लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विदेश नीति को संभालने के तरीके पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति सिर्फ़ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है और अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले भी लगाया। हालांकि, दीक्षित के यह पूछने पर कि क्या गांधी ने उन्हें मेलोनी (इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी) समझकर गले लगाया था, एक विवाद खड़ा हो गया; इस पर गांधी ने जवाब दिया, "मैं अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा हूं।"
हालांकि, इसको लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल से सवाल पूछा। इसके जवाब में रणधीर जयसवाल ने कहा कि इटली के साथ हमारे बेहद मजबूत और गहरे संबंध है। हम इस रिश्ते को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक दो देशों के बीच रिश्ते और मित्रता की बात है, उसको एक आदरपूर्ण दायरे में रखना जरूरी होता है। रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि मोदी के मन में यह बात बैठ गई है कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है।
इसके बाद गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस के प्रमुख संदीप दीक्षित को गले लगाकर दिखाया कि मौजूदा सरकार के लिए विदेश नीति का क्या मतलब है। उन्होंने कहा, "सोचिए कितनी अज्ञानता है... उन्हें यह ख्याल कहां से आया कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है?" तब दीक्षित ने गांधी से पूछा, "मेलोनी समझकर तो नहीं गले लगाया था?" गांधी ने आगे BJP-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को "जोकरों का झुंड" बताया, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) हिस्ट्री के नए सिलेबस से दिल्ली सल्तनत पर आधारित एक अहम पेपर हटा दिया है। यह पेपर - "दिल्ली सल्तनत: मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता का ढांचा (13वीं-14वीं सदी)" - तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था और कई दशकों से मध्यकालीन भारत के मुख्य पेपर्स में से एक रहा है।
दिल्ली सल्तनत वाले पेपर में क्या पढ़ाया जाता था?
इस पेपर में 13वीं और 14वीं सदी के दौरान उत्तर भारत का इतिहास शामिल था। इसमें मुख्य रूप से ये बातें शामिल थीं:
मध्यकालीन राज्य का गठन कैसे हुआ?
सत्ता और प्रशासन की व्यवस्था कैसी थी?
शासक अपनी राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल कैसे करते थे?
उस दौर के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में क्या बदलाव आए?
यह पेपर एक सामान्य इतिहास कोर्स है, लेकिन इसमें मध्यकालीन भारत के इतिहास का खास अध्ययन किया जाता है।
एक्सपर्ट की राय
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक हिस्ट्री प्रोफेसर के अनुसार, पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) लेवल पर पढ़ाए जाने वाले 'दिल्ली सल्तनत' पेपर की तुलना अंडर-ग्रेजुएट (UG) लेवल पर पढ़ाए जाने वाले 'दिल्ली सल्तनत' पेपर से नहीं की जा सकती।
PG पेपर में किसी खास विषय की गहराई से पढ़ाई होती है, जबकि UG पेपर में भारतीय इतिहास की व्यापक और सामान्य पढ़ाई कराई जाती है। इसी तरह, "History of North India, c. 1400–1550" (उत्तरी भारत का इतिहास, लगभग 1400–1550) नाम का पोस्ट-ग्रेजुएट पेपर उस क्षेत्र के इतिहास की एक खास पढ़ाई थी, जबकि अंडर-ग्रेजुएट लेवल पर इसी विषय को ज़्यादा विस्तार से पढ़ाया जाता है।
MA हिस्ट्री सिलेबस से कई और पेपर हटाए गए
DSE पेपर क्या हैं?
इतिहास विभाग ने तीसरे सेमेस्टर के लिए कुल 38 DSE (डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव) पेपर का प्रस्ताव दिया था। हालाँकि, इनमें से केवल 16 पेपर ही फ़ाइनल नोटिफ़ाइड सिलेबस में शामिल किए गए। दूसरे शब्दों में, प्रस्तावित 38 पेपरों में से 22 पेपर फ़ाइनल सिलेबस में जगह नहीं बना पाए।
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