दक्षिण कोरिया: एआई चश्मों का इस्तेमाल कर अंग्रजी परीक्षा में नकल करते पकड़े गए छात्र
सोल, 10 जून (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में टीओईआईसी अंग्रेजी भाषा परीक्षा में दो लोगों को एआई वाले चश्मों का उपयोग करके नकल करते हुए पकड़ा गया है। यह देश में इस तरह का पहला मामला बताया गया है।
परीक्षा प्रशासन ने बुधवार को बताया कि ये दोनों लोग 10 मई और 31 मई को परीक्षा देते समय पकड़े गए थे। उन पर उस समय शक हुआ जब निगरानी करने वालों (प्रॉक्टर्स) ने देखा कि वे एआई चश्मे पहन सकते हैं। इसके बाद जांच की गई।
कोरिया टीओईआईसी समिति ने कहा कि दोनों परीक्षार्थियों के परीक्षा परिणाम रद्द कर दिए गए हैं और उन्हें अगले 4 साल तक टीओईआईसी परीक्षा देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
एआई चश्मे ऐसे उपकरण हैं जिनमें कैमरा और माइक्रोफोन होते हैं और इनमें जनरेटिव एआई तकनीक भी होती है। ये चश्मे सामने दिखने वाली चीजों का विश्लेषण कर सकते हैं और जानकारी लेंस या अंदर लगे स्पीकर के जरिए उपयोगकर्ता तक पहुंचा सकते हैं।
कुछ नए मॉडल सामान्य चश्मों जैसे दिखते हैं, इसलिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है।
समिति ने कहा है कि निगरानी करने वालों को ऐसे एआई चश्मों को पहचानने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग भी ऐसे उपकरणों को परीक्षा केंद्रों में ले जाने पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है, खासकर वार्षिक कॉलेज प्रवेश परीक्षा के दौरान।
इसी बीच, दक्षिण कोरिया की कंपनी एसके टेलीकॉम ने जापान और ताइवान की बड़ी दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर नई पीढ़ी की एआई तकनीकों में निवेश के लिए एक संयुक्त कोष बनाने की घोषणा की है।
इस साझेदारी में जापान की एनटीटी और ताइवान की चूनघवा टेलीकॉम भी शामिल हैं। ये मिलकर लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कोष बनाएंगे, जिसका नाम कैटलाइट कैपिटल रखा गया है।
यह कोष उत्तर अमेरिका, एशिया और यूरोप में एआई स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। इसमें एआई चिप्स, कूलिंग सिस्टम और एआई सेवा अनुप्रयोगों जैसी पूरी तकनीकी शृंखला शामिल होगी।
एसके हाइनिक्स कंपनी भी इसमें शामिल होने की तैयारी कर रही है।
कंपनी ने कहा कि यह कोष एआई, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और नेटवर्क तकनीक को जोड़ने का एक अवसर होगा और पूर्वी एशिया की तकनीकी क्षमता को वैश्विक नवाचार प्रणाली से जोड़ने में मदद करेगा।
--आईएएनएस
एएमटी/एएस
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Somvati Amavasya 2026: कब है सोमवती अमावस्या? जानें पूजा का महत्व और पीपल की 108 बार परिक्रमा करने की मान्यता
Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन जब यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है. सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन किसी महापर्व से कम नहीं माना जाता. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के पेड़ की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सोमवती अमावस्या को लेकर लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. आइए जानते हैं 14 या 15 जून कब है सोमवती अमावस्या और पति की लंबी उम्र की कामना करने के लिए इस दिन पीपल की 108 परिक्रमा करने के पीछे के रहस्य के बारे में.
कब है सोमवती अमावस्या?
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरु होगी. वहीं इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि के समय मौजूद तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, क्योंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी और इस दिन सोमवार भी है इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून 2026, सोमवार को किया जाएगा.
क्या है पीपल की 108 परिक्रमा करने की मान्यता?
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा और उसकी 108 परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. हिंदू धर्म में पीपल को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पीपल के पेड़ की जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में श्री हरि भगवान विष्णु और उसके ऊपरी भाग में भगवान शिव का वास होता है. इसलिए पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. 108 परिक्रमा करते समय महिलाएं कच्चा सूत या धागा पीपल के पेड़ पर लपेटती हैं और अपने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए कामना करती हैं. माना जाता है कि इस पूजा को करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है.
108 परिक्रमा की पौराणिक कथा
सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा करने के पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है. कथा के अनुसार सोना नाम की एक पतिव्रता स्त्री के पति की मृत्यु हो गई थी. पति को फिर से जिंदा करने के लिए उसने बहुत श्रद्धा के साथ पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की और ईश्वर से प्रार्थना की. उसकी अट्टू भक्ति से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसके पति को फिर से नया जीवन दिया. तभी से मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की 108 बार परिक्रमा कपने से अखंड सौभाग्य और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
सोमवती अमावस्या का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, जप, दान और पूजा-पाठ करने से शुभ फल प्राप्त होता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है. विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए इस दिन व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित महिलाएं भी मनचाहे वर के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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