लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बनने जा रहे PM नरेंद्र मोदी, आज NDA की बैठक में पास होगा अभिनंदन प्रस्ताव
दिल्ली में 10 जून को NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की बड़ी बैठक होने जा रही है। दरअसल इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया जाएगा। बैठक में बीजेपी और NDA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी के लगातार 12 साल पूरे होने के मौके पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और फिर 2024 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर उन्होंने अपना कार्यकाल जारी रखा। अब 10 जून 2026 को वह लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहे हैं।
क्या है BJP की तैयारी?
वहीं भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने को बड़े स्तर पर पेश कर रही है। पार्टी देशभर में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम चला रही है। दिल्ली में आयोजित बैठक में भी मोदी सरकार के कामकाज और विकास परियोजनाओं पर चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, रेलवे, एक्सप्रेसवे, रक्षा और गरीब कल्याण योजनाओं पर काम किया है। इसी क्रम में पार्टी ने दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रदर्शनी भी लगाई है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं।
झंडेवाला मंदिर में पूजा और अन्य कार्यक्रम
वहीं इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में झंडेवाला मंदिर में पूजा और आरती कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। पार्टी संगठन इस मौके को राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से भी अहम मान रहा है। दरअसल जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 1952 में पहला आम चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला था। 1947 से 1952 तक वह अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे थे। इसी वजह से लगातार चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की अलग गणना की जाती है।
नरेंद्र मोदी अब लगातार चुनाव जीतकर 12 साल तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन गए हैं। इससे पहले इंदिरा गांधी का कुल कार्यकाल करीब 14 साल रहा था, लेकिन वह लगातार नहीं था। मोदी का मौजूदा कार्यकाल लगातार तीसरी बार की सरकार के रूप में जारी है।
हिंदू धर्म में दीपक जलाना क्यों माना जाता है शुभ? जानिए आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में दीपक केवल प्रकाश का साधन नहीं, बल्कि आस्था, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि घर की दैनिक पूजा, मंदिरों की आरती, त्योहारों और हर शुभ कार्य की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की जाती है। भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संदेश को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
वैदिक ग्रंथों में अग्नि को विशेष स्थान दिया गया है। ऋग्वेद के एक मंत्र में अग्नि को मनुष्यों के बीच अमृत स्वरूप, ज्ञान देने वाली और जीवन को दिशा प्रदान करने वाली शक्ति बताया गया है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार अग्नि देवताओं और मनुष्यों के बीच संवाद का माध्यम है। यही वजह है कि यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ में अग्नि का विशेष महत्व माना गया है।
धार्मिक दृष्टि से दीपक की लौ उसी दिव्य अग्नि तत्व का प्रतीक मानी जाती है। जब कोई व्यक्ति दीपक जलाता है, तो वह केवल एक ज्योति प्रज्वलित नहीं करता, बल्कि अपने जीवन में ज्ञान, आशा, विश्वास और सकारात्मक विचारों का स्वागत करता है। दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करता है और यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न हों, ज्ञान और सत्य का प्रकाश हमेशा मार्ग दिखाता है।
हिंदू धर्म में यह भी मान्यता है कि जहां नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। घर के मंदिर में सुबह और शाम दीपक जलाने की परंपरा इसी विश्वास से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि इससे वातावरण शुद्ध होता है, मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का संचार होता है।
आध्यात्मिक रूप से दीपक आत्मज्योति का भी प्रतीक है। यह मनुष्य को याद दिलाता है कि उसे अपने भीतर के अज्ञान, नकारात्मकता और भ्रम को दूर कर आत्मज्ञान की ओर बढ़ना चाहिए। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में दीपक को शुभता, पवित्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया है।
दीपक जलाने की परंपरा केवल धार्मिक रीति नहीं, बल्कि जीवन को प्रकाश, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना से भरने का एक सुंदर संदेश भी है। यही संदेश इसे सनातन संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल करता है।




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