Chhatisgarh News: सांप काटने से मौत के नाम पर 17.24 करोड़ का घोटाला! फर्जीवाड़ा कर सरकार से ऐंठे पैसे
Chhatisgarh News: छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले में सांप काटने से हुई मौत का फर्जीवाड़ा सामने आया है. बेलतरा के विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मुद्दे को उठाते हु खुलासा किया है कि इस घोटाले में सरकार को 17.24 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है. फिलहाल, इसकी जांच चल रही है. मामले में अब तक 14 FIR दर्ज की डा चुकी है. मगर राजस्व विभाग की इस कार्रवाई पर अभी भी विधायक सुशांत शुक्ला संतुष्ट नहीं हुए हैं. उनका कहना है कि इस कथित सर्पदंश मुआवजा मामले में और बारीकी से जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके. उन्हें कड़ी सजा मिल सके.
विधायक सुशांत ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
यह मामला तब चर्चाओं में आया जब विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने सदन में कुछ आंकड़े पेश करते हुए स्पष्ट रूप से बताया कि जशपुर जिले, जिसको नागलोक के नाम से जाना जाता है, वहां पिछले तीन सालों में सिर्फ 96 सर्पदंश मौत के मामले दर्ज हुए हैं. वहीं, अकेले बिलासपुर जिले में 431 मौतें दिखाई गई और करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया. आंकड़ों में इस बड़े अंतर ने संदेह पैदा किया और सरकार को मामले की तह तक पहुंचने के लिए मजबूर कर दिया.
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जांच में क्या मिला?
जांच में सामने आया कि कई मामलों में लोगों की सामान्य मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत बताकर मुआवजा लिया गया. दरअसल, प्रशासन के नियमों के अनुसार सांप काटने से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की राशि आर्थिक सहायता के रूप में दी जाती है. इसी योजना का गलत लाभ उठाने के लिए यह पूरा फर्जी पंचनामा, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए. कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों को लालच देकर आवेदन करवाया गया है, जबकि कुछ मामलों में उनकी जानकारी के बिना ही योजना से पैसे निकालने के आरोप भी सामने आए हैं.
दर्ज हुई 14 से ज्यादा FIRs!
सर्पदंश मौत के घोटाले वाला यह मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 14 से ज्यादा FIR इस मामले में दर्ज की जा चुकी हैं. पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच में कई संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है. जांच के दौरान तहसील कार्यालयों से जुड़े कर्मचारी, बिचौलिए, वकीलों और अन्य लोगों के शामिल होने की भी जानकारी मिली है.
स्वास्थ्य विभाग के दर्जनों कर्मचारी घोटाले में शामिल
पुलिस जांच में स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों और डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं. अधिकारियों के अनुसार, किसी मौत को सर्पदंश साबित करने के लिए पटवारी का पंचनामा, कोटवार की रिपोर्ट और सरकारी डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट आवश्यक होती है. ऐसे में यह जांच की जा रही है कि दस्तावेज तैयार करने और मुआवजा स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही होगी.
नगर निगम के पूर्व ड्राइवर से पूछताछ
इस पूरे घोटाले की जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि तहसील कार्यालय के कर्मचारी, ड्राइवर और चपरासियों की वकीलों की सांठगांठ थी. इसमें नगर निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा ने पूर्व नाजिर निहाल ध्रुव के समय से दफ्तर के छोटे-मोटे काम करना शुरू किया था और बाद में वह कंप्यूटर ऑपरेटर बन गया था, जिससे पुलिस नेकड़ी पूछताछ की है.
18 महीने पहले दफनाया शव निकाला गया
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब सर्पदंश घोटाले में जांच के लिए 18 महीने पहले दफन किए गए शव को दोबारा बाहर निकाला गया. न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में शव का दोबारा परीक्षण कराया गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौत का वास्तविक कारण क्या था.
फिलहाल छत्तीसगढ़ पुलिस इस मामले में लगातार पूछताछ कर रही है और जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है. संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं.
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