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आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बनेंगे मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स आज, 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर लिस्ट होगी। गुरुवार को कंपनी ने अपने आईपीओ का फाइनल प्राइस 135 डॉलर तय कर दिया है। 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर हो रही इस लिस्टिंग के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं। सवाल-जवाब में समझते हैं आज की लिस्टिंग की पूरी एबीसीडी सवाल 1: आज होने जा रही स्पेसएक्स की लिस्टिंग इतनी ऐतिहासिक क्यों है? जवाब: स्पेसएक्स इस इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 75 बिलियन डॉलर यानी करीब 7.15 लाख करोड़ रुपए जुटा रही है। यह अकेला आईपीओ साल 2024 और 2025 में आए सभी अमेरिकी आईपीओ की कुल जुटाई रकम से भी ज्यादा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ है। सवाल 2: क्या इस लिस्टिंग से इलॉन मस्क दुनिया के पहले 'ट्रिलिनेयर' बन जाएंगे? जवाब: हां, इसकी पूरी संभावना है। फोर्ब्स के अनुसार इलॉन मस्क की नेटवर्थ 982 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹94 लाख करोड़ हैं। उनके पास स्पेसएक्स में करीब 866 बिलियन डॉलर के शेयर हैं। आज जैसे ही ट्रेडिंग शुरू होगी तो बाकी कंपनियों की वेल्थ मिलाकर मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹95 लाख करोड़ के पार पहुंच जाएगी। सवाल 3: एक ट्रिलियन डॉलर की रकम कितनी बड़ी होती है, इसे आम भाषा में कैसे समझें? जवाब: 1 ट्रिलियन डॉलर एक ऐसी रकम है जो दुनिया के अधिकांश देशों की जीडीपी से भी बड़ी है। दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं जिनकी जीडीपी इससे ज्यादा है। मस्क अकेले ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की कुल अर्थव्यवस्था से ज्यादा अमीर हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर घंटे 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.54 करोड़ रुपए भी खर्च करे, तो उसे 1 ट्रिलियन डॉलर खत्म करने में 114 साल से ज्यादा का समय लगेगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने तो मस्क को 'हमारे समय का एडिसन और आइंस्टीन' तक कह दिया है। सवाल 4: मार्केट एक्सपर्ट्स जिस 'इलॉन प्रीमियम' की बात कर रहे हैं, वो क्या है? जवाब: रेनेसां कैपिटल के सीनियर स्ट्रेटेजिस्ट मैट कैनेडी का कहना है कि ट्रेडिशनल फाइनेंस के नियम स्पेसएक्स पर लागू नहीं होते। जब कोई कंपनी पारंपरिक वित्तीय पैमानों जैसे मुनाफा या रेवेन्यू से परे जाकर सिर्फ अपने मालिक के विजन और साख के दम पर इतना बड़ा वैल्यूएशन पाती है, तो उसे बाजार की भाषा में 'इलॉन प्रीमियम' या 'मस्कोनॉमी' कहा जाता है। निवेशक उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके इस नए विजन पर आंख मूंदकर दांव लगा रहे हैं। सवाल 5: कंपनी में आम निवेशकों की भागीदारी और मस्क का कंट्रोल कैसा रहेगा? जवाब: कंपनी ने आम निवेशकों के लिए रिकॉर्ड 30% का कोटा था, जो करीब 22.5 बिलियन डॉलर बैठता है। जहां तक कंट्रोल की बात है, मस्क इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं और लिस्टिंग के बाद भी मेजॉरिटी वोटिंग राइट्स उन्हीं के पास रहेंगे। सवाल 6: बाजार के तकनीकी एक्सपर्ट्स को आज लिस्टिंग के समय किस बात का डर है? जवाब: आज मार्केट के सिस्टम का भी बड़ा टेस्ट होना है। जब 2012 में फेसबुक का बड़ा आईपीओ नैस्डैक पर आया था, तब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उसकी ओपनिंग में देरी हुई थी। चूंकि स्पेसएक्स का आईपीओ फेसबुक से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए वॉल स्ट्रीट की नजरें नैस्डैक के तकनीकी सिस्टम पर टिकी हैं कि वह इस लोड को कैसे संभालता है। सवाल 7: क्या स्पेसएक्स के मजबूत फाइनेंशियल्स इसके ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। यही सबसे बड़ा विवाद है। स्पेसएक्स ने पिछले साल लगभग 19 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू तो कमाया, लेकिन कंपनी ने अब तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है। रेटिंग एजेंसी 'मॉर्निंगस्टार' के विश्लेषकों ने साफ लिखा है कि कंपनी 'ओवरवैल्यूड' है और इसका सही वैल्यूएशन 780 बिलियन डॉलर होना चाहिए। सवाल 8: आज शाम भारतीय समय अनुसार लिस्टिंग कितने बजे होगी? जवाब: अमेरिकी बाजार नैस्डैक भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे (प्री-मार्केट) खुलेगा। भारी डिमांड के कारण शुरुआती कुछ घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रात 11:30 बजे के बाद इस पर नॉर्मल ट्रेडिंग और प्राइज मूवमेंट पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगेगा। स्पेसएक्स: रियूजेबल रॉकेट के जरिए स्पेस सेक्टर बदला साल 2002 में इलॉन मस्क ने स्पेस-एक्स कंपनी बनाई थी। स्पेस-एक्स ने तब इतिहास रचा था जब 31 मई 2020 को कंपनी ने दुनिया का पहला प्राइवेट ह्यूमन मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत दो एस्ट्रोनॉट -रॉबर्ट बेहेनकेन और डगलस हर्ले स्पेस गए थे। करीब 63 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद ये दोनों वापस धरती पर लौटे थे। मस्क की कंपनी ने रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी डेवलप कर सैटेलाइट लॉन्चिंग और दूसरे स्पेस मिशन्स को सस्ता बनाया है।

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छोटे शहरों में बड़ी तनख्वाह; 9.5% इंक्रीमेंट, मेट्रो से ज्यादा:रिपोर्ट के अनुसार- 2030 तक गैर-मेट्रो शहर कुल खपत में 50% से अधिक योगदान देंगे

दस साल पहले तक जो शहर सिर्फ ‘वॉल्यूम मार्केट’ माने जाते थे, आज वही वेतन वृद्धि की दौड़ में दिल्ली और मुंबई को पीछे छोड़ रहे हैं। टीमलीज की ‘जॉब्स एंड सैलरीज प्राइमर’ रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 में अहमदाबाद और विशाखापट्टनम में वेतन वृद्धि 9.5% रहने का अनुमान है। तुलना करें तो दिल्ली और मुंबई के लिए यह आंकड़ा 9.3-9.3% है। मतलब साफ है- इन दो मध्यम आकार के शहरों ने देश के दो बड़े ‘बिजनेस सेंटर्स’ को पीछे छोड़ दिया। नागपुर और जयपुर भी 9.3% वेतन वृद्धि के साथ दिल्ली की बराबरी कर रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे ठोस ढांचागत कारण हैं। इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उत्पादन और सरकार की ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ और अक्षय ऊर्जा को लेकर नीतियां शामिल हैं। कोयंबटूर, नागपुर और विशाखापट्टनम अब पूरी तरह औद्योगिक हब के रूप में उभर चुके हैं। टीमलीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यन का कहना है, ‘अब ग्रामीण और गैर-मेट्रो मार्केट सिर्फ वॉल्यूम (बिक्री) नहीं चाहते, वे क्वालिटी चाहते हैं। एंट्री-लेवल की कारें वापस आ गई हैं, हैचबैक बिक रही हैं और इलेक्ट्रिक दोपहिया गैर-मेट्रो शहरों में धड़ाधड़ बिक रहे हैं। कंपनियों को बस वहां सही टैलेंट चाहिए।’ 2030 तक गैर-मेट्रो शहर देश की कुल खपत में 50% से ज्यादा योगदान दे सकते हैं। यह अनुमान ‘कॉरपोरेट इंडिया’ की रणनीति भी बदल रहा है। सेक्टर की बात करें तो वेतन वृद्धि की अगुवाई अब आईटी या बैंकिंग सेक्टर नहीं, बल्कि ईवी और ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर कर रहे हैं। इनमें 10.2% इंक्रीमेंट का अनुमान है। फिनटेक 10% और हेल्थकेयर-फार्मा 9.7% के साथ पीछे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टरों में 2025-26 के लिए वृद्धि 9.4% रही। पश्चिम एशिया में युद्ध का साया भी नजर आ रहा है। इनपुट लागत बढ़ रही है और रुपया दबाव में है। बालासुब्रमण्यन कहते हैं कि अधिकांश इंक्रीमेंट बजट मार्च से पहले ही तय हो चुके थे, इसलिए युद्ध का पूरा असर अभी नहीं दिखा। अगर यह संघर्ष छह महीने और चला, तो भी ग्रोथ तो मिलेगी, पर उतनी नहीं जितना पहले अनुमान था।’ भोपाल, जयपुर, नागपुर जैसे टियर 2 शहरों में 9% से ज्यादा वेतन वृद्धि 23 सेक्टरों, 20 शहरों की 1,268 कंपनियों पर आधारित सर्वे के मुताबिक, चेन्नई, पुणे व हैदराबाद 9.7-9.6% वेतन वृद्धि के साथ मेट्रो में आगे हैं। अहमदाबाद, विशाखापट्टनम 9.5% ग्रोथ के साथ दिल्ली-मुंबई (9.3%) से ऊपर। नागपुर, जयपुर 9.3% के साथ दिल्ली की बराबरी कर रहे। वडोदरा-गुड़गांव 9.2%, कोयंबटूर 9.1%, भोपाल 9% के साथ मध्य क्रम में हैं। कोच्चि, लखनऊ, इंदौर, चंडीगढ़ और सूरत में 8.4-8.8% के बीच वेतन वृद्धि मिल रही।

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