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दिल्ली में हिट एंड रन की सनसनीखेज घटना, ट्रैफिक पुलिसकर्मी को कुचलने की कोशिश, चालक फरार

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में बुधवार सुबह एक गंभीर हिट एंड रन की घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए. सराय जुलेना रेड लाइट पर ड्यूटी कर रहे एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी को कार चालक ने टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है. घायल ट्रैफिक कर्मी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है.

रुकने का इशारा किया, चालक ने बढ़ा दी रफ्तार

जानकारी के अनुसार, ट्रैफिक हेड कांस्टेबल राहुल बुधवार सुबह अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे. इसी दौरान उन्होंने एक कार को कथित रूप से गलत दिशा से आते देखा. नियमों का उल्लंघन होते देख उन्होंने वाहन चालक को रुकने का संकेत दिया.

बताया जा रहा है कि चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसकी रफ्तार और बढ़ा दी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार सीधे हेड कांस्टेबल राहुल की ओर बढ़ी और उन्हें जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी तेज थी कि राहुल सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए.

दो अन्य पुलिसकर्मी भी बाल-बाल बचे

घटना के समय मौके पर ट्रैफिक विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे. हेड कांस्टेबल साद बाबू खान और एएसआई असलम खान भी ड्यूटी पर तैनात थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की तेज रफ्तार के कारण दोनों पुलिसकर्मी भी खतरे की जद में आ गए थे, लेकिन समय रहते वे खुद को बचाने में सफल रहे. यदि चालक का नियंत्रण थोड़ा भी बिगड़ता तो हादसा और भी बड़ा रूप ले सकता था.

घायल पुलिसकर्मी ने बताई आपबीती

अस्पताल में उपचाराधीन हेड कांस्टेबल राहुल ने बताया कि उन्होंने केवल वाहन को रोककर जांच करने का प्रयास किया था. उनके अनुसार, चालक ने नियमों का पालन करने के बजाय वाहन की गति बढ़ा दी और उन्हें कुचलने की कोशिश करते हुए वहां से भाग निकला.

राहुल का कहना है कि घटना पूरी तरह जानबूझकर की गई प्रतीत होती है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई जा रही है ताकि फरार चालक और वाहन की स्पष्ट पहचान की जा सके.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए कई टीमें काम कर रही हैं. वाहन के रूट और उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों की भी मदद ली जा रही है.

कानून के प्रति बढ़ती बेपरवाही चिंता का विषय

यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और कानून के प्रति बढ़ती लापरवाही को उजागर करती है. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं.

अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि आरोपी चालक को जल्द गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाया जाएगा.

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आर्थिक अपराधों पर सख्त हुई योगी सरकार, तीन महीने में जांच पूरी करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए. उन्होंने कहा कि किसी भी मामले को तीन महीने से अधिक समय तक लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा.

मुख्यमंत्री का मानना है कि आर्थिक अपराध केवल सरकारी धन या संसाधनों को ही नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करते हैं. इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है.

लंबित मामलों पर होगी जवाबदेही तय

लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी पर सख्ती बरती जाए. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के पास तीन महीने से अधिक समय तक कोई मामला लंबित पाया जाएगा, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समयबद्ध जांच से न केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी, बल्कि न्याय प्रक्रिया में जनता का भरोसा भी मजबूत होगा. उन्होंने जांच अधिकारियों से निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताई.

आधुनिक तकनीक से मजबूत होगी जांच

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अपराध के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिजिटल टूल्स, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक जांच प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया जाए ताकि जटिल आर्थिक अपराधों की तह तक आसानी से पहुंचा जा सके. इससे जांच की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा.

केस मैनेजमेंट सिस्टम की हुई समीक्षा

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) के बारे में जानकारी दी. बताया गया कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म मामलों के ऑनलाइन प्रबंधन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग में काफी मददगार साबित हो रहा है.

मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था से जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी. साथ ही मामलों की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी.

155 मामलों की जांच पूरी, 71 गिरफ्तार

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस वर्ष 31 मई तक ईओडब्ल्यू ने 155 मामलों की जांच पूरी कर ली है. इसके अलावा आर्थिक अपराधों से जुड़े 71 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है.

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में जांच और कार्रवाई की गति को और तेज किया जाए ताकि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ प्रभावी संदेश दिया जा सके.

साइबर फ्रॉड और निवेश ठगी पर भी फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आर्थिक अपराधों का स्वरूप पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गया है. साइबर फ्रॉड, निवेश के नाम पर ठगी, पोंजी स्कीम, चिटफंड घोटाले और मल्टीलेवल मार्केटिंग जैसे मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधों की जांच के साथ-साथ आम जनता को भी जागरूक किया जाए. लोगों को यह बताया जाए कि किस प्रकार ठगी करने वाले गिरोह नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं.

जनता का विश्वास बढ़ाने की पहल

योगी सरकार का यह कदम आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त नीति का संकेत माना जा रहा है. समयबद्ध जांच, तकनीक आधारित निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसे फैसले जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास भी और मजबूत होगा.

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