ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले चौथे जहाज पर हमला! विदेश मंत्रालय ने बताई पूरी सच्चाई
Middle East Tension: मध्य पूर्व में भारी तनाव बना हुआ है. जहां अमेरिका और ईरान लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं. इस बीच ओमान के पास एक और भारतीय जहाज पर हमले की खबर सामने आई है. जिसका विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है. विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को खारिज करते हुए उन्हें 'झूठा' बताया है. विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इस बारे में जानकारी दी.
शुक्रवार रात जहाज पर हमले की आई थी खबर
बता दें कि कई अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले तेल और रसायन टैंकर एमटी लियाकी फ्रीडम को शुक्रवार रात ओमान की खाड़ी में तब निशाना बनाया गया जब उसने वीएचएफ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) पर प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया. इन रिपोर्टों में दावा किया गया कि टैंकर में कई भारतीय सवार थे. इनमें से कई के मारे जाने की आशंका जताई गई. हालांकि, अब भारतीय सरकार ने इन रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा है कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं.
विदेश मंत्रालय ने किया हमले की खबरों का खंडन
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, "हमने लियाकी फ्रीडम के मास्टर से बात की है, जिन्होंने पुष्टि की है कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और रिपोर्ट की गई जानकारी झूठी है." इससे पहले वैश्विक स्तर पर नाविकों का प्रतिनिधित्व करने वाले फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने भी हमले की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया और कहा कि एमटी लियाकी फ्रीडम के चालक दल ने पुष्टि की है कि टैंकर को निशाना नहीं बनाया गया था.
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) June 13, 2026
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media. pic.twitter.com/Xn8I65LdKu
भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को बनाया निशाना
बता दें कि अब तक, ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया गया है. पहले जहाज पर 8 जून को हमला किया गया. तब अमेरिका ने एमटी मारिवेक्स को निशाना बनाया था. ये पलाऊ ध्वज वाला एक टैंकर था जिसमें 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, जिन्हें ओमान के अधिकारियों द्वारा सुरक्षित निकाल लिया गया. इसके बाद 10 जून को, एमटी सेट्टेबेलो, पलाऊ ध्वज वाले एक अन्य टैंकर को निशाना बनाया गया, जिसमें 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे. इस हमले में तीन नाविकों की मौत हो गई.
भारत ने जताया कड़ा विरोध
जबकि उसके अगले दिन यानी 11 जून को, एमटी जलवीर, गिनी-बिसाऊ ध्वज वाले एक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिसमें 20 भारतीय नाविक सवार थे, लेकिन चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया गया. भारत ने इन हमलों पर कड़ा विरोध जताया है. उसके बाद भारत ने अमेरिकी उप मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को दो बार तलब किया है. एक बयान में, भारत ने कहा है कि ऐसे हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और जहाजरानी मार्ग स्वतंत्र और खुले रहने चाहिए.
पृथ्वी की कक्षा में बृहस्पति का चांद 'यूरोपा' आ जाए तो क्या होगा? जानें क्या है 'यूरोपा क्लिपर' मिशन
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। यह सोचने में ही रोमांच होता है कि अगर बृहस्पति का बर्फीला चंद्रमा यूरोपा अचानक पृथ्वी की कक्षा में आ जाए तो आसमान कैसा दिखेगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से दिलचस्प जानकारी देता है।
नासा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर यूरोपा की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए दिलचस्प जानकारी दी। एजेंसी के मुताबिक, ऐसी स्थिति में यूरोपा रात के आकाश में हमारे चंद्रमा से करीब पांच गुना अधिक चमकदार नजर आएगा। इसकी वजह इसकी बेहद चमकीली बर्फीली सतह है। यही कारण है कि यूरोपा वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अब नासा का यूरोपा क्लिपर मिशन इस रहस्यमयी दुनिया के कई सवालों के जवाब तलाशने के लिए रवाना हो चुका है।
नासा ने हाल ही में यूरोपा के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बृहस्पति का चौथा सबसे बड़ा चंद्रमा है। आकार के लिहाज से यह पृथ्वी के चंद्रमा का लगभग 90 प्रतिशत है, लेकिन इसकी बर्फ से ढकी सतह सूर्य के प्रकाश को अधिक परावर्तित करती है। यही वजह है कि अगर यह पृथ्वी के आसपास होता तो इसकी चमक काफी ज्यादा दिखाई देती।
वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी दिलचस्पी यूरोपा की सतह के नीचे मौजूद विशाल महासागर को लेकर है। माना जाता है कि मोटी बर्फ की परत के नीचे तरल पानी का एक विशाल समुद्र मौजूद है। पानी को जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक माना जाता है, इसलिए वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि क्या वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।
इसी उद्देश्य से नासा ने यूरोपा क्लिपर मिशन तैयार किया है। यह पहला ऐसा मिशन है जिसे विशेष रूप से यूरोपा का विस्तृत अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्पेस क्राफ्ट को बृहस्पति और उसके चंद्रमा की संरचना, बर्फीली सतह, महासागर और संभावित रहने योग्य वातावरण की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
यूरोपा क्लिपर को बृहस्पति तक पहुंचने के लिए लगभग 2.9 अरब किलोमीटर की यात्रा करनी होगी। मिशन अप्रैल 2030 में अपने गंतव्य तक पहुंचेगा। इसके बाद यह बृहस्पति की परिक्रमा करते हुए यूरोपा के करीब 49 बार फ्लाईबाई करेगा। हर बार इसके वैज्ञानिक उपकरण सक्रिय होकर महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएंगे।
स्पेस क्राफ्ट में नौ अल्ट्रा मॉडर्न वैज्ञानिक उपकरण और एक खास ग्रेविटी एक्सपेरिमेंट लगाया गया है। इनकी मदद से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या यूरोपा पर आज भी ऐसे हालात मौजूद हैं, जहां जीवन विकसित हो सकता है। यदि इस मिशन से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो यह पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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