59 साल बाद एक सीध में गुरु, बुध और शुक्र, केवल 'ऑप्टिकल इल्यूजन' या उच्च ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संकेत
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। 59 साल बाद 11 जून से 15 जून के बीच ब्रह्मांड के नौ ग्रहों में से तीन बृहस्पति (गुरु), बुध और शुक्र एक सीध में हैं। यह खगोलीय घटना अपने आप में रोमांचक स्थिति है। इसकी खूबसूरती इतनी है कि इसे देखने को वैज्ञानिक बेताब रहते हैं। इस दुर्लभ खगोलीय घटना के गवाह बनने के लिए करोड़ों लोग उत्साहित रहते हैं। शुक्र, बुध और बृहस्पति सूरज के चारों ओर अपनी-अपनी कक्षाओं में एक दूसरे से लाखों मील दूर हैं। इसमें से शुक्र और बृहस्पति बेहद चमकीले ग्रह हैं। ऐसे में इन्हें तो देखा जा सकता है, लेकिन बुध बाकी दो ग्रहों की तुलना में काफी कम चमकीला होता है, ऐसे में इसे देखना थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि यह क्षितिज के पास नीचे होता है।
इस दुर्लभ खगोलीय घटना को प्लैनेटरी एलाइनमेंट कहा जाता है। कई बार इसे नंगी आंखों से तो कई बार दूरबीन के सहारे देखा जा सकता है। वैसे वैज्ञानिक इस दुर्लभ खगोलीय संयोग को केवल दृष्टि भ्रम या ऑप्टिकल इल्यूजन मानते हैं।
माना जाता है कि इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं। वहीं सनातन वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह समय ध्यान, साधना और सकारात्मक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
पृथ्वी से देखने पर यह खगोलीय स्थिति जिसमें बृहस्पति, शुक्र और बुध एक सीध में दिख सकते हैं, जब वे लगभग एक ही एक्लिप्टिक लोंगिट्यूड पर हों (इसे कंजंक्शन या युति कहते हैं) या एक ही राशि/आर्क में एक-दूसरे के करीब हों तो भी ऐसा होता है। खगोलीय दृष्टि से यह पृथ्वी से दिखने वाला कंजंक्शन या ग्रहों का एक-दूसरे के पास होना है। वहीं ज्योतिष के नजरिए से इसे उनके मूल गुणों के आपसी मेल के तौर पर देखा जाता है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति विस्तार, अर्थ, आशावाद, अवसर प्रदान करने वाला है। जबकि शुक्र मूल्य, रिश्ते, सौंदर्यबोध, आकर्षण, सामंजस्य, वित्त प्रदाता माना गया है। इसके साथ ही ग्रहों का राजा बुध विचार, संचार, व्यापार, सूचना का आदान-प्रदान, छोटी यात्राएं दिलाने वाला है।
ब्रह्मांड के नौ ग्रहों में जहां बुध को राजकुमार, गुरु को देवताओं के गुरु और शुक्र को दैत्यों के गुरु के तौर पर जाना जाता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में ये तीनों ही ग्रह जातक के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कारक माने गए हैं। अगर किसी भी जातक की कुंडली में इनमें से एक, दो या तीनों ग्रह शुभ हों तो वैसा जातक समाज में राजाओं की तरह की जिंदगी जीता है।
जब किसी इंसान की कुंडली में गुरु मजबूत हो तो उसे जीवन में सही मार्गदर्शन, बेहतर शिक्षा, अच्छे अवसर और सामाजिक मान-सम्मान मिलता है। वहीं शुक्र ग्रह मजबूत हो तो उसे जीवन में आकर्षण, आर्थिक समृद्धि, सुखद वैवाहिक जीवन और सांसारिक सुख मिलते हैं। जबकि कुंडली में बुध ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो वह व्यक्ति बहुत ही समझदार, तर्क करने में कुशल, अच्छा विश्लेषक होता है।
वैसे ज्योतिष के अनुसार किसी जातक की कुंडली में जब बुध, शुक्र और बृहस्पति एक ही घर में एक साथ होते हैं, तो सरस्वती योग बनता है। यह योग व्यक्ति को अच्छी बुद्धि और कला (जैसे कविता, संगीत, नृत्य) और ज्ञान-सीखने से जुड़ी चीजों के प्रति गहरा लगाव देता है। ये तीनों ग्रह आपस में बहुत अच्छे दोस्त नहीं हैं, लेकिन जब ये एक साथ आते हैं, तो शुभ फल देते हैं। इस योग वाले व्यक्ति को खुशहाल परिवार, अच्छा जीवनसाथी और लंबी उम्र मिलती है। वैसे बुध की सभी ग्रहों के साथ अच्छी बनती है। ऐसे वह जिस ग्रह के साथ कुंडली में शुभ होकर बैठते हैं, उसके प्रभाव को बढ़ा देते हैं। यानी यह एक बहुत ही सकारात्मक योग है जो व्यक्ति को अच्छे गुण, कलात्मक बुद्धि, ज्ञान और खुशहाल परिवार के साथ लंबी उम्र का आशीर्वाद देता है।
ज्योतिष शास्त्र की मानें तो शुक्र, गुरु, बुध तीनों ही नैसर्गिक रूप से अत्यंत शुभ ग्रह हैं, इनका संबंध कुंडली में शुभ फल देने वाला ही होता है, चाहे यह ग्रह किसी भी लग्न में एक साथ संबंध बनाएं। हालांकि, लग्न के अनुसार इनका संबंध कम या ज्यादा शुभ प्रभावशाली होता है। शुक्र, बुध, गुरु में से यदि कोई अशुभ भाव का स्वामी भी हो तब भी ज्यादा दिक्कत नहीं देते, सिर्फ इतना करते हैं कि शुभ फल आसानी से नहीं देते हैं, कुछ संघर्ष जरूर कराते हैं।
ऐसे में इस बार 4 दिन जो विशेष खगोलीय घटना जारी है। इसमें आसमान में बुध, शुक्र और गुरु ग्रह का प्लैनेट परेड दिख रहा है, जो अपने आप में एक अद्भुत नजारा है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र के जानकारों की मानें तो इससे मेष समेत 5 राशिवालों के करियर में उन्नति हो सकती है, वहीं धन लाभ का योग भी बनेगा।
--आईएएनएस
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जयपुर में कंगना रनौत ने सीएम भजनलाल संग देखी फिल्म:एक्ट्रेस बोलीं- यह मेरे लिए खास दिन; 200 से ज्यादा नर्सेज पहुंचीं फिल्म देखने
बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत शुक्रवार शाम जयपुर पहुंचीं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ अपनी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुईं। शहर के ईपी मिराज सिनेमाघर में आयोजित इस स्पेशल स्क्रीनिंग में राजस्थान सरकार के कई मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे। कंगना ने कहा- मेरी पूरी टीम के साथ यहां हूं। सीएम और उनकी टीम यहां आई है, नर्सिंग स्टूडेट्स आए हैं। यह मेरे लिए खास दिन है। मैं चाहती हूं कि आज मेरी फिल्म बोले। यह अनसंग हीरो की कहानी है, जो इस देश के असली हीरो हैं। मै आज यहां ऐसे ही अनसंग हीरोज को सम्मानित करेंगे। सीएम ने कहा- जो सब कुछ छोड़कर राष्ट्र को समर्पित है, उनकी कहानी लेकर कंगना जी आई हैं। कंगना जी ने राष्ट्र और समाज के प्रति काम करने वालों पर फिल्म बनाई है, उसके लिए इनका धन्यवाद देना चाहता हूं। हम सभी राष्ट्र प्रथम को मानने वाले लोग हैं। कई लोगों ने गुमनाम रहकर देश की सेवा की है। कोरोना के वक्त भी ऐसे ही गुमनाम लोगों ने देश की सेवा की है। यह फिल्म काफी कुछ सिखाने वाली साबित होगी। बता दें कि कंगना रनौत शुक्रवार सुबह जोधपुर से सड़क मार्ग के जरिए जयपुर पहुंचीं। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ समय रामबाग पैलेस में आराम किया। शाम को वे सीधे ईपी मिराज सिनेमाघर पहुंचीं, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस मौके पर फिल्म को देखने के लिए जयपुर और आसपास के क्षेत्रों से 200 से अधिक नर्सों को आमंत्रित किया गया था। फिल्म में नर्सों के जीवन, उनके संघर्ष और समाज में उनकी भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसलिए यह स्क्रीनिंग उनके लिए भी विशेष महत्व रखती थी। 26/11 हमले की अनकही कहानी को सामने लाती है फिल्म फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ साल 2008 में हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमलों पर आधारित है। यह फिल्म केवल आतंकी हमलों की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन लोगों के जीवन को भी सामने लाती है, जो इस त्रासदी के दौरान और उसके बाद चुपचाप अपने कर्तव्यों को निभाते रहे। फिल्म का पहला हिस्सा नर्सों के जीवन और उनके संघर्षों पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सों को अक्सर वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसकी वे हकदार होती हैं। मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटी रहने वाली नर्सों का योगदान कई बार डॉक्टरों की चमक के पीछे दब जाता है, जबकि चिकित्सा व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। समाज की अनदेखी सच्चाई को उजागर करती है फिल्म फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि नर्सिंग पेशे से जुड़ी महिलाओं को व्यक्तिगत जीवन में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। परिवार और समाज में सम्मान की कमी, कठिन कार्य परिस्थितियां और विवाह जैसे सामाजिक पहलुओं में आने वाली बाधाएं फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। निर्देशक मनोज तापड़िया ने बताया कि फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों की आवाज बनना है, जिनके संघर्ष अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनकी भूमिका को सम्मान मिलना चाहिए। कलाकारों ने निभाए प्रभावशाली किरदार फिल्म में कंगना रनौत के अलावा गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अर्जुन बेर्डे, जाहिद खान और सुहिता थट्टे ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को संवेदनशीलता और प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। स्क्रीनिंग के बाद उपस्थित दर्शकों और नर्सिंग समुदाय से जुड़े लोगों ने फिल्म की सराहना की। उनका कहना था कि यह फिल्म नर्सों के जीवन के उन पहलुओं को सामने लाती है, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों का योगदान अमूल्य है। ऐसी फिल्में समाज को उनके प्रति संवेदनशील बनाने का कार्य करती हैं। कंगना रनौत ने भी दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फिल्म उन अनसुने नायकों को समर्पित है, जो हर परिस्थिति में मानवता की सेवा में जुटे रहते हैं।



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