US Iran Peace Deal: दो चरणों में होगा अमेरिका-ईरान समझौता, पहले चरण से परमाणु मुद्दा बाहर! टिकी दुनिया की नजरें
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी गंभीर सैन्य संघर्ष और तनाव का कूटनीतिक समाधान खोजने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें आखिरकार रंग लाती नजर आ रही हैं। वैश्विक शांति की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक और व्यावहारिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस बहुप्रतीक्षित समझौते के अंतर्गत तेहरान के परमाणु कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों में व्यापक राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान सामरिक स्थिति समेत कई अत्यंत संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया जा रहा है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस पूरे समझौते को दो महत्वपूर्ण चरणों में लागू करने की तैयारी चल रही है।
दो चरणों में लागू होगा शांति समझौता और अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की पहली शर्त
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित इस व्यवस्था को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए इसे दो चरणों में विभाजित किया गया है। उन्होंने बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि प्रारंभिक चरण के तहत फिलहाल परमाणु मुद्दों पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं की गई है और इसे पूर्ण रूप से दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है। संवर्धित परमाणु सामग्री को लेकर ईरान की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है कि अगर भविष्य में इसे कम करने की कोई प्रक्रिया शुरू होगी, तो वह केवल ईरान की भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही संपन्न होगी, किसी अन्य देश में नहीं।
अरागची ने जोर देकर कहा कि इस पूरे शांति समझौते में ईरान की सबसे पहली और मुख्य शर्त अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाना है, और यदि समझौते के इन बुनियादी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, तो तेहरान अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर देगा।
होर्मुज में सेवा शुल्क, फ्रीज संपत्ति की वापसी और हिज्बुल्ला का खुला समर्थन
समझौते के वित्तीय और रणनीतिक पहलुओं को सामने रखते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से पारंपरिक टोल वसूलना तो संभव नहीं है, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों से एक निश्चित सेवा शुल्क अवश्य लिया जाएगा।
इस सेवा शुल्क के माध्यम से होने वाली आय में ईरान को मुआवजा देने की विशेष योजना भी शामिल की गई है। इसके साथ ही दो पृष्ठों के इस प्रारंभिक समझौते के मसौदे के अनुसार, ईरान की अमेरिका या अन्य देशों द्वारा जब्त की गई कोई भी संपत्ति भविष्य में फ्रीज नहीं रखी जा सकेगी और उसे तुरंत अवमुक्त करना होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते में वाशिंगटन की ओर से तेहरान को एक लिखित आश्वासन देना होगा कि वह ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता का पूरा सम्मान करता है। अरागची ने हिज्बुल्ला के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे लेबनान में हिज्बुल्ला को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे और लेबनान में जारी युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर एक साथ होना भी इस शांति प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।
वादे पूरे करने के लिए अमेरिका को 60 दिन की मोहलत
ईरानी प्रशासन ने वाशिंगटन के प्रति गहरा अविश्वास व्यक्त किया है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि समय आने पर अपने वादे से मुकर जाना और संधि तोड़ना अमेरिकी नेताओं की पुरानी प्रकृति रही है, इसलिए वे इस समझौते को लागू करने के दौरान आने वाली बड़ी बाधाओं को लेकर पहले से सतर्क हैं।
उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए घोषणा की कि प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद वे अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताएं और जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए केवल 60 दिनों का सीमित समय देंगे, और यदि इस दौरान वाशिंगटन ने अपने वादे पूरे नहीं किए, तो युद्धविराम समाप्त हो जाएगा और स्थितियां फिर से पहले जैसी गंभीर हो सकती हैं।
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