नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। दिल्ली की भाजपा सरकार के सामने सबड़ी बड़ी चुनौती यमुना की सफाई है क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के चुनावी एजेंडे में यमुना की सफाई भी एक महत्वपूर्ण प्वाइंट था। हालांकि, दिल्ली सरकार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लगातार यमुना की सफाई को लेकर युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। मंत्री प्रवेश वर्मा का मानना है कि सरकार का मिशन तब तक सफल नहीं हो सकता है, जब तक दिल्ली की जनता जागरूक न हो जाए। उन्होंने कहा कि अगर जनता जागरूक होकर सड़कों पर कूड़ा फेंकना बंद करे और अन्य लोगों को भी स्वच्छता अभियान से जोड़े तो दिल्ली 90 फीसदी साफ हो जाएगी।
फुटबॉल विश्व कप 2026 में स्वीडन और ट्यूनीशिया के बीच खेले गए मुकाबले में एक ऐसा पल देखने को मिला, जिसने क्रिकेट फैंस को भी चौंका दिया। क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली मशहूर स्निकोमीटर (Snicko) जैसी तकनीक की मदद से स्वीडन का एक विवादित गोल वैध करार दिया गया और मैच के बाद इसकी खूब बात हो रही।
बर्मिंघम में खेले गए इस मुकाबले में स्वीडन ने ट्यूनीशिया को 5-1 से हराया था। मैच का सबसे चर्चित पल तब आया, जब दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मैटियास स्वानबर्ग ने मैदान पर आने के सिर्फ 18 सेकंड बाद गोल दाग दिया। यह गोल यासिन आयारी के फ्री-किक पर आया था। हालांकि शुरुआत में लाइनमैन ने स्वानबर्ग को ऑफसाइड मानते हुए गोल को खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वीडन के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने विरोध जताया। मामला वीएआर (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) के पास पहुंचा, जहां विशेष तकनीक की मदद से गोल की जांच की गई।
क्या है स्निको तकनीक? जांच में सामने आया कि फ्री-किक के दौरान स्वीडन के स्टार स्ट्राइकर अलेक्जेंडर इसाक ने गेंद को बेहद हल्का सा टच किया था। यह स्पर्श आंखों से दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन गेंद में लगे माइक्रोचिप और वेवफॉर्म तकनीक ने इसे रिकॉर्ड कर लिया। इसी टच के बाद स्वानबर्ग ऑनसाइड स्थिति में आ गए थे, इसलिए गोल को वैध करार दिया गया।
बीबीसी रेडियो 5 लाइव पर कमेंट्री कर रहे पूर्व आयरलैंड स्ट्राइकर क्लिंटन मॉरिसन ने कहा कि पहली नजर में ऐसा नहीं लगा था कि इसाक ने गेंद को छुआ है। लेकिन तकनीक ने साबित कर दिया कि फैसला सही था।
क्रिकेट की स्निको का फुटबॉल में कैसे इस्तेमाल हो रहा? यह तकनीक एडिडास की 'कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी' का हिस्सा है। विश्व कप 2026 में इस्तेमाल हो रही ट्रिओंडा मैच बॉल में माइक्रोचिप लगी है, जो हर टच की जानकारी तुरंत वीएआर तक पहुंचाती है। एडिडास का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी से गेम में अंपायरिंग के फैसले पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से लिए जा सकते और गेमप्ले के बारे में ज़्यादा जानकारी मिल सकती।
जब स्वानबर्ग को गोल दिया गया, तो रिप्ले में स्क्रीन पर एक फ्लैट-लाइन सेंसर दिखा, जिसमें एक स्पाइक था जब बॉल इसाक के फैले हुए पैर से गुज़री, जिससे यह कन्फर्म हो गया कि बॉल पर उनका टच ऐसा था जो नंगी आंखों से साफ़ नहीं दिख रहा था।
फुटबॉल में इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी हो चुका है। 2022 फीफा विश्व कप में इसी तकनीक ने साबित किया था कि पुर्तगाल के ब्रूनो फर्नांडिस के गोल में क्रिस्टियानो रोनाल्डो का कोई स्पर्श नहीं था। वहीं यूरो 2024 में बेल्जियम का एक गोल इसी तकनीक की मदद से रद्द किया गया था।
क्रिकेट में 'स्निको' का इस्तेमाल कैसे होता है? क्रिकेट का स्निकोमीटर एक डिसीजन-मेकिंग टेक्नोलॉजी सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि वीडियो रिव्यू के दौरान बैटर ने बॉल को हिट किया है या नहीं। यह टेक्नोलॉजी फ्रेम दर फ्रेम तस्वीरों में रिप्ले दिखाती है, जिसमें एक वेवफ़ॉर्म बनाया जाता जो दिखाता है कि बैट और बॉल के बीच कॉन्टैक्ट हुआ या नहीं।
साइंटिस्ट एलन ने इसका ईजाद किया था इसे इंग्लिश कंप्यूटर साइंटिस्ट एलन प्लास्केट ने 90 के दशक के बीच में ईजाद किया था। लेकिन अब इंग्लैंड में टेस्ट में इसका इस्तेमाल नहीं होता है। हालांकि, यह अभी भी ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में इस्तेमाल होता है।
'स्निको' ने 2025-26 एशेज सीरीज़ के दौरान विवाद खड़ा कर दिया था, जब ऑस्ट्रेलियाई बैटर एलेक्स कैरी को इसके ऑपरेटर की 'इंसानी गलती' के कारण तीसरे टेस्ट में नॉट आउट दिया गया था। कैरी उस समय 72 रन पर नॉट आउट थे और एडिलेड में पहली इनिंग में उन्होंने 106 रन बनाए थे।
जैसे-जैसे ज़्यादा एडवांस्ड टेक्नोलॉजी उपलब्ध हो रही है, क्रिकेट में 'स्निको' का इस्तेमाल कम हो रहा है। यह 340 फ्रेम प्रति सेकंड पर काम करता है, जो एडिडास की कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी और अल्ट्राएज जैसी टेक्नोलॉजी से कम है, अल्ट्राएज का इस्तेमाल इंग्लैंड में होने वाले टेस्ट मैचों में किया जाता है। फुटबॉल में इस तकनीक की बढ़ती भूमिका यह दिखाती है कि खेलों में तकनीक अब फैसलों को और अधिक सटीक बना रही है।