिसोड में गेस्ट अपीयरेंस देने के लिए कहा गया. हालांकि, उन्होंने हर बार मना कर दिया. इसपर उनका कहना है कि जब उन्होंने कोई फैसला लिया है उसे बीच में बदलना सही नहीं होगा. इसलिए उन्होंने किसी भी तरह शो का हिस्सा बनने से दूरी बनाए रखी. उस समय वह अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स और फूड इंडस्ट्री से जुड़े कामों में बिजी थे.

तीसरे सीजन में बने जज

संजीव कपूर के अनुसार, ‘मास्टरशेफ इंडिया’ के शुरुआती सीजन अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाया. जिसनी इससे मेकर्स को उम्मीद थी. जब इसका तीसरा सीजन आने वाला था. तब मेकर्स खुद उनके पास एक फिर ऑफर लेकर आए.इस बार मेकर्स उनकी हर डिमांड मानने के लिए तैयार थे. उन्होंने बताया कि मेकर्स ने उनसे कहा कि शो को उनकी जरूरत हैं और वे वहीं करेंगे जो वह कहेंगे. इसके बाद संजीव कपूर 2013 में मास्टरशेफ इंडिया 3 सीजन में जज तौर पर शामिल हुए. उनके आने के बाद इस शो की टीआरपी में काफी उछाल हुआ था.

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संजीव कपूर की डिमांड के आगे झुके मेकर्स

संजीव कपूर से जब इस इंटव्यू में पूछा गया कि क्या उन्हें तीसरे सीजन में अक्षय कुमार से ज्यादा फीस मिली थी तो इस पर शेफ ने हंसते हुए हां में जवाब दिया.  संजीव कपूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह अपने फील्ड में इतना नाम और रिस्पेक्ट भी नहीं कमा पाए कि अपनी शर्त शर्त मनवा सकें, तो फिर उसका क्या फायदा. आपको बता दें कि एक्टर अक्षय कुमार मास्टरशेफ इंडिया के पहले सीजन में ही जज के तौर पर नजर आए थे. इसकी कोई पुष्टि नहीं है कि उन्होंने यह शो क्यों छोड़ा. हालांकि, संजीव कपूर की एंट्री के बाद मास्टरशेफ इंडिया ने टीवी शो की दुनिया में अलग पहचान बनाई और इसकी टीआरपी भी ऊंचे स्टर पर पहुंच गई थी. 

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पद्म पुरस्कार से सम्मानित हुईं देश की 65 हस्तियां, लिस्ट में शिबू सोरेन से लेकर अल्का याग्निक तक का नाम; देखें पूरी सूची

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज मंगलवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में होने वाले 'सिविल इन्वेस्टिचर सेरेमनी 2' में 2026 के लिए 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किया. पुरस्कार पाने वाले 65 लोगों में पूर्व केंद्रीय मंत्री शिबू सोरेन, टेनिस स्टार विजय अमृतराज, अभिनेता ममूटी और गायिका अलका याग्निक शामिल हैं. राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री समेत कई हस्तियां शामिल हुईं.

दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किया, जिनमें दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और 56 पद्म श्री शामिल हैं. राष्ट्रपति ने 25 मई को आयोजित पहले नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए थे, जिनमें दो पद्म विभूषण, छह पद्म भूषण और 57 पद्म श्री शामिल थे.

शिबू सोरेन को मरणोपरांत मिला पद्म भूषण

पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति मुर्मू से यह सम्मान प्राप्त किया. वहीं गायिका अलका याग्निक को भी राष्ट्रपति ने पद्म पुरस्कार से सम्मानिक किया. जबकि पी. नारायणन और जस्टिस (रिटायर्ड) के.टी. थॉमस को साहित्य और शिक्षा तथा जन कार्य के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

 

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  Sports

MS Dhoni का 'कैप्टन कूल' फैसला! लगातार हार के बावजूद Stephen Fleming को CSK में मिली लाइफ लाइन

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए पिछले कुछ सीजन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि टीम प्रबंधन अभी भी अपने अनुभवी मुख्य प्रशिक्षक स्टीफन फ्लेमिंग पर पूरा भरोसा बनाए हुए है। मौजूद जानकारी के अनुसार इंडियन प्रीमियर लीग 2027 सीजन में भी फ्लेमिंग टीम के मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका में नजर आ सकते हैं, जबकि हाल के वर्षों में टीम का प्रदर्शन लगातार सवालों के घेरे में रहा है।

बता दें कि चेन्नई सुपर किंग्स इंडियन प्रीमियर लीग की सबसे सफल और लोकप्रिय टीमों में से एक रही है। महेंद्र सिंह धोनी और स्टीफन फ्लेमिंग की जोड़ी को इस सफलता का प्रमुख आधार माना जाता है। वर्ष 2009 में फ्लेमिंग के मुख्य प्रशिक्षक बनने के बाद टीम ने कई खिताब जीते और लंबे समय तक लगातार शानदार प्रदर्शन किया। यही कारण है कि फ्रेंचाइजी मुश्किल दौर में भी अपने पुराने भरोसेमंद ढांचे को बदलने के पक्ष में नहीं दिख रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टीफन फ्लेमिंग का अनुबंध हर साल नवीनीकृत किया जाता है और 2027 सत्र के लिए भी इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में खिताब जीतने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स लगातार तीन सत्रों तक प्लेऑफ में जगह बनाने में असफल रही है।

वर्ष 2025 में टीम अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर रही थी, जबकि 2026 सीजन में उसे आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा था। इन नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर टीम प्रबंधन और खासकर स्टीफन फ्लेमिंग की रणनीतियों को लेकर आलोचना तेज हो गई थी। कुछ प्रशंसकों ने उनके तौर-तरीकों को पुराने दौर का बताते हुए बदलाव की मांग भी उठाई थी। हालांकि फ्रेंचाइजी इन प्रतिक्रियाओं से प्रभावित होती नजर नहीं आ रही है।

गौरतलब है कि 2026 सत्र में चेन्नई सुपर किंग्स ने अपनी पारंपरिक रणनीति से हटकर युवा खिलाड़ियों पर बड़ा दांव लगाया था। टीम ने देशभर से उभरती प्रतिभाओं को शामिल किया, जिनमें प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा प्रमुख नाम रहे। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी क्षमता की झलक दिखाई, लेकिन टीम के प्रदर्शन में वह निरंतरता नहीं दिख सकी जिसके लिए चेन्नई सुपर किंग्स जानी जाती रही हैं।

इसके अलावा चोटों ने भी टीम की योजनाओं को प्रभावित किया। कप्तान रुतुराज गायकवाड़ की बल्लेबाजी को लेकर भी कई सवाल उठे। शीर्ष क्रम में अपेक्षित आक्रामकता की कमी, मध्यक्रम की कमजोर समाप्ति क्षमता और गेंदबाजी इकाई की अस्थिरता टीम की बड़ी परेशानियां बनकर सामने आई थीं।

महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही। पिछले सीजन में वह चोटों से जूझते रहे और कई मौकों पर टीम के साथ भी नजर नहीं आए। हालांकि टीम के भीतर उनके प्रभाव और निर्णय क्षमता को अब भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्रिकेट जानकारों का मानना है कि फ्लेमिंग को बनाए रखने के पीछे धोनी और उनके बीच वर्षों से चला आ रहा विश्वास भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

फिलहाल चेन्नई सुपर किंग्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगले सीजन में वापसी करना और अपनी पुरानी पहचान हासिल करना है। ऐसे में टीम प्रबंधन अनुभव, स्थिरता और लंबे समय से सफल रहे नेतृत्व ढांचे पर भरोसा बनाए रखने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
Tue, 23 Jun 2026 19:38:44 +0530

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