Japan PM Sanae Takaichi विवादित यासुकुनी स्मारक नहीं गईं, चीन ने जताया कड़ा विरोध
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर तोक्यो स्थित विवादित यासुकुनी स्मारक जाने से परहेज किया। माना जा रहा है कि उन्होंने इस कदम के जरिए चीन और दक्षिण कोरिया के साथ जापान के राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता देने की कोशिश की। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने एशिया में अपने देश के युद्धकालीन अतीत का कोई उल्लेख नहीं किया और न ही उस अतीत को लेकर किसी तरह का पश्चाताप व्यक्त किया।
यासुकुनी स्मारक की स्थापना युद्धों में मारे गए 24 लाख से अधिक लोगों के सम्मान में की गई थी। यह स्मारक उस समय विवादों के केंद्र में आ गया जब वहां द्वितीय विश्व युद्ध के दोषी ठहराए गए 14 जापानी युद्ध अपराधियों को भी शामिल किया गया। चीन और दक्षिण कोरिया का कहना है कि जापानी अधिकारियों का यासुकुनी स्मारक जाना जापान द्वारा युद्धकालीन अत्याचारों पर पर्याप्त पश्चाताप न होने को दर्शाता है।
ताकाइची ने हिरोशिमा, नागासाकी और ओकिनावा में हुई भारी तबाही के पीड़ितों के साथ-साथ विदेशों में युद्ध के मोर्चों पर मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके बलिदान को ‘जापान की शांति और समृद्धि की नींव’ बताया। तोक्यो के बुडोकान हॉल में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध की समाप्ति के बाद से जापान ने लगातार विश्व शांति और समृद्धि में योगदान दिया है।
हम युद्ध की त्रासदी को दोबारा कभी नहीं होने देंगे।’’ बुडोकान हॉल यासुकुनी स्मारक से कुछ ही दूरी पर है। ताकाइची ने यह भी कहा कि जापान क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय राष्ट्र’ के रूप में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी, तीन अन्य कैबिनेट मंत्री और ताकाइची की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन वरिष्ठ अधिकारी शनिवार सुबह यासुकुनी स्मारक पहुंचे।
इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के दर्जनों सांसदों के एक गैर-दलीय समूह ने भी वहां प्रार्थना की। इन यात्राओं को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। चीन ने आरोप लगाया कि जापानी राजनेताओं का वास्तविक उद्देश्य ‘‘युद्ध अपराधियों के खिलाफ दिए गए फैसले को बदलना, जापान के युद्ध अपराधों को छिपाना, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और सैन्यीकरण को तेज करने का रास्ता तैयार करना’’ है।
चीन ने जापान से इतिहास पर ‘गंभीर आत्ममंथन’ करने और सैन्यवाद से पूरी तरह दूरी बनाने का भी आग्रह किया।
Explainer: फिल्मों में Cameo और Special Appearance में क्या फर्क होता है? छोटे रोल में बड़े स्टार को लेने की क्या है वजह
Cameo-Special Appearance Difference: जब भी फैंस बड़े पर्दे पर बिग बजट फिल्म में बड़े स्टार को कुछ मिनटों के लिए देखते हैं तो स्टार की एंट्री पर उनका शानदार रिएक्शन देखने लायक होता है. कई बार वह स्टार सिर्फ सब कुछ ही देर के लिए नजर आता है तो कभी फिल्म में उसका कोई खास किरदार होता है. इन छोटो रोल्स को अक्सर कैमियो या स्पेशियल अपीरेंस कहा जाता है. हालांकि, कई लोग इन शब्दों का मतलब एक ही निकाल लेते हैं. इसको लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनका यूज भी फिल्मों में तय नियम के मुताबिक नहीं होता है. कई बार स्टार के छोटे रोल को कैमियो कहा जाता है तो उसी तरह किरदार को भी स्पेशल अपीयरेंस कह दिया जाता है. ऐसे में इसके अंतर को समझने के लिए सिर्फ स्क्रीन टाइम की तुलना काफी नहीं है.आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं.
कैमियो किसे कहते हैं?
कैमियों का सीधा मतलब होता है, फिल्म में सुपरस्टार की छोटा रोल. यह किरदार कुछ सेकंड का भी हो सकता है और कुछ मिनट का भी. इसे समझने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि कलाकार का रोल छोटा होने के बावजूद वह थिएटर में आए लोगों पर अपनी छाप छोड़ सकता है. कई बार कैमियो की एंट्री कहानी के किसी खास मोड़ कराई जाती है. उदाहरण के लिए, फिल्म का मैन किरदार किसी मुश्किल फंस जाता है और तभी कोई सुपरस्टार एंट्री करता है. वह छोटा सा सीन कहानी को आगे बढ़ाता है या लोगों को नई जानकारी देता हुआ दिखाई दे सकता है. हालांकि, एक बात यह भी समझनी जरूरी है कि कैमियों कोई बड़ा स्टार करे यह भी जरूरी नहीं है. फिल्म में डायरेक्टर, सिंगर, खिलाड़ी या कोई फेमस पर्सनैलिटी भी कैमियो कर सकता है. यानी कैमियों को सुपरस्टार से जोड़ना सही नहीं होगा क्योंकि वह फिल्म स्टोरी, किरदार या किसी खास सीन से जुड़ा भी हो सकता है.
स्पेशियल अपीरेंस किसे कहते हैं?
स्पेशियल अपीरेंस मतलब होता है किसी फिल्म में किसी कलाकार का लिमिटेड टाइम के लिए नजर आना है. इसमें बड़ा स्टार किसी छोटे रोल, गाने, खास सीन में नजर आ सकता है. उदाहरण के लिए, किसी फिल्म में मैन कलाकारों के अलावा कोई बड़ा एक्टर सिर्फ एक गाने में नजर आता है. मेकर्स उसके नाम को स्पेशियल अपीरेंस के तौर पर क्रेडिट कर सकते हैं. यही वजह है कि कैमियो और स्पेशियल अपीरेंस के बीच कोई ऐसी पक्की लकीर नहीं है जिसे हर फिल्म में लागू किया जाए. फिल्म इंडस्ट्री में दोनों शब्द कई बार एक-दूसरे की जगह यूज होते हैं. बॉलीवुड हंगामा ने अपनी कई रिपोर्ट्स कैमियो शब्द के लिए फ्रेंडली, एक सीन, एक गाना, गेस्ट और स्पेशियल अपीरेंस जैसी शब्दों का यूज किया है. इसलिए अगर किसी फिल्म के क्रेडिट में स्पेशियल अपीरेंस लिखा है, तो इसका मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि उसका फिल्म की कहानी से कोई लेना नहीं है, उसकी इपोर्टेंस उसके किरदार और फिल्म में उसकी प्रेजेंस पर डिपेंड करता है.
दोनों में सबसे आसान फर्क क्या है?
अगर कैमियो और स्पेशल अपीरेंस को एक लाइन में समझे तो कैमियो को फिल्म में किसी खास और छोटी प्रेजेंस के तौर पर देखा जा सकता है, जबकि स्पेशल अपीरेंस में ज्यादा बड़ा सीन हो सकता है. कैमियो अक्सर किसी खास सीन या छोटो रोल के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जबकि स्पेशल अपीरेंस का इस्तेमाल तब भी हो सकता है जब कोई बड़ा कलाकार गाने, इंट्रोडक्शन, किसी खास सीक्वेंस या छोटे रोल के लिए फिल्म में दिखाई दे. लेकिन यह कोई नियम नहीं है. कई फिल्मों में जिस रोल को एक जगह कैमियो कहा जाता है, दूसरी जगह उसी तरह की किरदार को स्पेशल अपीरेंस कह दिया जाता है.
किसी फिल्म में बड़े स्टार को क्यों लिया जाता है?
अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि जब किसी सुपरस्टार को पूरी फिल्म में सिर्फ कुछ सेकंड या मिनट ही दिखाते हैं तो उसे लेते क्यों हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह है स्टार पावर. किसी सुपरस्टार की कुछ देर की प्रेजेंस फिल्म को चर्चा में ला सकती है. जब लोगों को पता चलता है कि फिल्म में उनका फेवरेट स्टार भी नजर आने वाला है, तो सोशल मीडिया पर फिल्म की चर्चा बढ़ने के चांस होते हैं. आज के दौर में यह और भी ज्यादा जरूरी हो गया है. फिल्म का प्रमोशन सिर्फ पोस्टर और टीवी एड तक लिमिटेड नहीं है. सोशल मीडिया पर एक छोटा सा कैमियो भी फिल्म के ट्रेलर, क्लिप और रिएक्शन को वायरल कराने में हेल्प करता है.
फिल्म में सुपरस्टार की एंट्री बना देती माहौल
किसी फिल्म में अचानक बड़ा स्टार दिखाई देता है तो थिएटर में लोगों का रिएक्शन देखने लायक होता है. लोग उसकी एंट्री पर तालियां बजाते हैं, सीटी बजाते हैं और कई बार उस सीन को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जाने लगता है. यही चीज फिल्म के लिए फ्री का प्रमोशन का काम करती है. सोशल मीडिया से लेकर हर जगह लोग खुद उस सीन के बारे में बात करते हैं और बाकी लोग भी जानना चाहते हैं कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है. उदाहरण के लिए सलमान खान का तीस मार खान में में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण रोल काफी शानदार था. जिसकी काफी चर्चा हुई थी.
क्या कैमियो फिल्म की कहानी के लिए जरूरी होता है?
हर फिल्म में किसी सुपरस्टार का कैमियो कहानी के लिए जरूरी नहीं होता है.हालांकि, कुछ कैमियो फिल्म की कहानी के लिए बेहद खास होते हैं. जबकि कुछ सिर्फ थिएटर तक लाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिसकी एंट्री पर लोग तालियां और सीटियां मारते हैं. किसी फिल्म में बड़ा एक्टर स्टोरी के सबसे अहम पड़ाव पर आता है और उसके बिना शायद कहानी ना बढे. वहीं, दूसरी फिल्मों में वही स्टार सिर्फ एक मजेदार सीन में दिखाई दे सकता है. इसलिए कैमियो को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह फिल्म की स्टोरी के लिए कितना जरूरी है.
सिनेमैटिक यूनिवर्स में कैमियो की अहमियत
आज फिल्मों में सिनेमैटिक यूनिवर्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि अलग-अलग फिल्मों की स्टोरी और किरदार एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. ऐसे में एक फिल्म का बड़ा किरदार दूसरी फिल्म में कुछ मिनटों के लिए दिखाई दे सकता है. इससे ऑडियंस को क्लू मिलता है कि आगे आने वाली स्टोरी क्या हो सकती है. हालांकि उससे स्टोरी के बारे में सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. बॉलीवुड में कॉप यूनिवर्स इसका अच्छा उदाहरण है. सिंघम, सिंबा और सूर्यवंशी जैसी फिल्मों के किरदारों का एक-दूसरे की फिल्मों में आना सिर्फ लोगों को खुश नहीं होते, बल्कि फिल्म की कहानी के लिए भी बहुत अहम होते हैं. कई बार कैमियो अगली फिल्म की कहानी की नींव भी रखने का काम करता है.
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