सिर काटने की कोशिश के बाद आयरलैंड-ब्रिटेन में भड़के दंगे:प्रदर्शनकारियों के निशाने पर प्रवासी, घर-दुकानें लूटीं; गाड़ियों में आग लगाई
आयरलैंड के बेलफास्ट में एक आयरिश व्यक्ति का सिर काटने की कोशिश के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन बुधवार को बड़े एंटी-इमिग्रेशन दंगों में बदल गया। आयरलैंड और ब्रिटेन में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटना सामने आई। बेलफास्ट और उसके आसपास के इलाकों में नकाबपोश भीड़ ने घरों, दुकानों, बसों और कारों को निशाना बनाया। बेलफास्ट के न्यूटाउनार्ड्स रोड पर कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया शैंकिल में दो दुकानें लूट ली गईं और एक अफ्रीकी प्रवासी की दुकान को आग के हवाले कर दिया गया। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर व स्कॉटलैंड के ग्लासगो में भी प्रवासी विरोधी प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई। वीडियो वायरल होते ही लोग ड़कों पर उतरे हिंसा की शुरुआत बेलफास्ट में चाकूबाजी की घटना के बाद हुई। सूडान के एक शरणार्थी का एक आयरिश व्यक्ति से विवाद हो गया था। इसी बीच हादी ने चाकू से उसका गला काटने की कोशिश की थी। हमले में 40 वर्षीय आयरिश व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। इस वारदात का वीडियो वायरल होते ही प्रदर्शन की अपीलें तेज हो गईं थीं। पुलिस के मुताबिक चाकूबाजी घटना का आरोपी हादी अलोदिद सूडान से पेरिस और फिर डबलिन आया था। 2023 में वह बेलफास्ट पहुंचा और शरण मांगी। उसे ब्रिटेन में 2028 तक रहने की अनुमति मिल गई थी। आयरलैंड में हुई हिंसा की 5 तस्वीरें... प्रवासी विरोधियों परहिंसा भड़काने के आरोप दक्षिणपंथी और प्रवासी विरोधियों ने सोशल मीडिया पर चाकूबाजी की घटना का वीडियो तेजी से फैलाया। कट्टरपंथी व प्रवासी-विरोधी टॉमी रॉबिनसन ने वीडियो शेयर करते हुए पूरे ब्रिटेन में लोगों से ‘सड़कों पर उतरने’ की अपील की थी। इसके बाद मास्क पहने हजारों लोगों की भीड़ सड़कों पर जमा हो गई। कई प्रवासियों ने घर छोड़ा,नमाज रोकनी पड़ी बेलफास्ट में नकाबपोशों ने कई घरों को निशाना बनाया है। कुछ जगह ‘विदेशियों को निकालो’ जैसे नारे भी लगाए। स्थानीय पादरी जैक मैकी ने बताया कि लोग सिर्फ प्रवासी होने के कारण घर छोड़ने को मजबूर हुए। सैंडी रो इलाके में सूडानी दुकानदारों ने दुकानें जल्द बंद कर दीं। बेलफास्ट इस्लामिक सेंटर ने शाम की नमाज रोक दी। इलॉन मस्क ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया दिग्गज कारोबारी इलॉन मस्क ने भी सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो शेयर करते हुए कहा- जोरदार प्रदर्शन से ही बदलाव आएगा। ब्रिटेन की कट्टरपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके ने घटना को प्रवास नीति का नतीजा बताते हुए वीजा प्रतिबंध की अपनी पार्टी की बात दोहराई। वहीं, सांसद क्लेयर हन्ना ने मस्क, रिफॉर्म यूके के चीफ नाइजल फराज व अन्य को हिंसा का जिम्मेदार ठहराया। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी मिसाइल हमले में 13 की मौत:इनमें 11 बच्चे; पाकिस्तान का दावा- 26 भारत समर्थित आतंकी मारे पाकिस्तान ने मंगलवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में मिसाइल हमले किए। अफगान तालिबान सरकार के मुताबिक इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा 14 महिलाएं घायल हुई हैं। पूरी खबर पढ़ें…
पेरेंटिंग- मेरी बेटी को लगता है, वो मोटी है:अपनी तुलना सोशल मीडिया वाली लड़कियों से करती है और दुखी होती है, उसे कैसे समझाऊं?
सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरी 14 साल की बेटी है। पिछले कुछ महीनों से मैं नोटिस कर रही हूं कि वह अपने लुक्स और बॉडी को लेकर काफी इनसिक्योर महसूस करने लगी है। कभी वह अपने वजन को लेकर परेशान रहती है, तो कभी अपनी स्किन या हाइट को लेकर। वह अक्सर अपनी तुलना सोशल मीडिया पर दिखने वाली लड़कियों से करती है और कई बार खुद को कमतर महसूस करती है। मुझे उसकी चिंता हो रही है। उसे कैसे समझाऊं कि असली खूबसूरती क्या होती है और उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ाऊं? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। किशोरावस्था यानी टीनएज वह समय है, जब बच्चे अपनी बॉडी, लुक्स और दूसरों की राय को लेकर सेंसिटिव होते हैं। प्यूबर्टी की एज यानी 13-18 साल की उम्र में तेजी से शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। इस उम्र में सोशल मीडिया ट्रेंड्स और दोस्तों से वैलिडेशन पाने की चाहत बढ़ती है। इसके कारण परफेक्ट दिखने का दबाव बनता है। ऐसे में अपने लुक्स को लेकर इनसिक्योर महसूस करना कॉमन है। हालांकि इसे सिर्फ एक फेज कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि लगातार नेगेटिव बॉडी इमेज बच्चे के आत्मविश्वास और मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। पहले समझिए, बॉडी इमेज क्या होती है? टीनएज में बॉडी इमेज को लेकर चिंता क्यों होती है? इस फेज में शरीर और भावनाओं दोनों में बदलाव आते हैं। इस दौरान बच्चे खुद को दूसरों की नजर से देखने लगते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनके लुक्स को जज कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर बच्चे हर समय ऐसे चेहरे देखते हैं, जो फिल्टर, मेकअप, एडिटिंग और कैमरा एंगल की मदद से ‘परफेक्ट’ बनाए जाते हैं। बच्चे असल जिंदगी और सोशल मीडिया के बीच फर्क नहीं कर पाते हैं। टीनएज में बॉडी इमेज को लेकर चिंता के पीछे कई अन्य वजहें भी हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सोशल मीडिया का बॉडी इमेज पर प्रभाव टीनएज बॉडी इमेज पर अब तक कई स्टडीज हो चुकी हैं, जो बताती हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट किशोर लड़कियों के आत्मविश्वास, मेंटल हेल्थ और खुद को देखने के नजरिए को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। आइए, अब इस समस्या के समाधान पर बात करते हैं- बेटी की भावनाओं को हल्के में न लें अक्सर माता-पिता अपनी टीनएज बेटी को समझाने के लिए तुरंत बोल देते हैं- हालांकि ऐसा कहने के पीछे प्यार होता है, लेकिन कई बार बेटी ये सोच सकती है कि उसकी भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसलिए सबसे पहले उसकी बात सुनिए। अगर वह कहती है कि उसे अपनी स्किन, वजन या हाइट पसंद नहीं है, तो तुरंत समझाने की बजाय पूछें कि- जब बच्चे अपनी बात खुलकर कह पाते हैं, तो उन्हें भावनात्मक रूप से सुरक्षा का अहसास होता है। सोशल मीडिया की ‘परफेक्ट दुनिया’ का सच समझाएं बेटी काे बताएं कि सोशल मीडिया पर हर कोई अपनी जिंदगी का ‘सबसे अच्छा हिस्सा’ दिखाता है। कोई अपनी परेशानियां और इनसिक्योरिटीज नहीं दिखाता। बच्चे यह नहीं समझ पाते कि- बेटी से खुलकर इस बारे में बात करें कि- सोशल मीडिया को रियल लाइफ मानने के संभावित खतरे ग्राफिक में देखिए- सिर्फ लुक्स की तारीफ न करें अगर बच्चों को हमेशा सिर्फ “तुम बहुत सुंदर लग रही हो” जैसे कॉम्प्लिमेंट मिलते हैं, तो वे अपनी पहचान को केवल लुक्स से जोड़ने लगते हैं। बेटी को यह समझाएं कि खूबसूरती सिर्फ चेहरे, रंग या शरीर तक सीमित नहीं होती। असली खूबसूरती में कई चीजें शामिल होती हैं- बच्ची को बताएं कि दुनिया में हर इंसान अलग है और यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है। इसके साथ ही आप बेटी की दूसरी खूबियों की तारीफ करें। जैसेकि- जब बच्ची समझती है कि उसकी वैल्यू सिर्फ चेहरे या बॉडी से तय नहीं होती, तब उसका आत्मविश्वास मजबूत होता है। घर का माहौल पॉजिटिव रखें बच्चे सिर्फ बातें नहीं सुनते, वे घर का माहौल भी महसूस करते हैं। अगर घर में बार-बार वजन, रंग, हाइट या लुक्स को लेकर बातें होती हैं, तो इसका असर बच्चों पर पड़ता है। उदाहरण के लिए- ऐसी बातें बच्चे के मन में गहराई तक बैठ सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि घर में- बच्ची का कॉन्फिडेंस बढाने के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ और बातों का ध्यान रखें- बेटी के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं कई बार बच्चे इसलिए भी ज्यादा इनसिक्योरिटी महसूस करते हैं, क्योंकि उन्हें इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है। अपनी बेटी के साथ समय बिताएं। जब बच्चे को लगता है कि उसे बिना किसी जजमेंट के स्वीकार किया जा रहा है, तो उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। कब सतर्क होने की जरूरत है? अगर बच्ची- तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। जरूरत पड़े तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर की मदद लेना बेहतर है। अंत में यही कहूंगी कि आपकी बेटी को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत ‘परफेक्ट दिखने’ की नहीं, बल्कि यह महसूस करने की है कि वह जैसी है, वैसी ही प्यार, सम्मान और स्वीकार्यता की हकदार है। जब घर से उसे भरोसा, भावनात्मक सुरक्षा और बिना शर्त प्यार मिलेगा, तो धीरे-धीरे वह खुद को दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी खूबियों को पहचानना सीख जाएगी। याद रखिए, बच्चों का आत्मविश्वास एक दिन में नहीं बनता। यह रोज की छोटी-छोटी बातचीत, सपोर्ट और स्वीकार्यता से मजबूत होता है। …………………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये स्टोरी भी पढ़िए पेरेंटिंग- 4 साल के बेटे को कभी डांटा-मारा नहीं: अब वो बहुत जिद्दी हो गया है, बच्चे को बिना डांटे प्यार से डिसिप्लिन कैसे सिखाएं बच्चों की जिद को पेरेंट्स सिर्फ बिहेवियरल प्रॉब्लम मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे कई साइकोलॉजिकल, पेरेंटिंग और एनवायर्नमेंटल कारण छिपे होते हैं। अगर इन कारणों को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो बच्चे के व्यवहार को संभालना आसान हो जाता है। पूरी खबर पढ़िए…



















