अमेरिका और इसराइल ने धोखे से हमला किया जिसका कोई जवाब आज भी ट्रंप के पास नहीं है। और इसके बाद उल्टा अमेरिका ने खुद ईरान के हाथ एक ब्रह्मास्त्र थमा दिया। इसे ब्रह्मास्त्र कहें जिसका निशाना खाली नहीं जाना है। एक ऐसी चाबी कहें जो सटीक बैठती है। लेकिन खास बात तो यह है कि ईरान को खुद इस बात का पहले अंदाजा नहीं था कि उसके पास इतनी बड़ी ताकत है। अमेरिका इसराइल की कार्रवाई ने उसकी इस ताकत को जगा दिया और ऐसा जगा दिया कि अब अमेरिका माथा पीट रहा है कि उसने यह क्या कर डाला। यह बात खुद अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मान रही हैं। जिस ब्रह्मास्त्र की बात कर रहे हैं, जिस कुंजी की बात कर रहे हैं, वो है होरमोस का रास्ता। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही है कि दरअसल अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में यह निष्कर्ष निकाला है कि अब ईरान जब चाहे तब समंदर में स्ट्रेट ऑफ होमोस इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर सकता है।
अमेरिका इसे ईरान के पास न्यूक्लियर से भी बड़ा हथियार मान रहा है। यह वही अहम समुंदरी रास्ता है जिससे दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20% हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी मीडिया सी एनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियां अब मान रही हैं कि युद्ध के बाद ईरान को दुनिया की इकॉनमी की कमजोर नब्ज़ दबाने की कला मिल गई है। एक बार ईरान हॉर्मोस पर बैठ जाता है तो अमेरिका जैसी महाशक्ति भी उससे हॉर्मोस छुड़वा नहीं सकती। जब ईरान चाहेगा खोलेगा और जब नहीं चाहेगा तो नहीं खोलेगा। दुनिया तड़प के रह जाएगी मगर कुछ नहीं कर पाएगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन बताते हैं कि भविष्य में भी ऐसा दोबारा हो सकता है। अमेरिका और ईरान में डील पर शुक्रवार को साइं वर्क हो जाएगा। ईरान ने बड़ा दिल दिखाते हुए इस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर आधिकारिक मोहर लगने से पहले ही हॉर्मोस को खोल दिया है। डील के बाद 60 दिनों में दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर को लेकर बातचीत होगी। फिलहाल तो हॉर्मोस का संकट टल गया है। लेकिन इसका दूसरा पहलू है कि इस पूरी जंग के दौरान ईरान ने दिखा दिया कि वो होर्मोस का रास्ता बंद कर सकता है। अभी तक यही माना जाता था कि ईरान क्या ही कर पाएगा या अगर किया भी तो अमेरिका एक-दो दिन में हॉर्मोस खाली करवा लेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। कुछ भी नहीं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अंदाजे बताते हैं कि भविष्य में फिर ऐसा हो सकता है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि हमने होमोस पर असली कंट्रोल ईरान को दे दिया है। यह किसी भी परमाणु हथियार से ज्यादा ताकतवर हथियार है। ईरान अब होमोस को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि उसके पास अभी भी हथियारों का बड़ा जखीरा मौजूद है। जिनमें मिसाइलें हैं, ड्रोन है, मिसाइल लांचर है, सैकड़ों छोटी तेज रफ्तार नावें शामिल हैं। उसकी नेवी मजबूत है और सबसे बड़ा हथियार होरमुस है। जिसे खुद अमेरिका ने इसराइल के प्रभाव में आकर खुद उसे थमाया है। देने वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेकिन इसके लिए आपको जद्दोजहद करनी पड़ती है। सही और गलत के बीच रास्ता और अपना क्लियर स्टैंड चुनना पड़ता है। खुद पर थोपे गए हमले पर ईरान ने करारा जवाब दिया। ऐसा कि मिडिल ईस्ट में नए शक्ति संतुलन के साथ लौटा। आज उसके पास होरमोस की चाबी है और वही लोग पैसा बरसा रहे हैं जो 3 माह पहले तक उसे मिटाने का ख्वाब देखते थे।
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अयोध्या में राम मंदिर के दान की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, टीम ने दान राशि की गिनती, रेकॉर्ड रखने और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों से भी सवाल किए। एसआईटी प्रमुख और लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस तथा वित्त विभाग के वेशेष सचिव नील रतन ने अलग-अलग पूछताछ की। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की तथा रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। दान में मिली आभूषणों और कीमती धातुओं के भंडारकक्ष का भी निरीक्षण गया। मामले में अब तक तीन शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है।
कुल 327.07 करोड़ रुपये की आय
राम मंदिर में हर साल करोड़ों रुपये की आय चढ़ावा और देश-विदेश से मिले दान के रूप में हुई। मंदिर सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024- 25 में विभिन्न स्रोतों से कुल 327.07 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें ऑनलाइन, RTGS, नकद, चेक आदि माध्यमों से प्राप्त राशि शामिल है। कुल आय में 153 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए, जबकि सुरक्षित रखी गई 1,400 करोड़ रुपये की धनराशि पर मिले ब्याज से 173 करोड़ रुपये की आय हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल चढ़ावा (हुंडी) से ही करीब 85 करोड़ रुपये मिले। दानपात्रों में जमा होने वाली राशि को ही चढ़ावा या हुंडी कहा जाता है। चढ़ावा में मिले रुपये गिनने के लिए 44 कर्मचारी लगे हैं। हर रोज औसतन 30 लाख रुपये की गिनती की जाती है। मंदिर परिसर में करीब 44 दानपात्र लगाए गए है।
मंदिर ट्रस्ट सुबूत पेश करेगा
राम मंदिर में चढ़ावा में करोड़ों की राशि गायब करने के सूत्रधार बने खुद को लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह के बारे में भी मंदिर ट्रस्ट सुबूत पेश करेगा। SIT की जांच के दौरान मंदिर चढ़ावा के काउंटिंग हाल में सभी तरह के दस्तावेज की जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि काउंटिंग हाल के रेकार्ड में 2021 से लेकर अब तक महिपाल सिंह के लेखा प्रभारी या कैश इंचार्ज की नियुक्ति का कोई पत्र और रेकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है। यह पता चला कि जिस तरह चढ़ावा राशि के वाउचर और बैंक में जमा करने वाले डाक्युमेंट में लेखा प्रभारी के हस्ताक्षर होते हैं, उनके हस्ताक्षर से कोई डाक्यूमेंट काउंटिंग सेल व बैंक में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है अपने को लेखा प्रभारी बता कर कैसे उन्होंने चढ़ावा में चोरी के आरोप को तूल दिया।
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