अमेरिका-ईरान जंग खत्म की खबरों से सेंसेक्स में आई रौनक, 1700 अंकों के उछाल के साथ हुआ बंद
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव कम होने के संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया. शुक्रवार को घरेलू बाजार ने कई सप्ताह की अनिश्चितता के बाद दमदार वापसी की और निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया. वैश्विक स्तर पर युद्ध की आशंकाएं कमजोर पड़ने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को नई ऊर्जा दी.
बाजार खुलते ही खरीदारी का जोर दिखाई दिया और निवेशकों ने बैंकिंग, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा से जुड़े शेयरों में जमकर पैसा लगाया. पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सकारात्मक माहौल बना रहा.
सेंसेक्स और निफ्टी ने भरी लंबी छलांग
सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स में करीब 1,700 अंकों की शानदार तेजी दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी भी 23,600 के स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा. यह पिछले दो महीनों में बाजार का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने भू-राजनीतिक जोखिम घटने को बड़े अवसर के रूप में देखा, जिसके कारण बाजार में चौतरफा खरीदारी हुई.
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद बनी बड़ी वजह
बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद रही. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. इससे मध्य पूर्व में युद्ध के खतरे कम होने की संभावना बनी और वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा.
भू-राजनीतिक तनाव कम होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दिखाई दिया, जहां एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला सहारा
भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत भरी खबर होती है. अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. इससे आयात बिल, महंगाई और चालू खाता घाटे को लेकर चिंताएं कम हुईं.
तेल की कीमतों में नरमी का फायदा विमानन, पेंट, सीमेंट और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों को मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते इन सेक्टरों के शेयरों में विशेष तेजी देखी गई.
रुपये की मजबूती और वैश्विक संकेत भी बने सहायक
बाजार को मजबूती देने में रुपये की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने और वैश्विक जोखिम कम होने से भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा. साथ ही एशियाई बाजारों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जिसका असर घरेलू निवेशकों के मनोबल पर पड़ा.
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी. यदि शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है और तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला कुछ समय और जारी रह सकता है.
फिलहाल, निवेशकों के लिए यह राहत की खबर है कि लंबे समय से जारी अनिश्चितता के बीच बाजार ने मजबूत वापसी की है और एक ही दिन में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बढ़ने से निवेशकों के चेहरे खिल उठे हैं.
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भारत के कृषि और जल क्षेत्र के डीपटेक इकोसिस्टम को स्टार्टअप्स के विस्तार के प्रयासों से मिल रही गति: नैसकॉम
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। आईटी इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था नैसकॉम (नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज) ने शुक्रवार को कहा कि भारत का कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र से जुड़ा डीपटेक इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसमें स्टार्टअप की बढ़ती संख्या अब पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक विस्तार और कारोबार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026 कार्यक्रम में इस रुझान को रेखांकित करते हुए नैसकॉम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु तकनीकों से संचालित नवाचार देश के कृषि और जल क्षेत्रों में चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्केलेबल समाधानों की तलाश कर रहे उद्यमों, निवेशकों और नीति निर्माताओं का तेजी से ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा कि कृषि और जल प्रबंधन ऐसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां डीपटेक तकनीकें आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा, भारत में ऐसे उद्यमियों की मजबूत आधारशिला मौजूद है, जो एआई, आईओटी, जैव प्रौद्योगिकी, मटेरियल साइंस, सेंसर तकनीक, ऑटोमेशन और जलवायु तकनीकों को मिलाकर नए समाधान विकसित कर रहे हैं।
संगीता गुप्ता ने कहा कि डीपटेक कॉन्फ्लुएंस के माध्यम से नैसकॉम स्टार्टअप्स को बेहतर बाजार पहुंच, उद्योगों के साथ जुड़ाव और तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के अवसर उपलब्ध करा रहा है।
इस कार्यक्रम में नैसकॉम डीपटेक क्लब के 20 सप्ताह के विकास कार्यक्रम डीटीसी एक्सेलेरेट से जुड़े 12 नवोन्मेषी स्टार्टअप्स ने अपने समाधान प्रस्तुत किए, जिसका उद्देश्य डीपटेक स्टार्टअप्स को पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर बड़े स्तर पर उद्योगों में लागू करने योग्य बनाना है।
डीपटेक कॉन्फ्लुएंस ने बाजार तक पहुंच, उद्योगों द्वारा तकनीक अपनाने, निवेश की तैयारी, पायलट परियोजनाओं को बड़े स्तर पर विस्तार देने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत का कृषि और जल क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, स्थिरता संबंधी चिंताओं, सीमित संसाधनों और उत्पादन क्षमता को बनाए रखने की बढ़ती जरूरत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कृषि तकनीक (एग्रीटेक) और जल तकनीक (वॉटरटेक) क्षेत्र में नवाचार तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कई स्टार्टअप्स अभी भी अपनी तकनीकों को पायलट स्तर से आगे बड़े पैमाने पर लागू करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
नैसकॉम ने कहा कि डीपटेक कॉन्फ्लुएंस का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। इसके तहत नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को उद्योगों, निवेशकों, सरकारी एजेंसियों और क्रियान्वयन भागीदारों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी तकनीकों का वास्तविक दुनिया में उपयोग और विस्तार संभव हो सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
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