Explainer: भारत में क्यों फंसे 5 लाख से ज्यादा घरों के पजेशन, जानें किस शहर में बड़ा संकट, आगे क्या होगा?
Explainer: देश के रियल एस्टेट बाजार में इस साल रिकॉर्ड संख्या में घरों की डिलीवरी की उम्मीद थी. लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर ने इस उम्मीद को बड़ा झटका दिया है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत के सात प्रमुख शहरों में 5.4 लाख से अधिक फ्लैटों का पजेशन प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर हजारों किलोमीटर दूर चल रहा संघर्ष भारतीय रियल एस्टेट बाजार को कैसे प्रभावित कर सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं.
क्या कहती है रिपोर्ट?
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक (Anarock) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2023 के बीच लॉन्च हुए अधिकांश आवासीय प्रोजेक्ट अब निर्माण के अंतिम चरण में हैं. इन परियोजनाओं की डिलीवरी 2026 में बड़े पैमाने पर होनी थी.
हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, शिपिंग लागत में वृद्धि और निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लगभग 5.4 लाख घरों की समय पर डिलीवरी पर खतरा मंडरा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक अस्थिर बने रहते हैं तो निर्माण लागत और समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
भारत के किन शहरों पर सबसे ज्यादा असर?
रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि सबसे बड़ा दबाव मुंबई और पुणे पर है...
- मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लगभग 2,07,300 घरों की डिलीवरी प्रस्तावित है.
- पुणे में करीब 1,00,300 घरों का पजेशन होना है.
- बेंगलुरु में 69,000 फ्लैट प्रभावित हो सकते हैं.
- हैदराबाद में 63,700 घर जोखिम की श्रेणी में हैं.
- चेन्नई में 35,600 आवासीय इकाइयों पर असर पड़ सकता है.
- इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर और कोलकाता भी इस चुनौती से अछूते नहीं हैं.
केवल मुंबई और पुणे ही देशभर में प्रस्तावित कुल डिलीवरी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. इसलिए इन दोनों बाजारों में किसी भी प्रकार की देरी का राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव दिखाई दे सकता है.
मध्य पूर्व का तनाव भारत के रियल एस्टेट को कैसे प्रभावित करता है?
पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है कि विदेश में चल रहा संघर्ष भारतीय घर खरीदारों को कैसे प्रभावित कर सकता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि आधुनिक रियल एस्टेट पूरी तरह वैश्विक सप्लाई नेटवर्क पर निर्भर है.
निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण सामग्रियां और कच्चा माल अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े होते हैं. जब किसी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो....
- समुद्री परिवहन महंगा हो जाता है.
- ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं.
- कंटेनर और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि होती है.
- स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतें प्रभावित होती हैं.
- प्रोजेक्ट की कुल लागत बढ़ जाती है.
इन सभी कारणों से निर्माण कार्य की गति धीमी पड़ सकती है और पजेशन में देरी हो सकती है.
क्या घर खरीदारों को चिंता करनी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह कोविड-19 महामारी जैसी गंभीर नहीं है.
कोरोना काल में निर्माण गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई थीं. मजदूरों का पलायन हुआ था और सप्लाई चेन लगभग टूट गई थी. इसके विपरीत वर्तमान संकट मुख्य रूप से लागत और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा हुआ है.
फिर भी यदि तनाव लंबा खिंचता है तो...
- निर्माण लागत बढ़ सकती है.
- प्रोजेक्ट पूरा होने में अतिरिक्त समय लग सकता है.
- कुछ डेवलपर्स वित्तीय दबाव में आ सकते हैं.
- खरीदारों को पजेशन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है.
- कोरोना काल से क्या सबक मिला?
एनारॉक के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में सात प्रमुख शहरों में लगभग 4.66 लाख घरों की डिलीवरी का लक्ष्य था. लेकिन महामारी और लॉकडाउन के कारण केवल 2.14 लाख घरों की ही डिलीवरी हो सकी थी.
यानी निर्धारित लक्ष्य का मात्र 46 प्रतिशत ही पूरा हो पाया था. इसी अनुभव के कारण बाजार विशेषज्ञ मौजूदा हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.
फिर भी राहत की बात क्या है?
सभी चुनौतियों के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं. सबसे बड़ी राहत यह है कि आवासीय संपत्तियों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. पिछले कुछ वर्षों में घर खरीदने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है और डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति भी पहले की तुलना में बेहतर मानी जा रही है.
इसके अलावा अधिकांश बड़े डेवलपर्स के पास पर्याप्त फंडिंग और संसाधन मौजूद हैं, जिससे वे अस्थायी वैश्विक झटकों का सामना करने में सक्षम हैं.
आगे क्या हो सकता है?
रियल एस्टेट सेक्टर की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व के हालात पर निर्भर करेगी. यदि तनाव जल्द कम हो जाता है तो परियोजनाओं की डिलीवरी पर सीमित असर पड़ेगा. लेकिन अगर वैश्विक व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना रहता है तो निर्माण क्षेत्र की लागत और समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
फिलहाल लाखों घर खरीदारों और डेवलपर्स की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर टिकी हुई है. क्योंकि अब यह सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि भारत के रियल एस्टेट बाजार और लाखों परिवारों के सपनों से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है.
फिलहाल सिर्फ वेट एंड वॉच
ऐसे में अगर आप भी इस वक्त घर लेने या फिर पजेशन को लेकर परेशान हो रहे हैं तो आपको बता दें कि कुछ वक्त इंतजार करना ही बेहतर है. वैसे भी अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने के हालात बनते दिख रहे हैं. सेंसेक्स में इसी सूचना के चलते बड़ा उछाल देखने को मिला है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एक बार रियल एस्टेट के क्षेत्र में बहार देखी जा सकती है.
हालांकि कुछ इलाकों में अब भी रियल एस्टेट ठीक गति से आगे बढ़ रहा है. जैसे यमुना एक्सप्रेस वे पर जेवर एयरपोर्ट बनने और स्पोर्ट्सस कॉम्प्लेक्स के साथ फिल्म सिटी की तैयारियों ने इस क्षेत्र में न सिर्फ प्रॉपर्टी के रेट में कई गुना बढ़ोतरी की है बल्कि कंस्ट्रक्शन के काम में भी तेजी देखने को मिली है. कुल मिलाकार फिलहाल स्थिति वेट एंड वॉच की रहनी चाहिए. फिर लोग अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारों की सलाह लेकर कदम उठा सकते हैं.
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Air India Crash: एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 से जुड़े हादसे की जांच पर AAIB का अंतरिम बयान; एक साल बाद जानें क्या कहा?
Air India Crash: आज एयर इंडिया की फ़्लाइट AI-171 (बोइंग 787-8 विमान) से जुड़े दुखद हादसे को एक साल पूरा हो गया है। यह फ़्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी और 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह हादसा हुआ था।
हादसे के एक साल पूरे होने पर AAIB ने क्या कहा?
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो उन सभी लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है जिनकी इस हादसे में जान गई। हम उन सभी लोगों के गहरे दुख और नुकसान को भी समझते हैं जो इस घटना से प्रभावित हुए हैं।
AAIB और ICAO एनेक्स 13 में बताए गए स्टैंडर्ड और सुझाए गए तरीकों के अनुसार जांच कर रही है। 12 जुलाई 2025 को तथ्यों पर आधारित एक शुरुआती रिपोर्ट जारी की गई थी। पिछले एक साल में, जांच टीम ने दुर्घटना से जुड़े सभी ज़रूरी तकनीकी, ऑपरेशनल, संगठनात्मक और मानवीय पहलुओं की व्यापक और गहन जांच की है।
इस काम में संबंधित संगठनों के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधियों, तकनीकी सलाहकारों और विषय-विशेषज्ञों का सहयोग मिला है। एयरक्राफ्ट सिस्टम, फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा, इंजन से जुड़े पुर्ज़ों, रखरखाव और ऑपरेशनल रिकॉर्ड, और जांच से जुड़े अन्य सबूतों की जांच और विश्लेषण में काफी प्रगति हुई है। इकट्ठा किए गए सबूतों और अलग-अलग जाँचों के नतीजों का अभी पूरी तरह और एक साथ विश्लेषण किया जा रहा है। जहाँ भी ज़रूरी समझा जाएगा, वहाँ और भी तकनीकी और विशेषज्ञ जाँचें की जाती रहेंगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि सभी नतीजों और निष्कर्षों को पुष्ट सबूतों और सही वैज्ञानिक विश्लेषण का आधार मिला हो।
AAIB एक गहन, स्वतंत्र, निष्पक्ष और सबूतों पर आधारित जाँच करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जाँच से जुड़ी सभी गतिविधियों और ICAO एनेक्स 13 के तहत ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और सलाह-मशविरे की प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी।
AAIB की अपील
दुर्घटना की जांच का एकमात्र मकसद सबक और सुरक्षा से जुड़ी सिफारिशों की पहचान करके एविएशन सुरक्षा को बेहतर बनाना है, न कि किसी पर दोष या ज़िम्मेदारी तय करना। इसलिए, AAIB सभी संबंधित पक्षों (जिनमें मीडिया और आम जनता भी शामिल है) से अपील करता है कि जब तक जांच चल रही हो, तब तक वे अटकलें लगाने या जल्दबाजी में किसी नतीजे पर पहुंचने से बचें।
दुर्घटना के हर पहलू की सावधानी से जांच की जाएगी
AAIB प्रोफेशनलिज़्म, पारदर्शिता और जांच की बारीकी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराता है। दुर्घटना के हर पहलू की बहुत सावधानी और लगन से जांच की जाएगी ताकि जांच के नतीजों और सुरक्षा से जुड़ी सिफारिशों पर सभी संबंधित पक्षों का भरोसा बना रहे और वे सिविल एविएशन की सुरक्षा को लगातार बेहतर बनाने में सार्थक योगदान दे सकें।
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