Bihar News: पटना पूर्णिया एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव की खबर झूठी, बिहार सरकार ने अफवाहों पर लगाया विराम
Bihar News: कुछ समाचार पत्रों और सोशल मीडिया मंचों पर प्रकाशित उन खबरों को बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव कर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उनके सहयोगियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है.
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि समस्तीपुर जिले में एक्सप्रेसवे के संरेखण (अलाइनमेंट) में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है और भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया मूल रूप से स्वीकृत मार्ग के अनुसार ही संचालित की जा रही है.
किलोमीटर 48 से 53 के बीच नहीं हुआ बदलाव
सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि किलोमीटर 48+000 से 53+000 के बीच एक्सप्रेसवे के संरेखण में किसी भी प्रकार का परिवर्तन या विचलन नहीं किया गया है. वर्तमान में जारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया उसी मार्ग पर आधारित है जिसे पहले से स्वीकृति प्राप्त है.
उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रकाशित खबरों में किए गए दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते.
विशेषज्ञ समिति ने तय किया था एक्सप्रेसवे का मार्ग
पंकज कुमार पाल ने बताया कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का संरेखण सामाजिक-आर्थिक पहलुओं, तकनीकी व्यवहार्यता और भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है. इस मार्ग को ‘अलाइनमेंट समिति’ ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दी थी. समिति में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, एनएचएआई के अध्यक्ष तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. डीपीआर परामर्शी द्वारा प्रस्तुत व्यवहार्यता रिपोर्ट की गहन समीक्षा के बाद सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन किया गया था.
जनवरी 2025 में मिल चुकी है अंतिम मंजूरी
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, एक्सप्रेसवे के स्वीकृत संरेखण को 15 जनवरी 2025 को ही अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गई थी. इसी स्वीकृत मार्ग के आधार पर समस्तीपुर जिले के संबंधित गांवों और भूखंडों के लिए वैधानिक अधिसूचनाएं जारी की गई हैं. सचिव ने कहा कि समाचार पत्रों में लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उनका किसी तथ्यात्मक आधार से कोई संबंध नहीं है.
3ए अधिसूचना भी मूल संरेखण पर आधारित
पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया कि 6 मार्च 2026 को प्रकाशित 3ए अधिसूचना भी उसी मूल संरेखण पर आधारित है, जिसे जनवरी 2025 में स्वीकृति मिली थी. विभाग के मुताबिक समाचार पत्रों में प्रकाशित कथित संरेखण मानचित्र वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं है और इससे जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है.
केएसआर कॉलेज की मुख्य इमारत पूरी तरह सुरक्षित
सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि एक्सप्रेसवे परियोजना से केएसआर कॉलेज की मुख्य इमारत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचेगा.
उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत कॉलेज की केवल कुछ खाली भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रही है, जबकि मुख्य शैक्षणिक भवन पूरी तरह सुरक्षित है.
वैकल्पिक मार्ग से 200 से अधिक भवन होते प्रभावित
विभाग के अनुसार, वर्तमान संरेखण का चयन करते समय मानवीय विस्थापन को न्यूनतम रखने का विशेष ध्यान रखा गया है. प्रारंभिक आकलन के मुताबिक वर्तमान स्वीकृत मार्ग से केवल 65 आवासीय और व्यावसायिक संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं. वहीं, यदि समाचार पत्रों में दिखाए गए कथित वैकल्पिक मार्ग को अपनाया जाता, तो 200 से अधिक निर्मित ढांचे इसकी चपेट में आ जाते. ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ता.
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना को पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा. उन्होंने आम जनता और सभी हितधारकों से अपील की कि वे भ्रामक खबरों, अफवाहों और तथ्यों से परे दावों पर ध्यान न दें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.
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PCM के कठिन सवालों से मिलेगी राहत? JEE Advanced के नए पैटर्न पर IITs का बड़ा कदम, छात्रों पर होगा ट्रायल
देश के सबसे मशहूर इंजीनियरिंग संस्थान IIT में दाखिले का रास्ता आने वाले सालों में बदल सकता है. ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) एडवांस्ड के परीक्षा पैटर्न में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. इस प्रस्ताव के तहत फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) आधारित सवालों की जगह एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं. इस दिशा में IITs ने शुरुआती कदम भी बढ़ा दिए हैं. जुलाई महीने में देश के सभी 23 IIT मे नए पैटर्न का बीटेक फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स पर ट्रायल आयोजित किया जाएगा. इसके नतीजे के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. आइए जानते हैं कि जेईई एडवांस्ड का मौजूदा पैटर्न क्या है और नया पैटर्न कैसा होगा. जानते हैं कि आखिर क्यों जेईई एडवांस्ड का पैटर्न बदलने की कवायद शुरू की गई है. पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.
कैसा है JEE Advanced का पैटर्न?
वर्तमान में JEE Main में सफल होने वाले 2.5 लाख उम्मीदवारों को JEE Advanced में बैठने का अवसर मिलता है. यह परीक्षा दो पेपरों में आयोजित होती है. दोनों पेपरों में कुल 360 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं. सभी सवाल फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों से जुड़े होते हैं. इस परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की समझ और समस्या हल करने की क्षमता का मूल्यांकन करना होता है. इसी स्कोर के आधार पर देश के अलग-अलग IIT में बीटेक और अन्य इंजीनियरिंग कोर्सों में दाखिला दिया जाता है.
नए पैटर्न में क्या होगा खास?
नए बदलाव के अनुसार, JEE Advanced में केवल एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं. यानी परीक्षा का फोकस विषय ज्ञान से हटकर छात्रों की क्षमता, सोच और समस्या समाधान पर होगा. इस मॉडल में यह देखा जाएगा कि छात्र किसी जटिल परिस्थिति को किस तरह समझते हैं और उसका समाधान कैसे निकालते हैं. परीक्षा में लॉजिकल रीजनिंग, गणितीय सोच और निर्णय क्षमता जैसे पहलुओं को महत्व दिया जा सकता है.
बीटेक फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स पर होगा ट्रायल
नए पैटर्न को लागू करने से पहले IITs इस पैटर्न को आजमाना चाहते हैं. इसी उद्देश्य से जुलाई में सभी 23 IIT में एक ट्रायल आयोजित किया जाएगा. इस ट्रायल में हाल ही में प्रवेश लेने वाले बीटेक फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स को शामिल किया जाएगा. छात्रों को एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न दिए जाएंगे और यह आकलन किया जाएगा कि वे इन सवालों को किस स्तर तक हल कर पाते हैं. ट्रायल के दौरान छात्रों की सोच, क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता और समस्या सुलझाने के तरीके का भी ध्यान रखा जाएगा.
बदलाव के लिए बनाई गई खास समिति
JEE Advanced के परीक्षा ढांचे की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. इस समिति की अध्यक्षता IIT कानपुर के प्रोफेसर मानिंद अग्रवाल कर रहे हैं. समिति पहले भी परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर सुझाव दे चुकी है. शुरुआती प्रस्ताव में PCM विषयों के साथ एप्टीट्यूड आधारित प्रश्नों को शामिल करने की सिफारिश की गई थी. हालांकि अब समिति एक कदम आगे बढ़ते हुए केवल एप्टीट्यूड आधारित मॉडल पर विचार कर रही है. इसी मॉडल को ट्रायल के जरिए परखा जाएगा.
क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल विषय आधारित परीक्षा किसी छात्र की क्षमता को नहीं दर्शाती. IIT जैसे संस्थानों में सफलता के लिए सोच, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है. इसी वजह से प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यापक और आधुनिक बनाने पर चर्चा हो रही है. यदि एप्टीट्यूड आधारित मॉडल सफल साबित होता है, तो इससे छात्रों को भी अवसर मिल सकता है.
साल में दो बार हो सकती है परीक्षा
यह बदलाव केवल पैटर्न बदलने तक सीमित नहीं है. वह JEE Main की तरह JEE Advanced को भी साल में दो बार आयोजित करने पर विचार कर रही है. वर्तमान में JEE Advanced साल में सिर्फ एक बार आयोजित होता है. यदि भविष्य में यह प्रस्ताव लागू होता है, तो छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के लिए दो अवसर मिल सकते हैं.
क्या 2027 से लागू होगा नया पैटर्न?
फिलहाल नया पैटर्न लागू करने को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. जुलाई में होने वाले ट्रायल की रिपोर्ट IIT काउंसिल के सामने पेश की जाएगी. इसके बाद विशेषज्ञों की राय और आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा. अगर ट्रायल सफल रहता है और सभी पक्ष सहमत होते हैं तो जेईई एडवांस्ड 2026 को नए पैटर्न में आयोजीत किया जा सकता है. इससे देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है.
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