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How Bollywood Profit Sharing Deals Work: बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक ऐसा दौर था, जब बड़े सितारे फिल्मों को साइन करने के बाद अपनी पूरी फीस ले लेते थे. फिल्म चाहें फ्लॉप हो जाए, उनकी कमाई पर कोई असर नहीं पड़ता था. लेकिन पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का बिजनेस मॉडल तेजी से बदला है. अब कई सुपरस्टार फिल्म रिलीज से पहले ही मोटी फिक्स्ड फीस लेने के बजाय फिल्म की कमाई में हिस्सा लेना पसंद करते हैं. इसी मॉडल को प्रॉफिट-शेयरिंग या बैक-एंड डील कहा जाता है. ऐसे में कलाकार की कमाई फिल्म के बिजनेस पर टिक जाती है. यही वजह है कि आज कई बड़े एक्टर रिलीज के बाद अपनी फीस से कई गुना ज्यादा रकम हासिल कर लेते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा सिस्टम आखिर काम कैसे करता है.
क्या होती है प्रॉफिट-शेयरिंग डील?
आपको आसान शब्दों प्रॉफिट-शेयरिंग का मतलब बताते हैं. दरअसल, इस डील के तहत कोई भी एक्टर फिल्म साइन करने के वक्त पूरी फीस नहीं लेता है. वह फिल्म की रिलीज के बाद होने वाली कमाई में एग्रीमेंट के मुताबिक अपना हिस्सा लेता है. ऐसे में फिल्म जितनी ज्यादा कमाई करेगी, कलाकार का उतना ज्यादा प्रॉफिट होता है. इस मॉडल में दो तरह की सिस्टम होते हैं.पहली हाइब्रिड डील होती है, इसके मुताबिक, एक्टर कुछ फिक्स्ड फीस लेता है और बाकी कमाई का हिस्सा फिल्म के प्रदर्शन या एग्रीमेंट में जितने प्रतिशत प्रॉफिट देने की बात कही है ये उतने दिए जानते हैं. दूसरी होता है, प्योर प्रॉफिट डील. इसमें कलाकार पहले कोई फीस नहीं लेता और पूरी तरह फिल्म के मुनाफे के हिसाब से मिलती है. अगर फिल्म सुपरहिट हो जाए तो उसकी कमाई रिकॉर्ड मोटी हो जाती है.
फिल्म की कमाई का हिसाब कैसे लगाया जाता है?
किसी भी फिल्म के कमाई कई हिस्सों में होती है. सबसे पहले फिल्म बनाने का खर्च जोड़ा जाता है. इसमें शूटिंग, लोकेशन, तकनीकी टीम, कलाकारों की सैलरी, सेट, वीएफएक्स और पोस्ट-प्रोडक्शन शामिल होते हैं. इसके बाद प्रमोशन और मार्केटिंग का खर्च जोड़ा जाता है. जब इन दोनों को मिलाया जाता है तो मूवी का कुल खर्च तैयार होता है. रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस, ओटीटी, सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स से जो पैसा आता है, उससे ये पैसा वसूला जाता है. जब कुल कमाई फिल्म के कुल खर्च से ज्यादा हो जाती है, तब जो रकम बचती है उसे फिल्म की असली कमाई मानी जाती है. इसी मुनाफे में से कलाकारों और प्रोड्यूसर के बीच पहले से तय प्रतिशत के अनुसार पैसों हिस्सेदारी की जाती है.
बॉलीवुड के बड़े एक्टर क्यों पसंद करते हैं यह मॉडल?
पिछले कुछ सालों में प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को फेमस बनाने का क्रेडिट बड़े सितारों को जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के बड़े एक्टर अपनी कई फिल्मों में फिक्स्ड फीस लेने के बजाय कमाई में हिस्सेदारी लेना पसंद करते हैं. इस मॉडल का फायदा यह होता है कि यदि फिल्म ब्लॉकबस्टर होती है तो एक्टर की कमाई फीस से कही ज्यादा हो जाती है.उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कलाकार 80 करोड़ रुपये फिक्स्ड फीस लेने के बजाय फिल्म के मुनाफे में हिस्सा लेता है और फिल्म हजार करोड़ का बिजनेस करती है तो उसकी कमाई ज्यादा हो सकती है. यही वजह है कि आज बड़े सितारे अपनी फिल्मों को केवल एक्टिंग प्रोजेक्ट नहीं बल्कि बिजनेस की तरह भी देखते हैं.
प्रोड्यूसर्स को इससे क्या फायदा मिलता है?
इस मॉडल सिर्फ एक्टर ही नहीं, बल्कि प्रोड्यूसर भी फायदा उठाते हैं. किसी बड़े स्टार की फीस अक्सर फिल्म के बजट का बड़ा हिस्सा होती है. कई बार अकेले एक्टर की फीस ही 80 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है. जब स्टार प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल अपनाता है, तब प्रोड्सर को शुरुआत में इतनी बड़ी रकम नहीं देनी पड़ती. इससे फिल्म का शुरुआती बजट कम हो जाता है. कम लागत होने की वजह से प्रोड्यूसर फिल्म के ओटीटी, म्यूजिक और सैटेलाइट राइट्स बेचकर पैसा वसूल कर लेता है.इससे फिल्म का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है.
हर बार फायदा नहीं, नुकसान भी हो सकता है
आपको बता दें कि प्रॉफिट-शेयरिंग सुनने में जितना बढ़िया मॉडल लगता है.उतना फायदेमंद भी नहीं है.अगर फिल्म लोगों को पसंद नहीं आती और बॉक्स ऑफिस पर कमजोर परफॉर्म करती है, तो एक्टर को नुकसान हो जाता है.यही इस मॉडल का सबसे बड़ा रिस्क है. फिक्स्ड फीस में एक्टर को पहले ही पेमेंट मिल जाती है.लेकिन प्रॉफिट-शेयरिंग में उसकी कमाई पूरी तरह फिल्म की सक्सेस पर टिकी होती है. यानी सुपरहिट फिल्म से एक्टर करोड़ों का मुनाफा कमा सकता है.लेकिन फ्लॉप फिल्म से उसको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए ऐसे एग्रीमेंट अक्सर वही सितारे अपनाते हैं, जिन्हें अपनी फिल्म की कमाई पर पूरा भरोसा होता है.
ओटीटी ने कैसे बदला खेल?
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते क्रेज ने इस मॉडल को और मजबूत बनाया है. पहले कमाई का सबसे बड़ा सोर्स केवल सिनेमाघर होते थे, लेकिन अब ओटीटी, सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स भी बड़ी कमाई का जरिया बन चुके हैं.आज कई डील में डिजिटल व्यूअरशिप से जुड़े बोनस क्लॉज भी शामिल किए जाते हैं. यदि कोई फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एग्रीमेंट से अधिक व्यूअरशिप जुटाती है, तो प्रोड्यूसर को एक्सट्रा पेमेंट मिलती है.कई मामलों में इस एक्सट्रा कमाई का हिस्सा एक्टर को भी दिया जाता है.यानी अब किसी फिल्म की सक्से केवल थिएटर तक नहीं रह गई है. डिजिटल परफॉर्मेंस भी कलाकार की कमाई बढ़ाने में अहम रोल निभा रहा है.
आने वाले समय में हो सकता है प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल आम
प्रॉफिट-शेयरिंग डील ने बॉलीवुड के बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल दिया है. यह सिस्टम फिल्म की सक्सेस और प्लॉप की जिम्मेदारी केवल प्रोड्यूसर पर नहीं छोड़ती, बल्कि लीड एक्टर को भी उससे जोड़ती है. बड़े सितारे अब सिर्फ फीस लेने वाले कलाकार नहीं रहे, बल्कि फिल्म के बिजनेस पार्टनर भी बन गए हैं.यही वजह है कि आज बॉलीवुड में कई बड़े प्रोजेक्ट फिक्स्ड फीस के बजाय मुनाफे में हिस्सेदारी के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं. आने वाले समय में यह मॉडल और ज्यादा फेमस होता दिखाई दे सकता है, क्योंकि इससे एक्टर और प्रोड्यूसर दोनों को अपने-अपने इससे प्रॉफिट मिलने की उम्मीद होती है.
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