Viral: भारत-नामीबिया मैच के दौरान क्रिकेट प्रेमियों को परोसी झूठी कोल्ड ड्रिंक? वायरल Video पर DDCA का आया रिएक्शन सामने
दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में गुरुवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के तहत भारत और नामीबिया के बीच क्रिकेट मैच खेला गया, जिसमें भारत ने 93 रनों से जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही तमाम क्रिकेट प्रेमी खुशी से झूम उठे। लेकिन, एक वीडियो ने अरुण जेटली स्टेडियम में इस मैच को देखने वाले दर्शकों की नींद उड़ा दी। यह वीडियो इतनी तेजी से वायरल हुआ कि दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। तो चलिये बताते हैं पूरा मामला...
दर्शकों को परोसी गई झूठी कोल्ड ड्रिंक्स
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि यह वीडियो अरुण जेटली स्टेडियम में एक दर्शक द्वारा शूट किया गया है। इसमें एक विक्रेता कपों में बची कोल्ड ड्रिंक्स को वापस बोतल में भरता दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि यह बोतलें फिर से बेची जाएंगी। इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
यूजर्स कर रहे कड़ी कार्रवाई की मांग
सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को लेकर खासे भड़के हैं। यूजर्स का कहना है कि इतनी ज्यादा कीमत चुकाने के बाद भी यूज्ड कोल्ड ड्रिंक्स पिलाई जा रही है। भरत ने लिखा, ऐसे मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सौरभ का कहना है कि किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ज्यादा पैसे कमाने के लिए इतना गिरना ठीक नहीं। वहीं, एक यूजर ने लिखा कि शुक्र है, घर बैठकर ही मैच देखता हूं। खर्चा भी नहीं आता और किसी का झूठा भी नहीं पीना पड़ता।
— DDCA (@delhi_cricket) February 12, 2026
डीडीसीए ने दिया ये रिएक्शन
डीडीसीए ने इस वायरल वीडियो के बाद स्पष्टीकरण दिया है। डीडीसीए ने कहा कि इस वीडियो को गलत तरीके से प्रसारित किया गया है। विक्रेता ने गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए कचरा संग्रहण प्रक्रिया के तहत बचे पेय को वापस बोतल में डाला था। बाद में बोतलों को इकट्ठा कर अलग किया और कचरा प्रबंधन और पुनर्चकरण नीति के अनुसार संशाधित किया। डीडीसीए ने दोहराया कि बोतलों का निपटान स्थापित पर्यावरणीय और परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार जिम्मेदारी से किया गया है। इन बोतलों का दोबारा से बिक्री के लिए इस्तेमाल नहीं होता है।
सुबह सूर्य को जल चढ़ाना क्यों माना जाता है इतना शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व और सही विधि
Surya ko jal chadhane ka mahatva: हिंदू धर्म में सूर्य देव को साक्षात देवता माना जाता है, और यही कारण है कि हर सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि सूर्य को जल चढ़ाने से न सिर्फ आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि इससे व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का भी संचार होता है।
धार्मिक ग्रंथों में सूर्य पूजा का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य को नवग्रहों में सबसे प्रमुख माना जाता है और इन्हें आत्मा का कारक ग्रह भी कहा जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मान-सम्मान, आत्मविश्वास और सफलता में बढ़ोतरी होती है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि सूर्य देव की उपासना करने से पिता के साथ रिश्ते भी मजबूत होते हैं, क्योंकि ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक ग्रह माना जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सूर्य को जल अर्पित करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय के तुरंत बाद का माना जाता है। जल चढ़ाते समय तांबे के लोटे का इस्तेमाल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जल में लाल फूल, अक्षत या रोली मिलाकर अर्पित करने से इसका फल और भी बढ़ जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाते समय व्यक्ति को पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए और जल की धारा के बीच से सूर्य को देखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही "ॐ सूर्याय नमः" या गायत्री मंत्र का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाने के वैज्ञानिक लाभ भी हैं खास
धार्मिक महत्व के साथ-साथ सूर्य को जल चढ़ाने की इस परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि सुबह के समय सूर्य की किरणों के सामने खड़े होने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा सुबह जल्दी उठकर यह क्रिया करने से मानसिक तनाव कम होने और दिनभर ऊर्जावान बने रहने में भी मदद मिलती है, ऐसा माना जाता है।
किन बातों का रखें खास ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य को जल चढ़ाते समय स्नान करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि बिना स्नान किए की गई पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जल चढ़ाते समय लोटे से गिरने वाली जल की धार में इंद्रधनुष जैसा प्रभाव देखना शुभ संकेत माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य को जल अर्पित करना विशेष रूप से फलदायी होता है, क्योंकि यह दिन सूर्य देव को ही समर्पित माना जाता है।
आज भी करोड़ों लोग निभाते हैं यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन सूर्य को जल चढ़ाने की यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों द्वारा श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। चाहे शहर हो या गांव, आज भी सुबह के समय लोग तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए नजर आते हैं, और इसे अपने दिन की शुभ शुरुआत का हिस्सा मानते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
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