600 गेंदें रोज और 8 घंटे की तपस्या... बैट स्विंग नहीं, ये 'मसल मेमोरी' का कमाल है, वैभव सूर्यवंशी के विस्फोटक बल्लेबाज बनने की अनसुनी कहानी
Vaibhav Sooryavanshi secret to success revealed: वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी और टीम इंडिया तक के सफर के पीछे छह साल की कठोर तपस्या छिपी है. कोच मनीष ओझा के अनुसार, वैभव प्रतिदिन 8 घंटे अभ्यास और 100 ओवरों तक गेंदों का सामना करते थे. इस सफलता में उनके माता-पिता का बलिदान अतुलनीय है. जहां पिता रोजाना ढाई घंटे का सफर तय करते, वहीं मां तड़के 2 बजे जागकर सबके लिए खाना बनाती थीं. यही अनुशासन और 'मसल मेमोरी' आज उन्हें विश्व क्रिकेट का उभरता सितारा बना रही है.
धीरज-कुमकुम ने आर्चरी वर्ल्ड कप में रचा इतिहास, ओलंपिक चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड मेडल
Dhiraj Bommadevara Kumkum Mohod wins gold in archery world cup: तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने इतिहास रच दिया है. तीरंदाजी विश्व कप चरण तीन के रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में इस भारतीय जोड़ी ने ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. खेल की सबसे मजबूत टीमों में से एक (ओह ये जिन और किम जे देओक) के खिलाफ धीरज ने आखिरी दो तीरों पर परफेक्ट 10 का स्कोर कर भारत की जीत पक्की की. मिश्रित टीम स्पर्धा में इन दोनों खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप स्वर्ण पदक है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18













.jpg)








