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England vs New Zealand: जोफ्रा आर्चर की वापसी से मजबूत हुई टीम, दो खिलाड़ी करेंगे Test डेब्यू

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ओवल मैदान पर खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मुकाबले से पहले मेजबान टीम ने अपनी अंतिम एकादश की घोषणा कर दी है। इस मुकाबले में दो खिलाड़ियों को पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला है, जबकि तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की लंबे समय बाद वापसी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

बता दें कि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में खेले गए पहले टेस्ट में 115 रन से जीत हासिल की थी। इस जीत के साथ टीम ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में भी एक स्थान का सुधार किया था। अब इंग्लैंड की नजर दूसरे मुकाबले में जीत दर्ज कर श्रृंखला अपने नाम करने पर है।

मौजूद जानकारी के अनुसार इंग्लैंड ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी टीम में चार बदलाव किए हैं। जॉर्डन कॉक्स और सॉनी बेकर को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है और दोनों खिलाड़ी अपना पदार्पण मुकाबला खेलेंगे। इसके अलावा जोफ्रा आर्चर और मैट फिशर की भी टीम में वापसी हुई है।

गौरतलब है कि जॉर्डन कॉक्स लंबे समय से राष्ट्रीय टीम में अवसर का इंतजार कर रहे थे। चोटों के कारण उन्हें पहले भी कई बार निराशा का सामना करना पड़ा था। हाल ही में उन्होंने इंग्लैंड लायंस के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था। घरेलू टी-20 प्रतियोगिता में भी उन्होंने इस सप्ताह केवल 31 गेंदों में 40 रन की तेज पारी खेलकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अब उन्हें आखिरकार टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने का अवसर मिला है।

दूसरी ओर सॉनी बेकर भी पहली बार सफेद जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। युवा तेज गेंदबाज के रूप में उन्हें भविष्य की बड़ी उम्मीद माना जा रहा है। इंग्लैंड प्रबंधन चाहता है कि युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त अवसर दिए जाएं ताकि टीम का तेज गेंदबाजी विभाग और मजबूत हो सके।

जोफ्रा आर्चर की वापसी भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने दिसंबर में अपना आखिरी टेस्ट मुकाबला खेला था। लगातार चोटों और फिटनेस संबंधी समस्याओं के कारण वह लंबे समय तक टेस्ट टीम से बाहर रहे थे। अब उनकी वापसी से इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण को अतिरिक्त धार मिलने की उम्मीद है।

वहीं मैट फिशर भी लगभग चार वर्ष बाद टेस्ट टीम में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में बारबाडोस में अपना पहला टेस्ट मुकाबला खेला था। इसके बाद चोटों और प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें लगातार अवसर नहीं मिल सके थे।

हालांकि टीम चयन में सबसे बड़ा झटका ओली रॉबिन्सन के बाहर होने के रूप में सामने आया। रॉबिन्सन ने दो वर्ष बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी करते हुए पहले मुकाबले में सात विकेट हासिल किए थे। लेकिन चोट के कारण वह दूसरे टेस्ट से बाहर हो गए हैं। उनकी अनुपस्थिति इंग्लैंड के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

बेन स्टोक्स की गैरमौजूदगी में जो रूट टीम की कप्तानी संभालेंगे। उनके साथ हैरी ब्रूक, बेन डकेट, जैकब बेथेल, एमिलियो गे और विकेटकीपर जेमी स्मिथ भी अंतिम एकादश का हिस्सा हैं। इंग्लैंड ने युवा खिलाड़ियों और अनुभवी चेहरों का संतुलित मिश्रण तैयार किया है और टीम को उम्मीद है कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में निर्णायक बढ़त हासिल करने में सफल रहेगी।

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Explainer: 100 करोड़ की फीस छोड़कर भी कैसे कमाते हैं फिल्म स्टार? समझिए बॉलीवुड की Profit-Sharing डील का पूरा खेल

How Bollywood Profit Sharing Deals Work: बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक ऐसा दौर था, जब बड़े सितारे फिल्मों को साइन करने के बाद अपनी पूरी फीस ले लेते थे. फिल्म चाहें फ्लॉप हो जाए, उनकी कमाई पर कोई असर नहीं पड़ता था. लेकिन पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का बिजनेस मॉडल तेजी से बदला है. अब कई सुपरस्टार फिल्म रिलीज से पहले ही मोटी फिक्स्ड फीस लेने के बजाय फिल्म की कमाई में हिस्सा लेना पसंद करते हैं. इसी मॉडल को प्रॉफिट-शेयरिंग या बैक-एंड डील कहा जाता है. ऐसे में कलाकार की कमाई फिल्म के बिजनेस पर टिक जाती है. यही वजह है कि आज कई बड़े एक्टर रिलीज के बाद अपनी फीस से कई गुना ज्यादा रकम हासिल कर लेते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा सिस्टम आखिर काम कैसे करता है.

क्या होती है प्रॉफिट-शेयरिंग डील?

आपको आसान शब्दों प्रॉफिट-शेयरिंग का मतलब बताते हैं. दरअसल, इस डील के तहत कोई भी एक्टर फिल्म साइन करने के वक्त पूरी फीस नहीं लेता है. वह फिल्म की रिलीज के बाद होने वाली कमाई में एग्रीमेंट के मुताबिक अपना हिस्सा लेता है. ऐसे में फिल्म जितनी ज्यादा कमाई करेगी, कलाकार का उतना ज्यादा प्रॉफिट होता है. इस मॉडल में दो तरह की सिस्टम होते हैं.पहली हाइब्रिड डील होती है, इसके मुताबिक, एक्टर कुछ फिक्स्ड फीस लेता है और बाकी कमाई का हिस्सा फिल्म के प्रदर्शन या एग्रीमेंट में जितने प्रतिशत प्रॉफिट देने की बात कही है ये उतने दिए जानते हैं. दूसरी होता है, प्योर प्रॉफिट डील. इसमें  कलाकार पहले कोई फीस नहीं लेता और पूरी तरह फिल्म के मुनाफे के हिसाब से मिलती है. अगर फिल्म सुपरहिट हो जाए तो उसकी कमाई रिकॉर्ड मोटी हो जाती है.

फिल्म की कमाई का हिसाब कैसे लगाया जाता है?

किसी भी फिल्म के कमाई कई हिस्सों में होती है. सबसे पहले फिल्म बनाने का खर्च जोड़ा जाता है. इसमें शूटिंग, लोकेशन, तकनीकी टीम, कलाकारों की सैलरी, सेट, वीएफएक्स और पोस्ट-प्रोडक्शन शामिल होते हैं. इसके बाद प्रमोशन और मार्केटिंग का खर्च जोड़ा जाता है. जब इन दोनों को मिलाया जाता है तो मूवी का कुल खर्च तैयार होता है. रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस, ओटीटी, सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स से जो पैसा आता है, उससे ये पैसा वसूला जाता है. जब कुल कमाई फिल्म के कुल खर्च से ज्यादा हो जाती है, तब जो रकम बचती है उसे फिल्म की असली कमाई मानी जाती है. इसी मुनाफे में से कलाकारों और प्रोड्यूसर के बीच पहले से तय प्रतिशत के अनुसार पैसों हिस्सेदारी की जाती है.

बॉलीवुड के बड़े एक्टर क्यों पसंद करते हैं यह मॉडल?

पिछले कुछ सालों में प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को फेमस बनाने का क्रेडिट बड़े सितारों को जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के बड़े एक्टर अपनी कई फिल्मों में फिक्स्ड फीस लेने के बजाय कमाई में हिस्सेदारी लेना पसंद करते हैं. इस मॉडल का फायदा यह होता है कि यदि फिल्म ब्लॉकबस्टर होती है तो एक्टर की कमाई फीस से कही ज्यादा हो जाती है.उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कलाकार 80 करोड़ रुपये फिक्स्ड फीस लेने के बजाय फिल्म के मुनाफे में हिस्सा लेता है और फिल्म हजार करोड़ का बिजनेस करती है तो उसकी कमाई ज्यादा हो सकती है. यही वजह है कि आज बड़े सितारे अपनी फिल्मों को केवल एक्टिंग प्रोजेक्ट नहीं बल्कि बिजनेस की तरह भी देखते हैं.

प्रोड्यूसर्स को इससे क्या फायदा मिलता है?

इस मॉडल सिर्फ एक्टर ही नहीं, बल्कि प्रोड्यूसर भी  फायदा उठाते हैं. किसी बड़े स्टार की फीस अक्सर फिल्म के बजट का बड़ा हिस्सा होती है. कई बार अकेले एक्टर की फीस ही 80 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है. जब स्टार प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल अपनाता है, तब प्रोड्सर को शुरुआत में इतनी बड़ी रकम नहीं देनी पड़ती. इससे फिल्म का शुरुआती बजट कम हो जाता है. कम लागत होने की वजह से प्रोड्यूसर फिल्म के ओटीटी, म्यूजिक और सैटेलाइट राइट्स बेचकर पैसा वसूल कर लेता है.इससे फिल्म का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है.

Photograph: (Chatgpt Generated Image)

हर बार फायदा नहीं, नुकसान भी हो सकता है

आपको बता दें कि प्रॉफिट-शेयरिंग सुनने में जितना बढ़िया मॉडल लगता है.उतना फायदेमंद भी नहीं है.अगर फिल्म लोगों को पसंद नहीं आती और बॉक्स ऑफिस पर कमजोर परफॉर्म करती है, तो एक्टर को नुकसान हो जाता है.यही इस मॉडल का सबसे बड़ा रिस्क है. फिक्स्ड फीस में  एक्टर को पहले ही पेमेंट मिल जाती है.लेकिन प्रॉफिट-शेयरिंग में उसकी कमाई पूरी तरह फिल्म की सक्सेस पर टिकी होती है. यानी सुपरहिट फिल्म से एक्टर करोड़ों का मुनाफा कमा सकता है.लेकिन फ्लॉप फिल्म से उसको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए ऐसे एग्रीमेंट अक्सर वही सितारे अपनाते हैं, जिन्हें अपनी फिल्म की कमाई पर पूरा भरोसा होता है.

ओटीटी ने कैसे बदला खेल?

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते क्रेज  ने इस मॉडल को और मजबूत बनाया है. पहले कमाई का सबसे बड़ा सोर्स केवल सिनेमाघर होते थे, लेकिन अब ओटीटी, सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स भी बड़ी कमाई का जरिया बन चुके हैं.आज कई डील में डिजिटल व्यूअरशिप से जुड़े बोनस क्लॉज भी शामिल किए जाते हैं. यदि कोई फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एग्रीमेंट से अधिक व्यूअरशिप जुटाती है, तो प्रोड्यूसर को एक्सट्रा पेमेंट मिलती है.कई मामलों में इस एक्सट्रा कमाई का हिस्सा एक्टर को भी दिया जाता है.यानी अब किसी फिल्म की सक्से केवल थिएटर तक नहीं रह गई है. डिजिटल परफॉर्मेंस भी कलाकार की कमाई बढ़ाने में अहम रोल निभा रहा है.

आने वाले समय में हो सकता है प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल आम

प्रॉफिट-शेयरिंग डील ने बॉलीवुड के बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल दिया है. यह सिस्टम फिल्म की सक्सेस और प्लॉप की जिम्मेदारी केवल प्रोड्यूसर पर नहीं छोड़ती, बल्कि लीड एक्टर को भी उससे जोड़ती है. बड़े सितारे अब सिर्फ फीस लेने वाले कलाकार नहीं रहे, बल्कि फिल्म के बिजनेस पार्टनर भी बन गए हैं.यही वजह है कि आज बॉलीवुड में कई बड़े प्रोजेक्ट फिक्स्ड फीस के बजाय मुनाफे में हिस्सेदारी के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं. आने वाले समय में यह मॉडल और ज्यादा फेमस होता दिखाई दे सकता है, क्योंकि इससे एक्टर और प्रोड्यूसर दोनों को अपने-अपने इससे प्रॉफिट मिलने की उम्मीद होती है. 

ये भी पढ़ें: Explainer: सलमान, शाहरुख, आमिर के बाद बॉलीवुड का अगला सुपरस्टार कौन? क्या खत्म हो चुका है बॉलीवुड का गोल्डन युग

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  Sports

Shamar Joseph का 'पंजा', Rutherford की फिफ्टी, West Indies ने श्रीलंका से 2-1 से जीती T20 सीरीज

जमैका के सबीना पार्क मैदान पर खेले गए तीसरे और निर्णायक अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को पांच विकेट से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला 2-1 से अपने नाम कर ली। मेजबान टीम की जीत के नायक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ और बल्लेबाज शेरफेन रदरफोर्ड रहे, जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से मैच का रुख बदल दिया।

बता दें कि श्रृंखला का यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि पहले दो मैचों के बाद मुकाबला बराबरी पर था। ऐसे में तीसरे मैच को जीतने वाली टीम ही श्रृंखला अपने नाम करने वाली थी। वेस्टइंडीज ने दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन करते हुए निर्णायक जीत हासिल की।

पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत काफी सकारात्मक रही। कमिल मिशारा और पथुम निसांका ने शुरुआती ओवरों में तेज रन बनाते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। पांचवें ओवर तक श्रीलंका का स्कोर एक विकेट पर 48 रन था और टीम बड़े स्कोर की ओर बढ़ती दिखाई दे रही थी। हालांकि पावरप्ले के अंतिम ओवर में शमार जोसेफ ने दो महत्वपूर्ण विकेट लेकर मुकाबले का रुख बदल दिया।

कमिल मिशारा ने 23 गेंदों पर 28 रन बनाए, लेकिन उनके आउट होते ही श्रीलंकाई पारी लड़खड़ा गई। मौजूद जानकारी के अनुसार दसवें ओवर तक टीम का स्कोर चार विकेट पर 80 रन हो गया था। इसके बाद कप्तान दासुन शनाका और दुनिथ वेलालागे ने पारी को संभालने की कोशिश की।

गौरतलब है कि दासुन शनाका अच्छी लय में दिखाई दे रहे थे, लेकिन जेसन होल्डर की एक सटीक गेंद पर बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद दुनिथ वेलालागे ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए कुछ महत्वपूर्ण चौके लगाए और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने 43 रन की उपयोगी पारी खेली।

हालांकि श्रीलंका की पारी के अंतिम ओवर में एक बार फिर शमार जोसेफ का जादू देखने को मिला। उन्होंने तीन विकेट हासिल करते हुए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया। उनकी घातक गेंदबाजी के सामने श्रीलंका की पूरी टीम 20 ओवर में 169 रन पर सिमट गई।

170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। दुनिथ वेलालागे ने शुरुआती ओवरों में शानदार गेंदबाजी करते हुए शाई होप को जल्दी आउट कर दिया। इसके बाद शिमरोन हेटमायर ने केवल 16 गेंदों पर 31 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की।

श्रीलंका के स्पिन गेंदबाजों, विशेषकर वानिंदु हसरंगा ने बीच के ओवरों में दबाव बनाया और वेस्टइंडीज का स्कोर आधे मैच तक चार विकेट पर 64 रन कर दिया। ऐसे समय में शेरफेन रदरफोर्ड ने जिम्मेदारी संभाली और धैर्य के साथ पारी को आगे बढ़ाया।

रदरफोर्ड ने समय-समय पर बड़े शॉट लगाए और महत्वपूर्ण साझेदारी की। उन्हें 25 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला, जब दासुन शनाका ने उनका कैच छोड़ दिया। इस मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने नाबाद 54 रन बनाए और टीम को जीत के करीब पहुंचाया।

मुकाबले का निर्णायक मोड़ तब आया जब दुष्मंथा चमीरा के एक ओवर में 24 रन बने। इसके बाद जेसन होल्डर ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए लगातार तीन छक्के लगाए और जीत लगभग तय कर दी। होल्डर 21 रन बनाकर नाबाद लौटे। अंततः वेस्टइंडीज ने 19.4 ओवर में पांच विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और दो गेंद शेष रहते सीरीज अपने नाम कर ली।

शमार जोसेफ को उनके पांच विकेट के शानदार प्रदर्शन के लिए मैच का सबसे मूल्यवान खिलाड़ी माना गया, जबकि शेरफेन रदरफोर्ड की संयमित अर्धशतकीय पारी ने मेजबान टीम की जीत सुनिश्चित की।
Mon, 15 Jun 2026 22:16:25 +0530

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