Global Recognition: FATF के वाइस प्रेसिडेंट बने विवेक अग्रवाल, पाकिस्तान के टेरर फंडिंग पर होगी और कड़ी नजर
मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए वैश्विक नियम तय करने वाली पेरिस की संस्था FATF के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर भारत के सीनियर ब्यूरोक्रेट विवेक अग्रवाल को चुना गया है। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। उपाध्यक्ष का यह पद संगठन का पूरा एजेंडा तय करने, अध्यक्ष की मदद करने और दुनिया भर में सामने आने वाले वित्तीय जोखिमों से निपटने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विवेक अग्रवाल का फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के पूर्व निदेशक के तौर पर रहा पुराना अनुभव आतंकवाद के खिलाफ संगठन की इस वैश्विक लड़ाई को और धारदार बनाएगा।
???? India to assume Vice-Presidency of the Financial Action Task Force for the first time
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) June 19, 2026
???? Shri Vivek Aggarwal, Secretary, M/o Culture, is appointed vice-president of FATF for the term of July 2026- June 2027
➡️ https://t.co/9Qdd3hjOX6 pic.twitter.com/a07d7k9GFb
पाकिस्तान पर क्या होगा इसका असर और क्यों बढ़ी उसकी चिंताएं
आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग और टेरर नेटवर्क को रोकने में नाकाम रहने के कारण पाकिस्तान का इतिहास FATF के साथ हमेशा विवादों भरा रहा है। अपनी कमियों की वजह से पाकिस्तान को तीन बार FATF की 'ग्रे लिस्ट' में डाला जा चुका है, जिसमें हाल ही में वह 2018 से 2022 के बीच इस लिस्ट में शामिल था।
हालांकि, कड़े एक्शन प्लान को पूरा करने का दावा करने के बाद उसे अक्टूबर 2022 में ग्रे लिस्ट से तो हटा दिया गया था, लेकिन वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में बना हुआ है। अब इस ग्लोबल लीडरशिप में भारत का कद बढ़ने से साफ है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के फाइनेंशियल नेटवर्क पर दुनिया की कूटनीतिक नजर पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो जाएगी।
एकतरफा फैसले का अधिकार नहीं, आम सहमति से ही तय होगी आगे की कार्रवाई
FATF की लीडरशिप में भारत की भागीदारी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि नई दिल्ली पाकिस्तान को लेकर कोई भी एकतरफा फैसला कर सकती है या उसे सीधे दोबारा ग्रे लिस्ट में डाल सकती है। दरअसल, 40 सदस्यों वाले इस बड़े संगठन में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय आयोग और खाड़ी सहयोग परिषद जैसे शक्तिशाली देश व समूह शामिल हैं।
इस संस्था में कोई भी फैसला केवल तकनीकी मूल्यांकन और सभी देशों की आम सहमति के आधार पर ही लिया जाता है। इसके बावजूद, संगठन की लीडरशिप में भारत की मौजूदगी से टेरर फाइनेंसिंग और गैर-कानूनी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े मुद्दों पर भारत की आवाज और मजबूत होगी, जिससे वह पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों को लेकर दुनिया के सामने अपनी चिंताओं को और प्रभावी ढंग से रख सकेगा।
सरकार के इस 'मास्टर प्लान' की वजह से यूएस-ईरान वॉर के बीच भी नहीं हुई थी LPG की किल्लत
मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत ने अमेरिका और ईरान से एलपीजी आयात बढ़ाकर देश के आम नागरिकों को महंगाई की मार से बचाया.




Haribhoomi
NDTV











.jpg)







