मालदीव में आई मुसीबत, फिर संकटमोचक बना भारत; भेजीं खसरे की वैक्सीन और टन भर दवाएं
मालदीव में खसरे के बढ़ते मामलों के बीच भारत ने 'Neighbourhood First' नीति के तहत 20,000 MR वैक्सीन और 3 टन मेडिकल खेप भेजी है। पूरी खबर पढ़ें।
Pentagon UFO Files: अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों में दावा, 1968 में लद्दाख और सिक्किम में दिखे थे यूएफओ!
दुनियाभर में उड़नतश्तरियों और परग्रही जीवन को लेकर समय-समय पर कई दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के गोपनीय दस्तावेजों से बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए डीक्लासिफाइड यूएफओ दस्तावेजों में भारत के लद्दाख और सिक्किम सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्रों में फरवरी और मार्च 1968 के दौरान कई रहस्यमयी उड़ती वस्तुओं यानी अनआइडेंटिफाइड एनामल्स फेनोमेना (यूएपी) के देखे जाने का विस्तृत जिक्र है।
पेंटागन द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में केंद्रीय खुफिया एजेंसी की एक विशेष छह पन्नों की रिपोर्ट भी शामिल है, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप में पुरानी खगोलीय और सामरिक घटनाओं को लेकर एक नई सनसनी पैदा कर दी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर सार्वजनिक हुईं फाइलें
पेंटागन द्वारा शुक्रवार को जारी किया गया यह डेटा यूएफओ से जुड़ी फाइलों का तीसरा बड़ा सेट है, जिससे पहले दो सेट आठ मई और 22 मई को सार्वजनिक किए जा चुके हैं। ये तमाम गोपनीय दस्तावेज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीधे आदेश पर पुराने "अनआइडेंटिफाइड एनामल्स फेनोमेना" (यूएपी) रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक मुहिम का हिस्सा हैं।
इस नए सेट में एफबीआई, सीआईए और पेंटागन की कुल 72 गोपनीय फाइलें शामिल की गई हैं, जिनमें 1940 के दशक से लेकर हाल के वर्षों तक की रहस्यमयी घटनाओं से जुड़े लिखित चश्मदीद गवाहों के बयान, वास्तविक वीडियो फुटेज, तस्वीरें और उच्चस्तरीय इंटेलिजेंस रिपोर्ट दर्ज हैं।
लद्दाख और सिक्किम के आसमान में सफेद-लाल रोशनी और जोरदार धमाकों का इतिहास
सीआईए की रिपोर्ट के अनुसार, 19 फरवरी 1968 को उत्तर सिक्किम के लाचुंग, लाचेन, चांगु, मुगुथांग और चोल्हामू जैसे दुर्गम इलाकों में स्थानीय नागरिकों ने एक विशाल रहस्यमयी उड़ती हुई वस्तु को उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ते देखा था। इस अज्ञात वस्तु के पीछे से इतनी तीव्र और चमकदार रोशनी निकल रही थी कि आसपास का पूरा इलाका दोपहर की तरह रोशन हो गया था और इसके कुछ ही देर बाद आसमान में एक भयंकर गरज जैसी आवाज सुनी गई थी।
इसके ठीक बाद मार्च 1968 में लद्दाख क्षेत्र में भी ऐसी ही कई डरावनी घटनाएं दर्ज की गईं, जहां चार मार्च 1968 को चांग ला, फुक्चे और कोयुल क्षेत्रों में लोगों ने पूर्व से पश्चिम की ओर सफेद रोशनी में एक उड़ती वस्तु देखी, जिसके बाद दो जोरदार धमाके सुने गए और आसमान में लाल रोशनी के साथ सफेद धुआं छा गया। उसी तरह अने ला क्षेत्र और डेमचोक में भी रॉकेट जैसी आकृति वाली वस्तु 25,000 फीट की ऊंचाई पर धुआं छोड़ते हुए गोलाकार रास्ते में घूमती देखी गई थी।
नेपाल के पोखरा में मिला था धातु का डिस्क और एफबीआई फाइलों में दर्ज गवाहियां
भारत के साथ-साथ इन खुफिया फाइलों में पड़ोसी देश नेपाल के कास्की क्षेत्र की भी एक बेहद सनसनीखेज घटना का ब्यौरा दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 मार्च 1968 को नेपाल के आसमान में उत्तर से दक्षिण की ओर बहुत तेजी से एक अत्यधिक चमकदार वस्तु गुजरी थी, जो हवा में आगे बढ़ते हुए बीच-बीच में तेज फ्लैश मार रही थी और उससे डरावनी आवाजें आ रही थीं।
बाद में पोखरा के पास बाल्टिचौर नामक स्थान पर एक क्रेटर के भीतर धातु से बना एक बहुत बड़ा डिस्क के आकार का ऑब्जेक्ट बरामद हुआ था, जिसकी ऊंचाई लगभग चार फीट और आधार छह फीट मापा गया था।
इसके अलावा, दस्तावेजों की एक अन्य फाइल में एफबीआई द्वारा दो आम लोगों से की गई बातचीत का भी विवरण है, जिन्होंने अपने घर के पिछले हिस्से में तीन फीट चौड़े एक लाल चमकदार गोले के बीच बास्केटबाल के आकार का सूरज जैसा दहकता हुआ हिस्सा देखने का दावा किया था।
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