Jaipur Mat Bazar: जयपुर का चटाई बाजार, लू को ठंडी हवा में बदलने वाले कारीगरों की कहानी
Jaipur Mat Bazar: जयपुर में गर्मी अपने चरम पर है. तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है और लोग गर्म हवाओं से बचने के लिए हर संभव उपाय तलाश रहे हैं. लेकिन एसी और आधुनिक कूलरों के इस दौर में भी शहर की सड़कों के किनारे सजा एक बाजार आज भी लोगों को प्राकृतिक ठंडक का अहसास करा रहा है. यह है जयपुर का पारंपरिक चटाई बाजार.
सड़कों पर सजी खुशबूदार पर्दो की दुकानें
न्यू सांगानेर रोड, टोंक रोड और आमेर रोड के कई हिस्सों में इन दिनों बांस की हरी चटाइयों, सींक के पर्दों और खस के खुशबूदार पर्दो की दुकानें सजी हुई हैं. यहां दूर-दराज के इलाकों से आए कारीगर महीनों तक सड़क किनारे डेरा डालकर काम करते हैं. कोई बांस को पतली कतरनों में बदल रहा है तो कोई हाथों से चटाई बुन रहा है. भीषण गर्मी के बीच यही मेहनत उनकी रोजी-रोटी का सहारा है.
खास बात यह है कि खस की जड़ों से बने पर्दों पर जब पानी डाला जाता है तो हवा के साथ एक भीनी-भीनी खुशबू पूरे माहौल को तरोताजा कर देती है. यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग इन पारंपरिक साधनों को आधुनिक विकल्पों से बेहतर मानते हैं.
रंग-बिरंग बाजार के पीछे छिपा है संघर्ष
लेकिन इस रंग-बिरंगे बाजार के पीछे संघर्ष की एक कहानी भी छिपी है. ये कारीगर अक्सर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों या राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों से मार्च-अप्रैल में जयपुर आते हैं और जुलाई तक यहीं रहते हैं. सड़क किनारे तिरपाल के नीचे रहने वाले कारीगरों के परिवार, उनके बच्चे और उनकी मेहनत इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं. बदलते समय के साथ चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन अपनी कला और विरासत को बचाए रखने का उनका जज्बा अब भी कायम है.
चटाई बेचने वाले लोगों को हमेशा यह डर लगा रहता है कि कहीं सरकार उन्हें अतिक्रमण बताकर हटा न दे. उनका कहना है कि वे सालभर नहीं, सिर्फ कुछ महीनों के लिए यहां आते हैं. किराए की जगह लेकर काम करेंगे तो खर्च बढ़ जाएगा और सामान नहीं बिकेगा. सड़क किनारे बैठने से लोग आसानी से खरीदारी कर लेते हैं.
सड़कों के किनारे हरी चादर की तरह बिछा यह बाज़ार भले ही किसी परीकथा जैसा खूबसूरत दिखता हो, लेकिन इसके पीछे इन कारीगरों की कड़ी मेहनत, पसीना और अपनी विरासत को बचाए रखने का संघर्ष छिपा है.
ग्रैंड स्लैम से गवर्नेंस तक: स्पोर्ट्स मिशन के साथ राजनीति में उतरे पेस ने बताया- क्या है उनका 'गेम प्लान'?
एनडीटीवी इग्नाइट समिट में लिएंडर पेस ने कहा कि अपने दिवंगत पिता के सपने को पूरा करने के लिए वो राजनीति में आए हैं. उनका लक्ष्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि देश में खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदलना है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
NDTV


















.jpg)




