Explainer: एंटी पेपर लीक से लेकर MSME बिल तक 19 विधेयक पास, जानिए क्या बदला और कौन सा प्रस्ताव अटका
Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र इस बार लगातार हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच चला. विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा तो सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया. प्रदर्शन, नारेबाजी और विपक्ष की ओर से सरकार से जवाब मांगने के बीच कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
इसके बावजूद सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने में सफल रही. उपलब्ध संसदीय आंकड़ों के मुताबिक, मानसून सत्र में कुल 19 विधेयक पारित हुए. इनमें परीक्षा में पेपर लीक रोकने से लेकर MSME के भुगतान, टैक्स कानून, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़े बिल शामिल हैं.
ऐसे में सवाल है कि हंगामे के बीच संसद का कामकाज कितना हुआ, कौन-कौन से बड़े बिल पास हुए और कौन से प्रस्ताव अभी आगे की प्रक्रिया में हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
कितने बिल संसद से पास हुए?
संसदडॉटइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार मानसून सत्र में 19 विधेयक पास कराने में सफल रही. इनमें कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन करने वाले विधेयक शामिल हैं. हालांकि, इन विधेयकों के पारित होने की गति को लेकर विपक्ष ने सवाल भी उठाए. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से सात विधेयक महज 36 मिनट में पारित हो गए. इनमें सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ा एंटी पेपर लीक बिल, केरल नाम परिवर्तन विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक समेत कई विधेयक शामिल थे.
इस सत्र में पास हुए प्रमुख बिल
- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
- केरल नाम परिवर्तन विधेयक
- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026
- कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक
- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
- बैंकर्स बुक्स से जुड़े कानूनों में बदलाव का विधेयक
इनमें से कुछ कानूनों का सीधा असर छात्रों, छोटे कारोबारियों, टैक्सपेयर्स और न्याय व्यवस्था पर पड़ सकता है.
एंटी पेपर लीक बिल क्यों महत्वपूर्ण है?
मानसून सत्र में पारित महत्वपूर्ण विधेयकों में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 भी शामिल है. इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करना है.
पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में सरकार का तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती बढ़ाने के लिए कानूनी प्रावधानों को मजबूत करना जरूरी है.
टैक्स कानून में क्या बदलाव हुआ?
संसद ने कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक भी पारित किया है. इसका उद्देश्य टैक्स से जुड़े मौजूदा कानूनों और प्रावधानों में जरूरी बदलाव करना है. टैक्स व्यवस्था में समय के साथ आने वाले बदलावों और प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक ऐसे संशोधन किए जाते हैं. इसका असर टैक्स प्रशासन और करदाताओं से जुड़े नियमों पर पड़ सकता है.
MSME के लिए क्यों अहम है भुगतान वाला बिल?
छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए MSME Development (Amendment) Bill, 2026 महत्वपूर्ण है. देश में छोटे कारोबार अक्सर बड़ी कंपनियों या दूसरे खरीदारों को सामान और सेवाएं देते हैं, लेकिन कई बार उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल पाता. इससे उनके कारोबार के लिए जरूरी वर्किंग कैपिटल की कमी हो जाती है.
नए संशोधन का उद्देश्य ऐसी स्थिति में MSMEs को राहत देने वाली विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत करना है. इससे छोटे कारोबारों को लंबित भुगतान से जुड़े विवादों का जल्दी समाधान मिलने की उम्मीद है.
सुप्रीम कोर्ट में अब कितने जज होंगे?
संसद ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी. जजों की संख्या बढ़ाने का एक प्रमुख उद्देश्य लंबित मामलों के बोझ को कम करना और न्यायिक व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना है.
भारत की अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने को न्यायिक क्षमता मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है.
जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के नियमों में बदलाव
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी दोनों सदनों से पारित हो चुका है. इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों को मजबूत करना है. खासकर देर से होने वाले पंजीकरण के मामलों में प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सख्त बनाने की कोशिश की गई है.
जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों, नागरिक पहचान और विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है. इसलिए इस व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासनिक रूप से अहम माना जाता है.
अब जानते हैं कौन से बिल अभी पेंडिंग हैं
संसद में हर बिल एक ही सत्र में कानून नहीं बनता. कुछ विधेयक पेश होने के बाद समिति के पास भेजे जाते हैं, कुछ पर चर्चा होती है और कुछ पर राजनीतिक सहमति नहीं बनने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती. मानसून सत्र के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर भी आगे की प्रक्रिया बाकी है.
परिसीमन बिल का क्या हुआ?
परिसीमन बिल, 2026 को लेकर भी संसद में चर्चा हुई है. परिसीमन का संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से है. यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिसीमन का सीधा संबंध चुनाव क्षेत्रों और भविष्य में सीटों के बंटवारे से होता है. उपलब्ध आधिकारिक संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, बिल को लोकसभा में पेश किया गया और इस पर चर्चा हुई, लेकिन आगे की प्रक्रिया को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है.
महिला आरक्षण का क्या स्टेटस है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे संविधान के 106वें संशोधन अधिनियम, 2023 के रूप में पारित किया गया था, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है. इसमें SC/ST के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान शामिल है.
इस कानून का लागू होना परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है. इसलिए महिला आरक्षण को लेकर आगे की प्रक्रिया भी इन्हीं संवैधानिक और प्रशासनिक कदमों से जुड़ी है.
FCRA बिल क्यों चर्चा में है?
Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA बिल भी इस सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा वाले विधेयकों में रहा. सरकार ने इसे JPC यानी संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का फैसला किया है. FCRA का संबंध विदेशों से मिलने वाले फंड और योगदान को नियंत्रित करने से है. सरकार का कहना है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियम जरूरी हैं.
वहीं विपक्षी दलों ने बिल के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि इससे अल्पसंख्यक संस्थान प्रभावित हो सकते हैं. सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बिल का कोई प्रावधान किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बनाता. अब JPC बिल की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी. इसके बाद बिल की आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी.
हंगामे के बावजूद क्या संसद ने काम किया?
संसद में हंगामा होना और कामकाज पूरी तरह ठप होना अलग-अलग बातें हैं. इस सत्र में कई मौकों पर कार्यवाही बाधित हुई, लेकिन इसी दौरान सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में भी सफल रही.
यानी तस्वीर दो हिस्सों में दिखाई देती है. एक तरफ विपक्ष का लगातार विरोध और सदन में हंगामा रहा, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कई विधेयकों को आगे बढ़ाया. विपक्ष का आरोप रहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है. वहीं सरकार का तर्क रहा कि विपक्ष लगातार कार्यवाही बाधित कर रहा है.
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आखिर क्या रहा मानसून सत्र का निचोड़?
मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी हंगामेदार रहा, लेकिन विधायी कामकाज के लिहाज से इसे पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कहा जा सकता.
एक नजर में समझें:
- मानसून सत्र में कुल 19 विधेयक पारित हुए.
- कुछ विधेयक बहुत कम समय में पारित होने को लेकर चर्चा में रहे.
- पेपर लीक रोकने, MSME के भुगतान, टैक्स व्यवस्था, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़े महत्वपूर्ण कानून पारित हुए.
- FCRA बिल को JPC के पास भेजा गया है, इसलिए इस पर अभी अंतिम फैसला बाकी है.
- परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी.
- विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई.
संसद का मानसून सत्र भले ही राजनीतिक हंगामे के लिए ज्यादा चर्चा में रहा हो, लेकिन इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक कानून बनाने की प्रक्रिया में आगे बढ़े. 19 बिलों का पारित होना बताता है कि भारी राजनीतिक गतिरोध के बावजूद सरकार का विधायी एजेंडा पूरी तरह रुका नहीं.
हालांकि, FCRA जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को JPC के पास भेजे जाने से साफ है कि कुछ बड़े मुद्दों पर अभी लंबी संसदीय प्रक्रिया बाकी है. आने वाले समय में JPC की रिपोर्ट, परिसीमन से जुड़े फैसले और महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी.
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