अमेरिका ईरान समझौते के बारे में यह कहा जा रहा है कि कहीं दस्तखत से पहले यह समझौता टूट तो नहीं जाएगा। डॉनल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान के साथ एक बड़ी डील कर ली है। लेकिन एमओयू पर डिजिटल साइन करने के 24 घंटे बाद इस डील के पेच सामने आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बयानों में भी विरोधाभास साफ-साफ झलक रहा है। ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि शुक्रवार से हॉर्मोस खुलने वाला है। जबकि ईरान का कहना है कि पहले अमेरिका की नियत को परखा जाएगा और उसके बाद ही हॉर्मोस ट्रेड खोला जाएगा। ईरान को 28 अरब के पुनर्निर्माण फंड पर भी मतभेद पैदा हो गए हैं। एमओयू में यह बात लिखी है कि अमेरिका ईरान को 28 अरब का फंड देगा। लेकिन ट्रंप ने इसे निराधार बताया है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह साफ-साफ लिखा है कि यह फेक न्यूज़ है। अमेरिका 28 अरब का फंड नहीं देने वाला। इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी कंफ्यूजन है। ट्रंप यह कह रहे हैं कि ईरान के पास कोई परमाणु बम नहीं होगा। जबकि ईरान का कहना है कि इस पर 60 दिन की वार्ता के दौरान सहमति बनाई जाएगी। मतलब अभी इस पर कुछ हुआ नहीं है। अमेरिका ईरान डील से आईडीएफ मोसाद नाराज है। आईडीएफ और मोसाद ट्रंप की डील को कमजोर मानते हैं। न्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। द जेरुशसलेलम पोस्ट के हवाले से यह खबर सामने आ रही है। तो देखिए इजराइली डिफेंस फोर्सेस हो या फिर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद। इसके अफसर मान रहे हैं कि यह डील इजराइल के पक्ष में नहीं है। इसका कहीं ना कहीं फायदा ईरान को होगा।
न्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। यूरेनियम फ्रेमवर्क में कई कमियां हैं। प्रॉक्सी फंडिंग के मुद्दे पर इजराइल दरअसल भड़का हुआ है। हिजबुल्लाह का खात्मा चाहती है आईडीएफ। कमजोर डील से और मजबूत होगी ईरानी रिजीम। यह मानना है लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम है ट्रंप की डील। द जेरुसलम पोस्ट के हवाले से यह अहम खबर सामने आ रही है। लेबनान बारूद से दहलाए। ट्रंप गुस्से से आग बबूला। ट्रंप ने साफ कह दिया कि नेतन्याहू को बिल्कुल भी विवेक नहीं है।
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यूरोपीय संसद ने उन दो कानूनों को अंतिम मंज़ूरी दे दी, जिनका मकसद अगस्त 2025 के EU-US संयुक्त बयान के तहत अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते को लागू करना है। इन कानूनों में टैरिफ में कटौती के साथ-साथ यूरोपीय उद्योगों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उपाय भी शामिल हैं। यूरोपीय संसद की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूरोपीय संसद के सदस्यों (MEPs) ने औद्योगिक और कृषि-खाद्य आयात से जुड़े मुख्य नियम का समर्थन किया। इसके पक्ष में 440 और विपक्ष में 151 वोट पड़े, जबकि 50 सदस्य वोटिंग से दूर रहे। यह कानून अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों पर टैरिफ खत्म करता है और अमेरिका के कई तरह के सीफ़ूड और कृषि उत्पादों को बाज़ार में प्राथमिकता के साथ पहुँच प्रदान करता है। एक दूसरे नियम को 444 वोटों के समर्थन और 152 वोटों के विरोध के साथ मंज़ूरी मिली (54 सदस्य वोटिंग से दूर रहे)। यह नियम अमेरिका से लॉबस्टर के टैरिफ-मुक्त आयात की सुविधा को बढ़ाता है और इसमें प्रोसेस्ड लॉबस्टर उत्पादों को भी शामिल करता है।
संसद ने कहा कि दोनों प्रस्तावों पर पहले ही संसद और काउंसिल के वार्ताकारों के बीच सहमति बन चुकी थी, और यूरोपीय आयोग के मूल प्रस्तावों को और मज़बूत करने के लिए उनमें कई संशोधन भी किए गए थे। इस कानून में शामिल मुख्य प्रावधानों में से एक "सनसेट क्लॉज़" है, जिसके तहत इंडस्ट्रियल और एग्री-फूड इंपोर्ट से जुड़े नियम 31 दिसंबर, 2029 को खत्म हो जाएंगे, जब तक कि उन्हें रिन्यू न किया जाए। यूरोपीय आयोग को 30 जून, 2029 तक EU के उद्योगों, खेती, छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों और तीसरे देशों के साथ व्यापार के तरीकों पर इस नियम के असर का व्यापक मूल्यांकन करना होगा। अगर सही समझा जाए, तो इस समीक्षा के साथ नियम को आगे बढ़ाने का कानूनी प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।
यह कानून स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर US के टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करता है। यूरोपीय संसद ने ध्यान दिलाया कि अमेरिका ने अगस्त 2025 में टैरिफ के दायरे में आने वाले स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों की लिस्ट में 407 प्रोडक्ट कैटेगरी जोड़ी थीं, जिससे व्यापार में अनिश्चितता पैदा हुई। हाल ही में मंज़ूर किए गए उपायों के तहत, अगर अमेरिका 31 दिसंबर, 2026 तक EU के स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर 15 प्रतिशत से ज़्यादा टैरिफ दरें लागू रखता है, तो आयोग के पास टैरिफ में दी गई रियायतों को रोकने का अधिकार होगा।
आयोग 1 दिसंबर, 2026 तक इन प्रोडक्ट्स पर टैरिफ के तौर-तरीकों के बारे में यूरोपीय संसद और काउंसिल को एक रिपोर्ट भी सौंपेगा। इसके अलावा, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15 प्रतिशत की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकता है। रिलीज़ में कहा गया है, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15% की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकेगा।
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