बिरयानी के 370 वसूलूंगा वाले वीडियो पर बोले देवेंद्र फडणवीस:स्टैंडअप कॉमेडी के नाम पर मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए; कॉमेडियन प्रणित समेत 3 पर केस दर्ज
स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में हुईं आपत्तिजनक बातों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान आया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा को लांघना सही नहीं है। इससे पहले महाराष्ट्र सायबर पुलिस ने गुरुग्राम में हुए एक कॉमेडी शो के वीडियो को लेकर प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इस शो में महिलाओं और मृतकों के शवों पर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। संविधान आजादी देता है, लेकिन जिम्मेदारी जरूरी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि वे खुद स्टैंडअप कॉमेडी देखना पसंद करते हैं, लेकिन कॉमेडी करते समय शालीनता के न्यूनतम मानकों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी देता है। हालांकि, इसमें कुछ सुरक्षा उपाय भी तय किए गए हैं ताकि इस आजादी का गलत इस्तेमाल न हो। जब अभिव्यक्ति अनियंत्रित हो जाती है, तो यह समाज में सम्मान से जीने के लोगों के अधिकार को प्रभावित करती है।" मनोरंजन के नाम पर मर्यादा न लांघें मुख्यमंत्री ने साफ किया कि कॉमेडी एक लोकप्रिय माध्यम है, लेकिन इसके जरिए सामाजिक सीमाओं को पार करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए मर्यादा की सीमाएं तोड़ना लोगों के साथ अन्याय करने जैसा है। इसलिए स्टैंडअप कॉमेडी करते समय कलाकारों को शालीनता के दायरे का पालन करना चाहिए। क्या है पूरा मामला दरअसल यह पूरा मामला गुरुग्राम में हुए उनके एक लाइव शो से जुड़ा है, जहां एक 22 साल के लड़के ने बातचीत के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। शो में बातचीत के दौरान जांगड़ा ने एक डेटिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक महिला पर करीब ₹360–₹370 की चिकन बिरयानी का खर्च किया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिला ने उन्हें घर छोड़ने के लिए कहा, तो उन्हें अपने खर्च की भरपाई के रूप में फिजिकल इंटिमेसी की उम्मीद थी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रणित मोरे की काफी आलोचना हुई। विवाद बढ़ने पर कॉमेडियन को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी और उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। वहीं वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को गुरुग्राम स्थित कंपनी स्टारविक डिजाइन से नौकरी से निकाल दिया गया। इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में सेजल पवार नाम की एक डॉक्टर और इन्फ्लुएंसर ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद प्रणित ने माफी मांगी इंस्टाग्राम और एक्स सहित कई प्लेटफॉर्म पर लोगों ने जांगड़ा के कमेंट की आलोचना की। विरोध बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इंस्टाग्राम स्टोरी में मोरे ने लिखा था कि हाल ही में वायरल हुई क्लिप को लेकर मिली आलोचनाओं को मैं स्वीकार करता हूं। दर्शक के कमेंट्स मेरे विचार नहीं हैं। मुझे उस समय बेहतर जवाब देना चाहिए था। हमने वीडियो हटा दिया है। मैं माफी मांगता हूं और भविष्य में ऐसे मामलों को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ संभालूंगा। हिमांशु जांगड़ा को नौकरी से निकाला गया स्टारविक डिजाइन ने इस मामले में जांगड़ा पर एक्शन लेते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के फाउंडर विवेक विश्वकर्मा ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा, “पिछले 24 घंटों में मुझे हमारे एक कर्मचारी हिमांशु जांगड़ा को लेकर सैकड़ों मैसेज, ईमेल और फोन कॉल आए हैं। आप सभी की तरह मैंने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो क्लिप्स देखे हैं। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि उन वीडियो में दिखाई गई बातें आपत्तिजनक हैं। मैं उन बातों से सहमत नहीं हूं। हमारी कंपनी भी ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती और न ही हम चाहते हैं कि ऐसी बातें युवाओं को प्रभावित करें।” -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें शवों के प्राइवेट पार्ट्स का उड़ता है मजाक':'370 की बिरयानी' विवाद के बीच प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो वायरल ‘370 रुपए की बिरयानी’ वाले वीडियो के बाद कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सेजल पवार नाम की एक डॉक्टर और इन्फ्लुएंसर ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। पूरी खबर पढ़ें
अशोक पंडित बोले- रणवीर और फरहान की प्राइवेट चैट पढ़ीं:रणवीर ने सब तय होने के बाद डॉन 3 छोड़ी थी, इसीलिए एक्शन लिया
फिल्म 'डॉन 3' विवाद में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने हिंदी रश से कहा कि एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) का निर्देश जारी करने से पहले उन्होंने रणवीर और डायरेक्टर फरहान अख्तर की प्राइवेट व्हाट्सएप चैट खुद पढ़ी थीं। रणवीर ने सब तय होने के बाद फिल्म छोड़ी थी, इसलिए उनके खिलाफ एक्शन लिया गया। हालांकि, रणवीर सिंह की तरफ से लीगल नोटिस मिलने के बाद फेडरेशन ने उनके खिलाफ जारी असहयोग का यह निर्देश अब वापस ले लिया था। प्राइवेट व्हाट्सएप चैट देखकर लिया था एक्शन अशोक पंडित ने बताया कि एक्टर के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था और गहराई से दस्तावेजों की जांच की गई थी। उन्होंने कहा, "शिकायत मिलने के बाद हमने रणवीर सिंह, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के बीच हुई व्हाट्सएप चैट देखी थीं। चैट से साफ था कि फिल्म के लिए स्टाइलिंग पूरी हो चुकी थी, कपड़े फाइनल थे, टिकट बुक हो चुके थे और होटलों का इंतजाम भी हो गया था। पूरी यूनिट तीन हफ्ते में शूटिंग के लिए रवाना होने वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर रणवीर पीछे हट गए।" शूटिंग से तीन हफ्ते पहले फिल्म छोड़ने से नुकसान अशोक पंडित ने कहा कि फिल्म 'डॉन 3' के डायरेक्टर फरहान अख्तर और प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी ने करीब पांच महीने पहले फेडरेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। मेकर्स का कहना था कि वे फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर 45 करोड़ रुपए खर्च कर चुके थे। अशोक पंडित ने मेकर्स का बचाव करते हुए कहा कि 300 करोड़ रुपए के बजट वाली फिल्म में इस तरह के खर्च होना आम बात है। कोई भी प्रोड्यूसर एक्टर की पक्की सहमति के बिना इतने पैसे खर्च नहीं करता। मेकर्स इस 45 करोड़ रुपए के खर्च का पूरा ऑडिट पेपर दिखाने के लिए भी तैयार हैं। रणवीर के लीगल नोटिस के बाद हटाया निर्देश मई के महीने में फेडरेशन ने रणवीर सिंह के अचानक फिल्म छोड़ने पर उनके खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था। इसके खिलाफ रणवीर सिंह ने अपनी लीगल टीम के जरिए फेडरेशन को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें इस निर्देश को हटाने की मांग की गई थी। इसके ठीक एक दिन बाद फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने सिनेमा जगत की अन्य संस्थाओं CINTAAऔर इम्पा IMPAA के अनुरोध पर इस निर्देश को वापस लेने का ऐलान कर दिया। हालांकि, फेडरेशन की लीगल टीम रणवीर के नोटिस का कानूनी जवाब जरूर देगी। बैन करने का अधिकार नहीं, बातचीत से हल अशोक पंडित ने यह भी साफ किया कि फेडरेशन का मकसद किसी के काम को रोकना नहीं है। उन्होंने कहा, "हम रणवीर की स्टारडम का सम्मान करते हैं। हमारे पास किसी को बैन करने का कोई अधिकार नहीं है। हमने रणवीर से अपील की है कि वे आएं और हमारे साथ बैठकर इस मामले का कोई बीच का रास्ता निकालें।" अब फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और रणवीर सिंह आपस में बैठकर इस नुकसान की भरपाई और विवाद को सुलझाने के लिए तैयार हैं ताकि फिल्म का काम दोबारा शुरू हो सके। जानिए क्या है रणवीर और फरहान अख्तर का विवाद डॉन 3 की घोषणा करीब तीन साल पहले हुई थी, जिसे फरहान अख्तर डायरेक्ट करने वाले थे। विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने पिछले साल दिसंबर में 'धुरंधर' की सफलता के बाद स्क्रिप्ट में अंतर होने के कारण फिल्म छोड़ दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर के फिल्म छोड़कर जाने से पहले मेकर्स आउटडोर लोकेशन और प्रोडक्शन पर काफी खर्च कर चुके थे। रणवीर के हटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रोड्यूसर्स ने उनसे 45 करोड़ रुपए की मांग की। रणवीर ने पहले पैसे देने से मना किया, लेकिन बाद में 10 करोड़ रुपए का ऑफर दिया, जिसे मेकर्स ने ठुकरा दिया।
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