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जिन्हें लगता था भारत राष्ट्र के रूप में टिक नहीं पाएगा, बिखर जाएगा, सबको करारा जवाब हैं भारत के ये 80 साल!

14-15 अगस्त 1947 की वह आधी रात... जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब भारत अपनी नियति के साथ एक ऐतिहासिक साक्षात्कार कर रहा था। उस रात दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के ज़रिए पूरी दुनिया को चकित कर दिया। आज 15 अगस्त 2026 को भारत जब अपनी स्वतंत्रता की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है और आज़ादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो यह जश्न सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि 1947 में भारत के वजूद पर उठाए गए हर सवाल का एक ठोस जवाब है। साम्राज्यवादी ताकतें तब तथाकथित 'व्हाइट मैन्स बर्डन' का अहंकार पाले बैठी थीं। उनका मानना था कि अश्वेतों को सभ्य बनाने का ठेका सिर्फ गोरों के पास है। यूरोपीय बुद्धिजीवियों का दावा था कि अनगिनत भाषाओं, विविधताओं, गरीबी और अशिक्षा से जूझता यह नवजात राष्ट्र अपनी ही असमानताओं के बोझ तले कुछ ही सालों में ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। लेकिन आज का यह भारत उन तमाम पश्चिमी भविष्यवाणियों और उपेक्षाओं के मलबे पर सीना ताने खड़ा है मजबूत, अटूट और लगातार आगे बढ़ता हुआ।

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भारत लूट-खसोट के दौर में वापस चला जाएगा

1940 से 1945 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल का मानना था कि अगर अंग्रेज इस उपमहाद्वीप को छोड़कर जाते हैं तो जरूरत पड़ने पर जर्मनी से श्वेत जानुसेरी सैनिकों और अधिकारियों की सेवा लेकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हिंदुओं का सशस्त्र प्रभुत्व नष्ट किया जा सके। भारत का अंग्रेजों द्वारा छोड़ दिया जाना और उसे ब्राह्मणों की सत्ता में जाने देना एक क्रूर और धूर्ततापूर्ण नजरअंदाजी होगी। अगर ब्रिटिश भारत से चले जाते हैं तो उनके द्वारा निर्मित न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवाएं, रेलवे और लोक निर्माण की संस्थाओं का पूरा तंत्र खत्म हो जाएगा और हिंदुस्तान बहुत तेजी से शताब्दियों पहले की बर्बरता और मध्ययुगीन लूट-खसोट के दौर में वापस चला जाएगा।

अराजकता छा जाएगी

ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने 1891 में कहा था कि ये चार हजार साल पुराने लोग हैं। ये इतने पुराने हैं कि इस प्रणाली को सीख नहीं सकते। अगर हमने कभी भारतीयों को उनका शासन चलाने की छूट दी तो यहां अराजकता छा जाएगी या खुदा... किस तरह का भ्रम, अव्यवस्था, उलझन और बुरी स्थिति यहां छा जाएगी।

भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहीं

ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल के काउंसिल मेंबर सर जॉन स्ट्रेची ने सन 1888 में कहा था कि हिंदुस्तान के बारे में यह सबसे जरूरी सीखने लायक बात है कि एक भारतीय राष्ट्र का कभी भी अस्तित्व नहीं था, न ही यूरोपीय विचारों के मुताबिक कोई ऐसी भौतिक, राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक रूप से एकीकृत अवधारणा ही मौजूद थी। अतीत में भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहीं थी, न ही भविष्य में उसके ऐसा होने की संभावना है।

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Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप से 20 की मौत

इंडोनेशिया के तट पर शनिवार तड़के 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया जिससे कई इमारतें एवं मकान ढह गए और कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। प्राधिकारियों ने बताया कि छह लोग घायल हुए हैं और भूकंप के कारण हुए भूस्खलन के बाद दो अन्य लोग लापता हैं। प्राधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी कर तटीय इलाकों के लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा था लेकिन बाद में चेतावनी को वापस ले लिया गया।

इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कहा कि समुद्र के जलस्तर की निगरानी के दौरान ऐसा कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं पाया गया जिससे तटीय इलाकों के लिए खतरा पैदा हो। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में था।

शुरुआती भूकंप के बाद कई झटके महसूस किए गए। मौमेरे तलाश एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख फतहुर रहमान ने बताया कि बचावकर्मियों ने सिक्का, पश्चिमी मंगराई और पूर्वी मंगराई के तीन प्रभावित क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए हैं जिनमें मंगराई के रेओक गांव में भूस्खलन के मलबे से निकाले गए आठ शव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल छह लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

रहमान ने बताया कि बचावकर्मी अब भी उन दो ग्रामीणों की तलाश कर रहे हैं, जिनके मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रूडी दारमोको ने बताया कि भूकंप से भारी नुकसान हुआ है और कई इमारतें ढह गई हैं। उन्होंने कहा कि शहरों और गांवों में बिजली गुल होने के कारण सूचनाएं मिलने और तलाश एवं बचाव अभियान में दिक्कत आ रही है।

दारमोको ने कहा, ‘‘हम नुकसान और हताहतों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन संचार सेवाएं बाधित हैं।’’ उन्होंने बताया कि भूकंप के कारण एंडे रीजेंसी में हुए भूस्खलन से ‘ट्रांस-फ्लोरेस’ राजमार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में भूकंप के बाद कई अस्पतालों से मरीजों को एहतियातन बाहर निकालते देखा गया। अस्पताल कर्मचारियों ने बिस्तर, ‘ड्रिप स्टैंड’ और ऑक्सीजन सिलेंडर समेत उपकरणों को बाहर निकाला तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी उपचार स्थल बनाए।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में कहा कि नागेकेओ रीजेंसी में करीब 2,000 ग्रामीण अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों पर चले गए हैं। फ्लोरेस द्वीप के अधिकतर हिस्सों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए और शुरुआती खबरों में भारी नुकसान की बात सामने आई है। पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत की सिक्का रीजेंसी की निवासी योहाना एम्बु ने बताया कि तेज झटकों से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है... मैंने देखा कि मौमेरे के बंदरगाह टर्मिनल का प्रतीक्षालय ढह गया।’’ मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाले फ्लोरेस द्वीप में स्थित ‘सेंट पीटर मेजर सेमिनरी’ के प्रमुख पादरी गिडेलबर्टस टांगा ने बताया कि सुबह की प्रार्थना में शामिल छात्र उस समय घबराकर बाहर भागे, जब एक सभागार की छत ढह गई। टांगा ने कहा, ‘‘हमारे छात्र और नन छत गिरने पर घबराकर बाहर भागे। भूकंप के दौरान एक इमारत की दूसरी मंजिल से कूदने के कारण कम से कम एक पादरी का पैर टूट गया।’’ करीब 17,000 द्वीपों वाला विशाल द्वीपसमूह इंडोनेशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है।

‘रिंग ऑफ फायर’ प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप आते हैं। दिसंबर 1992 में सात तीव्रता के भूकंप के कारण आई सुनामी में फ्लोरेस द्वीप पर करीब 2,500 लोगों की मौत हो गई थी।

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  Sports

टेस्ट सीरीज की पहली गेंद पर विकेट का अनोखा रिकॉर्ड, इकलौता भारतीय बॉलर जिसने किया ये कारनामा

unique cricket record: टेस्ट क्रिकेट में मैच की पहली गेंद पर विकेट दुनिया के कई गेंदबाजों ने झटका है, लेकिन सीरीज की पहली गेंद पर ये कारनामा बेहद चुनिंदा बॉलर्स के नाम दर्ज है. दुनिया में सिर्फ 11 ही ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्होंने टेस्ट सीरीज की पहली गेंद पर विकेट चटकाया है. इनमें एक भारतीय दिग्गज भी शामिल है. दरअसल, यह नाम और कोई नहीं, बल्कि कपिल देव हैं. कपिल देव इस कारनामे को अंजाम देने वाले दुनिया के सिर्फ तीसरे गेंदबाज थे. 1992 में उन्होंने ऐसा किया. Sat, 15 Aug 2026 14:12:07 +0530

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