CBI ने मुंबई की फर्म के खिलाफ 62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज, कई ठिकानों पर तलाशी
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इंडियन बैंक की शिकायत के आधार पर मुंबई स्थित फर्म एम/एस वन वर्ल्ड सोर्सिंग तथा उसके भागीदारों, अज्ञात लोक सेवकों और अन्य अज्ञात निजी व्यक्तियों के खिलाफ ₹62.42 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है.
सीबीआई के अनुसार, मामला 18 जून 2026 को दर्ज किया गया. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंकों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए देनदार (Debtors) आंकड़े और अन्य भ्रामक वित्तीय जानकारियां प्रस्तुत कीं. इन कथित गलत सूचनाओं के आधार पर इंडियन बैंक और एक अन्य बैंक से अधिक नकद ऋण (Cash Credit) सुविधाएं प्राप्त की गईं, जिससे शिकायतकर्ता बैंक को लगभग ₹62.42 करोड़ का नुकसान हुआ.
मामले में नामित फर्म के भागीदार हैं:
श्रीमती आशिमा मनोज खुशलानी
श्री राकेश कुमार सिंह
मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने 20 जून 2026 को मुंबई और अन्य स्थानों पर फर्म तथा उसके भागीदारों से जुड़े कई परिसरों में तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई सीबीआई मामलों के विशेष न्यायालय, मुंबई द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर की गई.
दस्तावेज बरामद और जब्त किए
तलाशी के दौरान जांच से संबंधित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए. जब्त सामग्री की प्रारंभिक जांच से उन देनदार संस्थाओं के अस्तित्व के संकेत मिले हैं, जिनकी साख और वास्तविकता का सत्यापन किया जा रहा है. इसके अलावा, ऋण सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से देनदार आंकड़ों को कथित रूप से बढ़ाकर दिखाने से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं.
जांच आगे बढ़ा रही है
सीबीआई अब इस कथित साजिश की पूरी परतें खोलने, इसमें शामिल सभी व्यक्तियों-चाहे वे लोक सेवक हों या निजी व्यक्ति-की भूमिका की पहचान करने तथा ऋण राशि के अंतिम उपयोग का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है.
रक्षा मंत्री काट्ज का दावा, इजरायली सेना पर किसी तरह की पाबंदी नहीं, दक्षिण लेबनान में कार्रवाई की पूरी छूट
बर्गेनस्टॉक टॉक्स में ईरान लेबनान और हिज्बुल्लाह के मामले को प्रमुखता से उठा रहा है. इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने से उनकी सेना को रोका नहीं गया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काट्ज ने बयान जारी कर कहा, "दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) को अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को खत्म करने की छूट है और उन पर कोई पाबंदी नहीं है." उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ताओं की तैयारी चल रही है, जिसमें लेबनान-इजरायल संघर्ष भी प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया जा रहा है.
हिज्बुल्लाह के खिलाफ ऑपरेशन जारी
काट्ज के अनुसार, इजरायली सैनिक अभी भी एक सुरक्षा जोन में तैनात हैं, जहां वे हिज्बुल्लाह के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, "हाल ही में घोषित संघर्षविराम के बावजूद आईडीएफ उत्तरी इजरायल की बस्तियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र के सभी स्थानों पर अपनी स्थिति बनाए हुए है." रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेना इस सुरक्षा जोन से पीछे नहीं हटेगी.
संघर्ष भी एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा
यह बयान क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच आया है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है. ईरान ने संकेत दिया है कि इस वार्ता के एजेंडे में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष भी एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा.
वहीं स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा था कि उनकी प्राथमिकताओं में लेबनान में सीजफायर की दिशा में प्रगति भी शामिल है. काट्ज से पहले इजरायली वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने भी कुछ ऐसा ही कहा था. टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, स्मोट्रिच ने कहा कि जब तक हिजबुल्लाह हथियार नहीं डालता, हम एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेंगे. यही प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और मेरा भी रुख है और हम इस पर कायम रहेंगे. अमेरिका अगर वापसी की मांग भी करता है, तब भी इजरायल पीछे नहीं हटेगा.
स्रोत: आईएएनएस
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