नई तकनीक और प्रोसेसिंग से बढ़े किसानों की आय, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसानों से किया सीधा संवाद
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से खेती के पुराने तरीकों के साथ नई तकनीक, प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि फूड प्रोसेसिंग की ओर भी बढ़ें, क्योंकि अनाज के मुकाबले प्रोसेसिंग के बाद तैयार उत्पाद से ज्यादा आमदनी हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विदिशा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को बड़वानी से वर्चुअली संबोधित किया। वहीं बड़वानी में उन्होंने किसानों के बीच पहुंचकर उनसे खेती, सिंचाई, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं को लेकर सीधा संवाद किया।
किसानों को अब दिन में बिजली देने की तैयारी
बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। रासायनिक खाद के लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हुई है, इसलिए प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने किसानों से फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में आगे आने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों के अल्पावधि फसल ऋण की शर्तों में बदलाव किया गया है और 31 मार्च की ड्यू डेट हटाई गई है। किसानों को सिंचाई के लिए रात के बजाय दिन में बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। वहीं कवच योजना के जरिए डिफॉल्टर किसानों के ऋण खातों में सुधार किया जा रहा है।
ड्रोन से स्प्रे कर तीन लाख रुपये से ज्यादा कमाए
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विदिशा की ‘ड्रोन दीदी’ प्रभा वर्मा से वर्चुअली बातचीत की। प्रभा वर्मा ने बताया कि वे अब तक खेतों में 1160 स्प्रे कर चुकी हैं। एक स्प्रे के लिए वे 300 रुपये लेती हैं और इससे तीन लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं में हौसले की कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की है।
बड़वानी में किसानों से पूछा- नई तकनीक से कितना फायदा?
बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत किसानों से सीधी बातचीत की। किसानों ने उन्हें फसल उत्पादन, सिंचाई, खाद और दूसरी जरूरतों के साथ खेती में अपनाई जा रही नई तकनीकों के बारे में बताया।
इस दौरान बड़वानी में एचडी पद्धति से की जा रही कपास की खेती पर भी चर्चा हुई। किसानों ने बताया कि इस पद्धति में खाद की जरूरत अपेक्षाकृत कम पड़ती है और उत्पादन बढ़ने से फायदा भी ज्यादा हो रहा है। जिले में शुरुआती तौर पर करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इस पद्धति से कपास की खेती शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देने की बात कही, जिनसे किसानों की लागत कम हो और आमदनी बढ़ सके।
बड़वानी के करीब एक तिहाई हिस्से में कपास की खेती
संवाद के दौरान बताया गया कि बड़वानी जिले के कृषि क्षेत्र के करीब एक तिहाई हिस्से में कपास की खेती होती है। इसके अलावा जिले में बड़ी मात्रा में उद्यानिकी फसलें भी पैदा की जाती हैं।
ग्राम बोरलाई के किसान हरिराम राठौर ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं और उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा जरिया बन सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में गोशालाओं को भी अनुदान दिया जा रहा है। सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि वे अपनी समस्याएं और सुझाव खुलकर सरकार के सामने रखें। किसानों से मिले सुझावों और खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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