Golden Boot : फुटबॉल का खेल काफी रोमांचक और आकर्षक होता है. फैंस इस खेल को बड़े मजे के साथ देखते है. इन दिनों दुनिया भर के फैंस फीफा वर्ल्ड कप 2026 के रंग में डूबे हुए हैं. टूर्नामेंट की शुरुआत 11 जून से हुई थी और अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको इसकी मेजबानी कर रहे हैं. अब तक फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कई स्टार खिलाड़ियों में गोल कर अपनी टीम को जीत दिलाई है. इसके साथ ही इन खिलाड़ियों ने गोल्डन बूट पर भी अपना दावा ठोक दिया है.
उससे पहले आज हम आपको बताएंगे कि, फीफा वर्ल्ड कप में मिलने वाला गोल्डन बूट किया है, ये खिलाड़ियों को क्यों दिया जाता है. इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि गोल्डन बूट किस धातू से बना होता है. तो आइए बगैर देर किए इस आर्टिकल में गोल्डन बूट के बारे में सब कुछ जानते हैं.
गोल्डन बूट क्या है?
गोल्डन बूट (Golden Boot) फुटबॉल के खेल में दिया जाने वाला अवॉर्ड है. ये गोल्डन रंग के जूते यानी बूट होते हैं. ये देखने में सोने के रंग जैसे लगते हैं. गोल्डन बूट को देखकर अक्सर लगाता है कि ये बूट सोने से बनाए गए हैं. ये जूते बिल्कुल सोने के बूट की तरह दिखाई देते हैं. इसलिए इन्हें गोल्डन बूट कहा जाता है.
Golden Boot Photograph: (afp)
क्यों दिया जाता है गोल्डन बूट?
गोल्डन बूट फुटबॉल के मैदान पर खिलाड़ियों को मिलता है. गोल्डन बूट एक व्यक्तिगत पुरस्कार है, जो सबसरे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है. ये अवॉर्ड मुख्य रूप से फीफा विश्व कप (FIFA World Cup) में दिया जाता है. ये फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है.
कब से हुई गोल्डन बूट की शुरुआत?
गोल्डन बूट की शुरुआत आधिकारिक तौर पर साल 1982 में हुई थी. फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार 1982 में गोल्डन बूट का अवॉर्ड दिया गया था. तब गोल्डन बूट का नाम अलग था. शुरुआती दौर में गोल्डन बूट को 'गोल्डन शू' (Golden Shoe) कहा जाता था. इसके बाद साल 2010 में इसका नाम बदलकर 'गोल्डन बूट' किया गया था.
कैसे चुनते हैं गोल्डन बूट का विनर?
गोल्डन विनर का विजेता चुनने के लिए आसान प्रक्रिया आपनाई जाती है. फीफा वर्ल्ड कप के संस्करण में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी को गोल्डन बूट दिया जाता है. लेकिन अगर टूर्नामेंट के अंत में एक से अधिक खिलाड़ियों के गोल बराबर होते हैं, तो गोल करने में सबसे ज्यादा 'असिस्ट' (Goal Assist/सहयोग) करने वाले खिलाड़ी को विनर चुन लिया जाता है. अगर इसके बाद भी खिलाड़ियों में टाई होता है तो कम मिनट खेलने वाले खिलाड़ी को विजेता बना दिया जाता है.
सबसे ज्यादा गोल करने वाला खिलाड़ी गोल्डन बूट जीतता है.
यदि दो या अधिक खिलाड़ियों के गोल बराबर हों, तो सबसे अधिक असिस्ट देने वाले खिलाड़ी को प्राथमिकता मिलती है.
यदि असिस्ट भी बराबर हों, तो कम मिनट खेलने वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जाता है.
Golden Boot Photograph: (afp)
किस धातु का बना होता है गोल्डन बूट?
गोल्डन बूट को देखकर अक्सर फैंस सोचते हैं कि गोल्डन बूट सोने का बना होता है. पर ऐसा नहीं है, गोल्डन बूट पूरी तरह से शुद्ध सोने (Gold) का नहीं बना होता है. गोल्डन बूट को आमतौर पर धातु (मेटल) से बनाकर तैयार किया जाता है. इसे पूरी तरह से बनाने के बाद इसके ऊपर गोल्डन कलर की सुनहरी परत (Gold Plating) चढ़ाई जाती है. इसके बाद ये सोने की तरह लगने लगाता है. इसी वजह से ये फैंस को सोने के जूते जैसा दिखाई देता है. गोल्डन बूट का डिजाइन फुटबॉल बूट के आकार का होता है. ये देखने में काफी ज्यादा आकर्षक लगता है.
गोल्डन बूट बनाने की पूरी प्रक्रिया
गोल्डन बूट बनाने की प्रक्रिया का सबसे पहला हिस्सा उनका डिजाइन तैयार करने से शुरू होता है. गोल्डन बूट बनाने के लिए सबसे पहले असली फुटबॉल बूट के आकार का 3D डिजाइन तैयार किया जाता है. इसके बाद धातु मेटल की ढलाई होती है, जिसमें पीतल या अन्य मिश्रधातु को बूट के आकार में ढाला जाता है ताकि वह मजबूत और टिकाऊ बन सके.
इसके बाद गोल्डन बूट को फिनिशिंग दी जाती है और उसके बाद गोल्डन बूट की पॉलिशिंग की जाती है. इसके बाद बूट के फीते, स्टड्स व अन्य बारीकियों को उभारा जाता है. अंत में गोल्डन बूट को गोल्डन बनाने के लिए सोने जैसी चमक देने के लिए उस पर गोल्ड-प्लेटिंग या सुनहरी कोटिंग की जाती है, जिसकी वजह से ये बूट गोल्डन बूट लगते हैं.
पिछले फीफा वर्ल्ड कप में किसने जीता था गोल्डन बूट?
फीफा वर्ल्ड कप का पिछला सीजन साल 2022 में खेला गया था, जहां पर फीफा वर्ल्ड कप 2022 का खिताब अर्जेंटीना को मिला था. इस बार फ्रांस के स्टार फुटबॉलर किलियन म्बाप्पे ने गोल्डन बूट दिया था. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कुल 8 गोल किए थे. इन 8 गोल की बदौलत उन्होंने गोल्डन बैट अपने नाम किया था.
Kylian Mbappe Photograph: (ANI)
फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में गोल्डन बूट जीतने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट
2022: काइलियन एमबाप्पे (फ्रांस) - 8 गोल
2018: हैरी केन (इंग्लैंड) - 6 गोल
2014: जेम्स रोड्रिगेज (कोलंबिया) - 6 गोल
2010: थॉमस मुलर (जर्मनी) - 5 गोल
2006: मिरोस्लाव क्लोस (जर्मनी) - 5 गोल
2002: रोनाल्डो (ब्राजील) - 8 गोल
1998: डेवर शुकर (क्रोएशिया) - 6 गोल
1994: ओलेग सालेंको (रूस), ह्रिस्टो स्टोइचकोव (बुल्गारिया) - 6 गोल (दोनों एक असिस्ट के साथ)
1990: साल्वाटोर शिलाची (इटली) - 6 गोल
1986: गैरी लिनेकर (इंग्लैंड) - 6 गोल
1982: पाओलो रॉसी (इटली) - 6 गोल
फीफा वर्ल्ड कप प्रसिद्ध गोल्डन बूट हासिल करने वाले खिलाड़ी
फीफा वर्ल्ड कप के अब तक के इतिहास में गोल्डन बूट जीतने वाले सबसे सफल खिलाड़ियों में मिरोस्लाव क्लोस, रोनाल्डो नाजारियो, हैरी केन और काइलियन एमबाप्पे शामिल हैं. इन खिलाड़ियों ने गोल्डन बूट तो अपने नाम किया लेकिन टूर्नामेंट में सबसे शानदार गोल करके चर्चाएं भी बटोरीं. इसलिए ये फीफा वर्ल्ड कप में गोल्डन बूट हासिल करने वाले सबसे सफल खिलाड़ियों में शुमार हैं.
ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज ऑलराउंडर एलिस पेरी ने क्रिकेट इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। महिला टी20 विश्व कप 2026 में नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में उतरते ही पेरी टी20 विश्व कप के इतिहास में 50 मैच खेलने वाली पहली क्रिकेटर बन गईं। खास बात यह है कि उन्होंने यह उपलब्धि मेंस और वुमेंस दोनों वर्गों को मिलाकर हासिल की।
35 साल की पेरी लंबे समय से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की पहचान रही हैं। उन्होंने 2008 में महज 17 साल की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। इसके बाद से वह लगातार ऑस्ट्रेलिया की सफलता का अहम हिस्सा बनी हुईं। अपनी प्रतिभा, निरंतरता के दम पर पेरी ने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में शामिल किया है।
ICC T20 वर्ल्ड कप में सबसे ज़्यादा मैच खेले गए (मेंस और वुमेंस मिलाकर):
पेरी का टी20 विश्व कप सफर भी बेहद शानदार रहा। वह 2009 में शुरू हुए पहले महिला टी20 विश्व कप से लेकर अब तक हर संस्करण में ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रही हैं। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया ने 6 बार खिताब जीता और इन सफलताओं में पेरी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पेरी टूर्नामेंट के इतिहास की तीसरी सबसे सफल गेंदबाज हैं। उन्होंने टी20 विश्व कप में 42 विकेट हासिल किए हैं। उनका गेंदबाजी औसत 17.16 का रहा है, जबकि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 3 विकेट पर 12 रन है। बल्लेबाजी में भी उन्होंने टीम को कई अहम मौकों पर संभाला और अब तक 559 रन बना चुकी हैं।
एलिस पेरी के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज है। वह मेंस और महिला क्रिकेट को मिलाकर टी20 इंटरनेशनल में 1000 रन और 100 विकेट का डबल पूरा करने वाली पहली खिलाड़ी हैं। यही वजह है कि उन्हें आधुनिक क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडर्स में गिना जाता।
अपने 50वें टी20 विश्व कप मैच के बारे में बात करते हुए पेरी ने कहा कि वह इस उपलब्धि पर यकीन नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा बनना हमेशा खास रहा है और हर विश्व कप का अनुभव अलग और यादगार रहा है। उनके मुताबिक, इतने लंबे समय तक टीम के लिए खेलना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
पेरी की यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि महिला क्रिकेट के विकास और उसमें उनकी असाधारण भूमिका का भी प्रतीक है। आने वाले वर्षों में इस रिकॉर्ड को तोड़ना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होगा।