National Flag after Independence Day: 15 अगस्त के बाद तिरंगे झंडे का क्या करना चाहिए? जानिए क्या करना सही और क्या है गलत
National Flag after Independence Day: 15 अगस्त को आज के दिन पूरे देश में आजादी के 80वीं वर्षगांठ का जश्न मनाया जा रहा है. जगह-जगह तिरंगे की सजावट है और गाने-बाजे की गूंज हर तरफ सुनाई दे रही है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हर जगह तिरंगा शान से लहराता दिखाई देता है. लेकिन समारोह खत्म होने के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सही तरीके से संभालना भी उतना ही जरूरी है. तिरंगा देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है, इसलिए उसे उतारने के बाद लापरवाही से फेंकना या इस्तेमाल करना उचित नहीं है. अब अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर सेलिब्रेशन के बाद तिरंगे का क्या करना है, तो आइए हम आपको बताते हैं कि आपको क्या करना चाहिए...
तिरंगे को जमीन पर न छोड़ें
स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम खत्म होने के बाद तिरंगे को सड़क, मैदान, छत या किसी अन्य जगह पर नहीं छोड़ना चाहिए. उसे सावधानी से उतारकर साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. इस दौरान यह भी ध्यान रखें कि झंडा जमीन या पानी को न छुए. अगर सेलिब्रेशन के दौरान तिरंगा फट गया है, बहुत गंदा हो गया है या किसी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, तो उसे सामान्य कूड़े में नहीं डालना चाहिए। ऐसे राष्ट्रीय ध्वज को निजता और सम्मान के साथ पूरी तरह नष्ट किया जाना चाहिए.
तिरंगे को मोड़कर सम्मान से रखें
झंडा उतारने के बाद उसे अच्छी तरह मोड़कर सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है. उसे ऐसी जगह रखें जो साफ-सुथरी हो और वहां किसी भी प्रकार की कोई गंदगी न हो. अगर झंडा भविष्य में दोबारा इस्तेमाल करने योग्य है, तो उसे सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखना सबसे बेहतर विकल्प है, जिससे अगली बार कार्यक्रम के दौरान आपको झंडा खरीदना नहीं पड़ेगा.
कागज के तिरंगे का रखें विशेष ध्यान
स्कूलों और कार्यक्रमों में अक्सर कागज के छोटे तिरंगे बांटे जाते हैं. समारोह के बाद इन्हें सड़क या कूड़ेदान में फेंकना नहीं चाहिए. बच्चों को भी समझाना चाहिए कि कागज का तिरंगा भी राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए.
तिरंगे को कपड़े या सजावट के रूप में इस्तेमाल न करें
15 अगस्त के बाद बचे हुए तिरंगे को टेबल कवर, पर्दे, कुशन, कपड़े या किसी अन्य सजावटी वस्तु के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसी तरह तिरंगे पर कोई नाम, संदेश या विज्ञापन लिखना भी उचित नहीं है. इसलिए इस्तेमाल के बाद अगर झंडा सही स्थिति में है, तो उसे अच्छे से साफ-सुथरी जगह पर सुरक्षित रख दें.
#WATCH | Delhi: From the ramparts of the Red Fort, Prime Minister Narendra Modi says, "I have emphasized that energy security is crucial for us to channel our full energy towards alternative sources; consequently, while optimizing energy usage, India is rapidly moving in this… pic.twitter.com/izqCLIkPzl
— ANI (@ANI) August 15, 2026
प्लास्टिक के तिरंगे से बचें
राष्ट्रीय पर्वों पर प्लास्टिक के छोटे तिरंगे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाते हैं. कार्यक्रम के बाद इनके सड़क पर पड़े मिलने से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. इसलिए जहां संभव हो, कागज या अन्य उपयुक्त सामग्री के तिरंगे का इस्तेमाल करना बेहतर है. प्लास्टिक के झंडों के इस्तेमाल से बचें, ये सस्ते में मिल तो जाते हैं, लेकिन इसके बाद इसे डिस्पोज करना काफी मुश्किल होता है.
बच्चों को भी बताएं तिरंगे का सम्मान
स्कूलों और घरों में बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि स्वतंत्रता दिवस खत्म होने के साथ तिरंगे के प्रति हमारा सम्मान खत्म नहीं होता. उन्हें सिखाएं कि तिरंगे को जमीन पर न फेंकें, उस पर पैर न रखें और उसे कूड़े में न डालें. चूंकि, बच्चे आने वाला भविष्य हैं और यदि वह इन चीजों को समझेंगे और इसका सम्मान करेंगे, तो भारत के लिए गर्व की बात होगी.
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PM मोदी ने लाल किले से क्यों गिनाए डिफेंस, मोबाइल और डिजिटल क्रांति के आंकड़े? जानिए कितना बदला भारत
80 Independence Day: भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता जश्न मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले से राष्ट्रीय समारोह की अगुवाई की. वहीं, इस साल का आयोजन देश के लिए खास था, क्योंकि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का भी जश्न भी स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर मनाया गया. ऐसा पहली बार है कि जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम को औपचारिक रूप से गाया गया. इस राष्ट्रीय समारोह में देश की युवा शक्ति पर खास ध्यान दिया जा रहा है और यह भी दिखाया जा रहा है कि युवा शक्ति 2047 तक विकसित भारत को सफल बनाने में योगदान दे रही हैं.
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डिफेंस में आत्मनिर्भर होना जरूरी
लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा शक्ति का सबसे अधिक महत्व है. उन्होंने कहा कि डिफेंस में आत्मनिर्भर होना जरूरी है. दुनिया और भारत ने अनुभव कर लिया है कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है. जब दुनिया में सब अपनी-अपनी सोच रहे हैं तो हम सिर्फ बाजार बनकर नहीं रह सकते. हमें ग्लोबल सप्लायर बनने की ओर बढ़ना होगा. हमें ड्रोन और एंट्री ड्रोन की दिशा में खुद को मजबूत करना होगा. इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी पर भी काम करना होगी.
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