शेयर बाजार में बुधवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब देश के सबसे बड़े शेयर विनिमय राष्ट्रीय शेयर विनिमय (एनएसई) के बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ को लेकर नई जानकारी सामने आई। मौजूद जानकारी के अनुसार, एनएसई बुधवार शाम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपना मसौदा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल कर सकता है। इस खबर के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया बाजार में साफ दिखाई दी और बंबई शेयर विनिमय (बीएसई) के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है।
दोपहर करीब 1 बजकर 15 मिनट पर बीएसई का शेयर लगभग 3 प्रतिशत से अधिक टूटकर 4,029 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बीएसई उस दिन पूंजी बाजार सूचकांक में सबसे अधिक गिरने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और एंजेल वन के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली है।
बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि बीएसई के शेयरों पर दबाव की एक बड़ी वजह एनएसई के सूचीबद्ध होने की संभावना है। गौरतलब है कि वर्तमान में बीएसई देश का प्रमुख सूचीबद्ध बड़ा शेयर विनिमय है। ऐसे में एनएसई के बाजार में आने के बाद निवेशकों के पास एक और बड़ा विकल्प उपलब्ध होगा। विश्लेषकों का कहना है कि कुछ निवेशक बीएसई में मुनाफावसूली कर संभावित रूप से एनएसई में निवेश की तैयारी कर रहे हैं।
बता दें कि प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह से बिक्री प्रस्ताव के रूप में लाया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने हिस्से के शेयर बेचेंगे। जानकारी के अनुसार, एनएसई की कुल हिस्सेदारी का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा इस पेशकश के जरिए बेचा जा सकता है। गैर-सूचीबद्ध बाजार में एनएसई का मूल्यांकन करीब 5 लाख करोड़ रुपये आंका जा रहा है। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि आईपीओ का आकार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। लंबे समय से निवेशक और बाजार विशेषज्ञ एनएसई के सार्वजनिक निर्गम का इंतजार कर रहे थे।
मर्चेंट बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक इस आईपीओ में सबसे बड़ा विक्रेता शेयरधारक बन सकता है। बैंक लगभग 2 करोड़ 47 लाख 50 हजार शेयर बेच सकता है। वहीं एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड करीब 1 करोड़ 60 लाख शेयरों की बिक्री कर सकती है। कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड लगभग 1 करोड़ 18 लाख 70 हजार शेयर बेचने की तैयारी में है।
इसके अलावा अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड भी अपने हिस्से के शेयर बेच सकती हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मसौदा दस्तावेज दाखिल किए जाने से पहले एनएसई की आईपीओ समिति की बैठक हुई थी, जिसमें प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। वहीं एनएसई के निदेशक मंडल ने सोमवार को डीआरएचपी को मंजूरी दे दी थी। अब बाजार की निगाहें सेबी की आगे की प्रक्रिया और इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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एक देश भारत के लिए बहुत बड़ा सरदर्द बन गया है। यह देश भारत विरोधी अपराधियों और आतंकियों का नया अड्डा बन गया है। इसी वजह से यह देश भारत के टारगेट पर आ गया है। यह देश भारत का अगला बड़ा शिकार बनने वाला है। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि पाकिस्तानी आतंकियों के साथ-साथ ये देश अब ख़स्तानियों का नया घर बन गया है। अभी तक खालिस्तानी कनाडा से अपना सबसे बड़ा नेटवर्क चला रहे थे। लेकिन भारत सरकार के एक्शन के बाद कनाडा की सरकार ने खालिस्तानियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी। जिसके बाद पाकिस्तान की मदद से खालिस्तानियों ने अपना नेटवर्क इस देश में बनाना शुरू कर दिया। अजरबैजान ही भारत का अगला बड़ा टारगेट है। वैसे हम आपको बता दें कि भारत ने अजरबैजान का तगड़ा इलाज शुरू भी कर दिया है। मुस्लिम देश अज़रबैजान की गर्दन तोड़ने के लिए उसके पड़ोसी देश में भारत के हथियार पहुंचा दिए गए हैं।
दरअसल यह तो आप जानते ही हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। अजरबैजान को पाकिस्तान और तुर्की का पूरा समर्थन मिलता है। ये तीनों देश मिलकर भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा षड्यंत्र कर रहे हैं। इसी कड़ी में अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक बहुत बड़ी भारत विरोधी कांफ्रेंस हुई। इस कांफ्रेंस में खुलकर भारत को बर्बाद करने की बातें की गई। बाकू में हुई इसी कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी और ख़ालिस्तानी आतंकी पहुंचे। भारत में आतंक फैलाने के लिए इन सभी ने सिखों और मुस्लिमों का नाम लेना शुरू कर दिया। इस कांफ्रेंस में गद्दार ख़ालिस्तानियों ने कहा कि हमारे सिख भाई परेशान है| जबकि असलियत यह है कि ख़ालिस्तानी सिख नहीं है। ख़ालिस्तानियों का सिख धर्म से कुछ लेना देना नहीं है। भारत के सिखों का नाम लेकर यह ख़ालिस्तानी आतंकी पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलते हैं और अब इन्होंने अपनी नई दुकान अजरबैजान में खोल ली है। अजरबैजान में हुई इस भारत विरोधी बैठक में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा पहुंचे। इसी के साथ कनाडा, यूके और अमेरिका से आए ख़ालिस्तानी समर्थकों ने भी इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया।
इस कांफ्रेंस की शुरुआत में कनाडा में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निजर के लिए मौन रखा गया। खतरे की बात यह है कि अजरबैजान में हुए इस सम्मेलन के 11 दिन बाद ही गुजरात के स्कूलों और फिर उसके बाद मंदिरों और सरकारी इमारतों में ब्लास्ट की धमकियां मिलनी शुरू हो गई। धमकी भरे ईमेल खालीस्तान नेशनल आर्मी ने भेजे थे। यह साबित करता है कि भारत में दहशत फैलाने का यह पैटर्न अजरबैजान की बैठक में तैयार किया गया था। इसी कड़ी में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र में भी धमकी भरे ईमेल आए। इनमें भी हिंदू मंदिरों, सरकारी इमारतों, स्कूलों और रेल नेटवर्क को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यानी पानी सर के ऊपर जा चुका है। कुछ लोगों का कहना है कि भारत ने अजरबैजान के पड़ोसी और दुश्मन अर्मेनिया को हथियार दिए थे। इसीलिए अजरबैजान खालीस्तानियों को अपनी जमीन दे रहा है। लेकिन भारत ने अज़रबैजान के पक्के इलाज की तैयारी शुरू कर दी है। भारत अर्मेनिया में एक बहुत बड़ा नेटवर्क बना रहा है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपको अजरबैजान में भी अज्ञात हमलावर दिख जाएं। वैसे भारत ने अर्मेनिया में गोला बारूद भर दिया है।
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