Responsive Scrollable Menu

'दुनिया का हर कलाकार भारत में करना चाहता है परफॉर्म', स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी ने बताया भारत की ‘कॉन्सर्ट इकोनॉमी’ का दम

Independence Day 2026: देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित किया. अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में पीएम मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट यूजर्स, युवाओं और देश की बढ़ती ‘कॉन्सर्ट इकोनॉमी’ समेत कई अहम मुद्दों पर बात की.

पीएम मोदी के भाषण की खास बात ये रही कि उन्होंने देश की तरक्की को सिर्फ ट्रेडिशनल इकनोमिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मनोरंजन, संस्कृति, पर्यटन और क्रिएटिव इंडस्ट्री को भी भारत की बढ़ती ताकत के तौर पर पेश किया. उन्होंने खास तौर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का जिक्र करते हुए बताया कि दुनिया भर में भारत की संस्कृति और क्रिएटिव कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है.

कॉन्सर्ट इकोनॉमी पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में तेजी से बढ़ती लाइव कॉन्सर्ट इंडस्ट्री की ओर भी ध्यान खींचा. उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब दुनिया का हर कलाकार भारत में आकर परफॉर्म करना चाहता है. दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत में इंटरनेशनल म्यूजिक कॉन्सर्ट्स का चलन काफी तेजी से बढ़ा है. देश के बड़े शहरों में ग्लोबल आर्टिस्ट्स के शो आयोजित हो रहे हैं. इन कार्यक्रमों का असर सिर्फ म्यूजिक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहता, बल्कि होटल, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट, टिकटिंग, सिक्योरिटी, इवेंट मैनेजमेंट और पर्यटन जैसे कई सेक्टर्स को भी फायदा मिलता है.

यही वजह है कि लाइव कॉन्सर्ट्स को अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है. किसी बड़े इंटरनेशनल आर्टिस्ट के कॉन्सर्ट में हजारों से लेकर लाखों तक लोग पहुंच सकते हैं. ऐसे में टिकट बिक्री के अलावा शहर की होटल इंडस्ट्री, कैब सर्विस, एयरलाइन, फूड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कमाई भी बढ़ती है.

भारत की सॉफ्ट पावर को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को देश की सात बड़ी ताकतों में से एक के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि योग ने दुनिया को भारत से जोड़ा है. इसके अलावा आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर, हस्तशिल्प, भारतीय संस्कृति, फिल्में, एनिमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट भी भारत की पहचान को दुनियाभर में मजबूत कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भारत के WAVES समिट का इंतजार कर रही है. WAVES यानी World Audio Visual & Entertainment Summit को भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक बड़े वैश्विक मंच के तौर पर देखा जा रहा है. इसका मकसद भारत की फिल्म, टेलीविजन, म्यूजिक, गेमिंग, एनिमेशन, VFX और डिजिटल मनोरंजन इंडस्ट्री को दुनिया के सामने एक मजबूत क्रिएटिव मार्केट के रूप में पेश करना है.

फिल्मों से लेकर VFX और गेमिंग तक भारत की ताकत

प्रधानमंत्री के भाषण में मनोरंजन और क्रिएटिव इंडस्ट्री को लेकर एक बड़ा संदेश भी दिखाई दिया. भारत लंबे समय से फिल्मों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, लेकिन अब भारतीय क्रिएटिव इंडस्ट्री का दायरा फिल्मों से काफी आगे बढ़ चुका है. आज भारत में VFX, एनीमेशन, गेमिंग, OTT और डिजिटल कंटेंट का बाजार तेजी से विकसित हो रहा है. भारतीय कलाकार और तकनीकी विशेषज्ञ दुनिया की बड़ी फिल्मों और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे हैं.

भारतीय फिल्में भी अब सिर्फ घरेलू दर्शकों तक सीमित नहीं हैं. हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों ने भी दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है. इसके अलावा भारतीय वेब सीरीज और डिजिटल कंटेंट की पहुंच भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि भारत को सिर्फ एक बड़ा मनोरंजन बाजार बनाने के बजाय एक ग्लोबल क्रिएटिव कंटेंट हब के रूप में विकसित किया जाए.

ये भी पढ़ें: Independence Day 2026: आजादी के जश्न में डूबा बॉलीवुड, कंगना ने लहराया तिरंगा तो अनुपम खेर और अक्षय ने कही ये बात

Continue reading on the app

Explainer: आजादी के 80 साल में भारत की 5 बड़ी रणनीतिक गलतियां, जिनका असर आज भी दिखता है

भारत ने अपनी आजादी के बाद से पिछले आठ दशकों (लगभग 80 वर्षों) में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन कूटनीति, रक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर कुछ ऐसी ऐतिहासिक और रणनीतिक गलतियां भी हुईं, जिनका खामियाजा देश आज तक भुगत रहा है. 

कश्मीर का अनसुलझा मुद्दा

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों के दौरान भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया था. एक समय ऐसा भी आया जब भारतीय फौजों ने दुश्मन को पछाड़ते हुए लाहौर के बाहरी इलाकों तक कदम रख दिए थे. सामरिक जानकारों का मानना है कि सैन्य मोर्चे पर मिली इस विशाल बढ़त का इस्तेमाल कूटनीतिक वार्ता की मेज पर किया जाना चाहिए था. लाहौर तक पहुंचने के बाद उस दबाव का उपयोग करके कश्मीर के विवादित हिस्सों को हमेशा के लिए वापस लिया जा सकता था. इस ऐतिहासिक मौके का पूरा सामरिक लाभ न उठा पाना एक बड़ी भूल साबित हुई, जिसके कारण कश्मीर का मुद्दा आज तक एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है.

चीन को समझने में भूल और 1962 का युद्ध

आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में भारत ने 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' की नीति पर गहरा विश्वास जताया. इस कूटनीतिक आदर्शवाद में चीन की विस्तारवादी नीतियों और उसकी सैन्य तैयारियों को काफी हद तक कम आंका गया. अति-आत्मविश्वास और सीमाओं पर सैन्य बुनियादी ढांचे की कमी के कारण 1962 में भारत को एक कड़वा सच झेलना पड़ा. चीन के अचानक हुए हमले ने न सिर्फ देश को झकझोर दिया, बल्कि भारत को अक्साई चिन जैसा अपना एक बड़ा और अहम भूभाग भी गंवाना पड़ा. इस युद्ध ने एक कठोर सबक दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यथार्थ और सैन्य तैयारियां ही असल सुरक्षा हैं.

ये भी पढ़ें: 15 August Desh Bhakti Geet: 15 अगस्त के जश्न में बजाएं ये 10 जोश से भर देने वाले देशभक्ति गीत

आपातकाल का काला अध्याय

साल 1975 में देश में लगाया गया आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जाता है. यह सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं था, बल्कि इसने देश के लोकतांत्रिक ढांचे और विकास को गहरा नुकसान पहुंचाया.  प्रेस की आजादी पर पाबंदी, संस्थाओं के कमजोर होने और अस्थिरता के कारण देश की प्रगति कई साल पीछे चली गई. इस दौर ने सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आर्थिक नीतियों में भी ऐसा भटकाव पैदा किया, जिसकी भारी कीमत पूरे राष्ट्र को चुकानी पड़ी.

लाइसेंस राज की बेड़ियां

आजादी के बाद दशकों तक भारत की अर्थव्यवस्था सख्त सरकारी नियंत्रण यानी 'लाइसेंस राज' की बेड़ियों में जकड़ी रही. उद्योगों को शुरू करने और चलाने के लिए जटिल सरकारी अनुमतियों की आवश्यकता होती थी, जिसने नवाचार और निजी क्षेत्र के विकास को बुरी तरह रोक दिया. जब दुनिया के कई देश तेजी से औद्योगीकरण कर रहे थे, तब भारत आर्थिक रूप से पिछड़ रहा था. यह सिलसिला तब जाकर टूटा जब 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ऐतिहासिक सुधार करते हुए अर्थव्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोले. हालांकि, तब तक देश अपने आर्थिक विकास के कई बहुमूल्य दशक खो चुका था.

ये भी पढ़ें: AI ट्रेनिंग, सेमीकंडक्टर प्लांट, ओलपिंक के लिए टैलेंट हब... लाल किला से पीएम मोदी ने किए कई बड़े एलान

रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश की कमी

साल 1947 के आसपास भारत और चीन दोनों ने लगभग एक साथ अपनी नई यात्रा शुरू की थी. लेकिन आज दोनों देशों की स्थिति में एक बड़ा अंतर है, जिसका मुख्य कारण अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश की भारी कमी है. चीन ने शुरू से ही तकनीकी नवाचार, विज्ञान और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा आरएंडडी में लगाया. इसके विपरीत, भारत में अनुसंधान को वह प्राथमिकता और पूंजी नहीं मिल सकी जिसकी आवश्यकता थी. इसी रणनीतिक चूक का नतीजा है कि आज वैश्विक सप्लाई चेन, रक्षा उत्पादन और नई तकनीक के मामले में चीन और भारत के बीच एक बड़ा फासला बन गया है.

Continue reading on the app

  Sports

AUS VS BAN Day-3: हार से बचने के लिए छटपटा रहा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश ने तीसरे दिन भी निकाल दिया पसीना

Australia vs Bangladesh, 1st Test Day-3 ऑस्टेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के तीसरे दिन बांग्लादेश ने अपना शिकंजा कस लिया है. मेजबान टीम की दूसरी पारी में भी उसके टॉप ऑर्डर बल्लेबाजी बुरी तरह से फेल रही. तीसरे दिन के खेल की समाप्ति तक ऑस्ट्रेलिया ने 161 रन बनाने में अपने 4 विकेट गंवा दिए हैं. ऑस्ट्रेलिया अभी भी बांग्लादेश से 67 रन पीछे चल रही है. Sat, 15 Aug 2026 14:02:17 +0530

  Videos
See all

PM Modi ने की युवाओं के लिए बड़ी घोषणा #aajtak #shorts #15august #independenceday #redfort #pmmodi #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-15T09:14:27+00:00

जमीन के नीचे गैस का रिसाव, अचानक लगी आग | #shorts #viralvideo #viralnews #news #shortvideo #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-15T09:15:02+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers