जब लोगों ने खरीदा मौत का टिकट
जून 1997 से जून 2026 तक बीते 29 सालें में दिल्ली में काफी कुछ बदला। शहर में ऊंची-ऊंची इमारतें बनी। कई नए मॉल और मल्टीप्लेक्स खुले। इस दौरान दिल्ली की राजनीति में भी बदलाव आया। समय के साथ फैशन और हेयरस्टाइल का ट्रेंड भी बदल गया। मौसम का मिजाज भी पहले जैसा नहीं रहा। गर्मियां पहले से ज्यादा गर्म और सर्दियां ज्यादा ठंडी महसूस होने लगीं। दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क लगातार बढ़ता गया। इन 29 सालों में शहर और लोगों की जिंदगी में कई बदलाव आए, लेकिन कुछ लोगों के लिए समय मानो वहीं रुक गया। नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति के लिए जिंदगी 13 जून 1997 के बाद कभी पहले जैसी नहीं रही। उनके लिए वक्त आगे बढ़ता रहा, लेकिन उस दिन की यादें आज भी वहीं ठहरी हुई हैं।
सिर्फ 4 LPG सिलेंडरों पर ही क्यों मिलेगी सब्सिडी? मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच जानें आखिर क्या है इस फैसले की असल वजह
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के करोड़ों लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. अब उज्ज्वला योेजना के तहत मिलने वाली 300 रुपये प्रति एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी साल में सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही दी जाएगी. पहले 9 सिलेंडरों पर 300 रुपये की सब्सिडी दी जाती है. लाभार्थी परिवार को सरकार के इस फैसले के बाद मिलने वाली वार्षिक सब्सिडी 2700 रुपये से घटकर 1200 रुपये ही रह जाएगी. यानी हर परिवार को सालाना 1500 रुपये कम सब्सिडी मिलेगी.
सरकार के इस फैसले के बाद अब हर किसी के मन में सवाल है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिस वजह से सरकार को सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करनी पड़ गई. मामले में अब केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है.
PMUY beneficiary will receive the direct benefit transfer of Rs 300 a cylinder on the first four refills. According to Ministry of Petroleum and Natural Gas each year broadly the average annual consumption of a typical Ujjwala household is about four refills a year. Earlier PMUY…
— ANI (@ANI) June 8, 2026
क्या था पुराना नियम और क्या है नया बदलाव?
अब तक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में अधिकतम 9 एलपीजी सिलेंडरों पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती थी. इसका मतलब ये था कि एक परिवार को सालभर में कुल 2700 रुपये की आर्थित सहायता द्वारा प्राप्त होती थी. हालांकि, नई व्यवस्था के बाद अब सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी. लाभार्थियों को इससे साल में सिर्फ 1200 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी.
पुराने और नए नियम का अंतर
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पहले: 9 सिलेंडरों पर 300 रुपये सब्सिडी
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कुल वार्षिक लाभ: 2,700 रुपये
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अब: 4 सिलेंडरों पर 300 रुपये सब्सिडी
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कुल वार्षिक लाभ: 1,200 रुपये
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सालाना कमी: 1,500 रुपये
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार को ऐसे विश्वसनीय संकेत मिले थे कि कुछ लोग उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग कर रहे थे. कुछ मामलों में तो ये भी शिकायत आई थी कि सिलेंडरों को अन्य लोगों को बेचा जा रहा था. मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती रसोई गैस उपलब्ध करवाना है. वहीं जब किसी कल्याणकारी योजना का दुरुपयोग होने लगे तो उसका रिव्यू करना और उस हिसाब से फैसला करना सरकारी की जिम्मेदारी बन जाती है.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पात्रता व्यवस्था और सब्सिडी सिस्टम की समीक्षा करने के बाद सरकार ने ये फैसला किया है कि वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुंचे और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके.
सब्सिडी में कटौती नहीं, दुरुपयोग रोकने की कोशिश: सरकार
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सरकार उद्देश्य गरीब परिवार को मिलने वाली सहायता खत्म करना नहीं है. बल्कि ये सुनिश्चि करना है कि सब्सिडी सिर्फ उन्हीं लोगों को मिले, जिनके लिए इस योजना को बनाया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार योजनाओं में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और लीकेज रोकने के लिए काम कर रही है. अगर कोई व्यक्ति घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों में करता है तो सरकार पर इस वजह से अतिरिक्त बोझ पड़ता है. वास्तविक लाभार्थियों को इससे नुकसान होता है. सरकार का मानना है कि सब्सिडी का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर नियमों की समीक्षा जरूरी है.
उज्ज्वला योजना क्या है?
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत साल 2016 में की गई थी. इसका उद्देश्य गरीब परिवारों, खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई उपलब्ध करवाना था. योजना के तहत पात्र परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया गया. करोड़ों महिलाओं को इससे लकड़ी, कोयला और गोबर के उपलों से खाना बनाने की मजबूरी से राहत दी गई. उज्ज्वला योजना को दिया की सबसे बड़ी स्वच्छ ईंधन बेस्ड सामाजिक योजनाओं में से एक मानी जाती है.
बता दें, शुरुआत में इस योजना के तहत लाभार्थियों को हर साल 14.2 किलो वाले 12 एलपीजी सिलेंडर मिलते थे. पिछले साल सरकार ने इस कोटे को घटा दिया और नौ सिलेंडर कर दिया. सरकार ने इसे अब और कम कर दिया है.
क्या पड़ेगा लाभार्थियों पर असर?
सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से निश्चित रूप से उन परिवारों पर असर पड़ेगा, जो साल भर में विभिन्न सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं. पहले जहां 9 सिलेंडरों पर आर्थिक सहायता मिलती है, वह अब सिर्फ 4 सिलेंडरों तक ही सीमित है. हालांकि, सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य सिर्फ फर्जीवाड़े और दुरुपयोग को रोकना है. गरीब परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सरकार लाभार्थियों के उपयोग पैटर्न और योजना का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या बोले मंत्री?
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंटरनेशनल बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद भी दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें चार साल पहले की तुलना में बहुत कम हैं. इसका श्रेय उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2021 और मई 2022 में एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौतियों को दिया. उनके अनुसार, सरकार आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार काम कर रही है.
Delhi: On the rise in crude oil prices, Union Minister Hardeep Singh Puri says, "My answer to this is only one: our constant effort has been, and will continue to be, to manage the situation in the same way we have managed it over the last 100 days. We will try to handle the next… pic.twitter.com/XUCebhe9g7
— IANS (@ians_india) June 10, 2026
लाभार्थी को करीब 1000 रुपये की मिलती है मदद
सरकार का कहना है कि एक सिलेंडर की सप्लाई लागत करीब 1600 रुपये है. वहीं लाभार्थी को करीब 1000 रुपये तक की कुल मदद मिलती है. 7 जून को सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जो रोज के हिसाब से महज 1 रुपये के आसपास है. अगर परिवार में पांच लोग हैं तो ये खर्चा रोजाना महज 20 पैसे प्रति व्यक्ति पड़ता है. खनूजा ने बताया कि मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्ध के वजह से इंटरनेशनल स्तर पर गैस के दामों में इजाफा हुआ है बावजूद इसके भारत में घरेलू गैस की कीमतें दुनिया के विभिन्न देशों से बहुत कम है.
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