अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान पर आरोप लगाया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन से हमला करने की नाकाम कोशिश की। इस कथित घटना का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने कहा ल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर उनका ड्रोन हमला पूरी तरह नाकाम रहा और यह हरकत बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया और न ही यह बताया कि वे किन जहाजों की बात कर रहे थे। खबर लिखे जाने तक ईरानी अधिकारियों ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इस इलाके में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों में दर्जनों भारतीय नाविकों वाले 3 तेल टैंकर फंस गए हैं। 8 जून को अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'मैरीवेक्स' को बेकार कर दिया, जिस पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। उन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।
दो दिन बाद, पलाऊ के झंडे वाले एक और टैंकर, 'सेटेबेलो' पर अमेरिकी हमला हुआ। इस जहाज़ पर 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से तीन की हमले में मौत हो गई। एक तीसरे टैंकर, 'जलवीर' पर भी हमला हुआ, जो गिनी-बिसाऊ के झंडे के साथ चल रहा था और जिस पर 20 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने चल रही बातचीत के बारे में गलत जानकारी लीक की है और कहा कि तेहरान के सार्वजनिक बयानों में उन शर्तों का ज़िक्र नहीं है जिन पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी। ट्रंप ने लिखा, ईरान ने 'फेक न्यूज़' को जो शर्तें बताई हैं, उनका लिखित रूप में तय हुई शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने संभावित समझौते के बारे में ईरान की टिप्पणियों की भी आलोचना की और कहा कि उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है और तेहरान पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए अपना संदेश खत्म किया और कहा, "उन्हें जल्द से जल्द अपनी हरकतें सुधार लेनी चाहिए!
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भारत ने अपनी नौसेना को अलर्ट कर दिया है। जिसके बाद अरब सागर से लेकर स्टेट ऑफ होर्मुज तक खतरनाक हलचल मची हुई है। भारत ने अपने लोगों की रक्षा के लिए ताबड़तोड़ एक्शन शुरू कर दिए हैं और यह सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब लगातार भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमलों की खबरें जो है वो सामने आ रही है। दरअसल पिछले एक हफ्ते के भीतर तीन अलग-अलग कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि तीनों जहाजों पर भारतीय क्रू मौजूद था। पहले हमले में 24 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद दूसरे हमले में 24 भारतीय क्रू मौजूद थे लेकिन तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इसके बाद बता दें कि तीसरे जहाज पर भी हमला हो जाता है। हालांकि इस बार सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। लगातार हो रहे इन हमलों के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के वरिष्ठ राजनिक को तलब किया और अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने यह साफ कहा है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे हमले तुरंत रुकने चाहिए।
क्या है भारत का एक्शन प्लान?
दरअसल दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों पर लगभग 3 लाख भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। ऑयल टैंकर, गैस कैरियर, कार्गो शिप और दूसरे बड़े जहाजों में भारतीय क्रू की संख्या बहुत ज्यादा है। और यही वजह है कि फारस की खाड़ी गल्फ ऑफ ओमान, अरब सागर और रेड सी में बढ़ता तनाव सीधे भारत के हजारों नागरिकों को प्रभावित कर सकता है। अब बात करते हैं हाईएस्ट अलर्ट की। क्या है एक्शन प्लान? इसका मतलब यह है कि भारत सरकार अपनी एजेंसियों को 24 घंटे निगरानी मोड में रखेगी। भारतीय जहाजों की लगातार यहां पर ट्रैकिंग की जाएगी। किसी भी हमले की स्थिति में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा। मेडिकल इवाकुएशन, डिप्लोमेटिक हस्तक्षेप और नौसैनिक सहायता के लिए एजेंसियों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। यानी कि अलर्ट पूरा है।
अब भारतीय नौसेना क्या कर सकती है?
भारतीय नौसेना समुद्री निगरानी बढ़ा सकती है। वॉरशिप, ड्रोन, सेटेलाइट और मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के जरिए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर भारतीय जहाजों को एक्सक भी किया जा सकता है। पहले भी आपको बता दें कि ऑपरेशन संकल्प और एंटी पाइरेसी मिशनों के दौरान भारतीय नौसेना इसी तरह के भारतीय हितों की सुरक्षा पहले भी कर चुकी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कमर्शियल जहाजों के पास खुद की कोई सैन्य सुरक्षा नहीं होती। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों पर भरोसा करके चलते हैं। ऐसे में किसी भी मिसाइल हमले का सबसे बड़ा खतरा जहाज पर मौजूद नागरिक क्रू होता है। फिलहाल भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसके नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई भी और किसी भी तरीके का समझौता नहीं होगा। इसलिए समुद्र में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना और सरकार दोनों हाई अलर्ट मोड में आ चुके हैं।
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